27 जुलाई को, सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने पूर्वी प्रांत और रियाद में तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले कई ड्रोनों को सफलतापूर्वक रोका और नष्ट कर दिया। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से इराकी क्षेत्र से संचालित 'ईरान-समर्थित आतंकवादी मिलिशिया' पर इन हमलों का आरोप लगाया । ठीक अगले दिन, 28 जुलाई को ड्रोन हमलों की एक और लहर दर्ज की गई, जो दो दिनों के भीतर दूसरा हमला था ।
इस घटनाक्रम के बाद, इराक ने इन आरोपों की जांच का आदेश दिया। वहीं सऊदी अरब ने कहा कि वह 'जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है' और उसने बगदाद से अपने क्षेत्र को हमलों के लिए लॉन्चपैड के रूप में इस्तेमाल होने से रोकने का आग्रह किया ।
इससे कुछ दिन पहले, 22-23 जुलाई को, यमन के हूती आंदोलन (अंसार अल्लाह) ने दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों—'एन्सेलिया' (Encelia) और 'लैला' (Layla)—को बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज़ मिसाइलों और ड्रोनों से निशाना बनाया । एक सऊदी समाचार एजेंसी ने बाद में पुष्टि की कि इनमें से एक टैंकर में आग लग गई थी ।
हूतियों ने कहा कि इन टैंकरों ने सऊदी अरब पर उनकी घोषित नौसैनिक नाकाबंदी (naval blockade) का उल्लंघन किया था, जिसे उन्होंने कुछ दिन पहले लागू करने की घोषणा की थी । इस कदम को वैश्विक तेल आपूर्ति पर 'दूसरा अड़ंगा' (second chokepoint) बनाने की एक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब ईरान पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लगभग बंद कर चुका है ।
ये हमले एक बेहद नाजुक कूटनीतिक पल में हुए हैं। दो सप्ताह की तीव्र हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के बाद, अमेरिकी सेना ने 25 जुलाई को नए अभियानों को रोक दिया और ईरान ने भी जवाबी हमलों से परहेज किया । कतर, यूएई और पाकिस्तान जैसे देशों की अगुवाई में मध्यस्थ दोनों पक्षों को वापस औपचारिक वार्ता की मेज पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। जून में अंकारा में हुई वार्ता में 'उत्साहजनक प्रगति' (encouraging progress) की सूचना मिली थी, और इस्लामाबाद ज्ञापन (Islamabad Memorandum) के तहत 60 दिनों के लिए प्रतिबंधों को स्थगित करने पर सहमति बनी थी ।
हालांकि, यह युद्ध विराम बेहद नाजुक बना हुआ है। 8 जुलाई को, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान द्वारा बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद अंतरिम समझौते को 'खत्म' घोषित कर दिया था। हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने नाटो शिखर सम्मेलन में इस बयान को नहीं दोहराया, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह एक रणनीतिक दबाव का खेल हो सकता है । संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने चेतावनी दी है कि ये वृद्धि पूर्ण पैमाने पर युद्ध में लौटने का जोखिम पैदा करती है और उन्होंने तत्काल बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया है ।
इराक से ड्रोन हमले और हूती टैंकर हमले कुछ ही दिनों के अंतराल पर हुए हैं, जो ईरान-समर्थित प्रॉक्सी समूहों द्वारा एक सुनियोजित, बहु-मोर्चा रणनीति को दर्शाता है। इसका उद्देश्य सऊदी अरब पर दबाव बनाना और वैश्विक ऊर्जा प्रवाह को बाधित करना है, खासकर तब जब अमेरिका-ईरान युद्धविराम कायम है ।
दोनों हमलों ने जानबूझकर सऊदी पेट्रोलियम सुविधाओं और टैंकरों को निशाना बनाया। हूती नाकाबंदी की धमकी, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद करने के साथ मिलकर, वैश्विक तेल आपूर्ति को कसने और किसी भी बातचीत में अपनी पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से है । विशेषज्ञों का मानना है कि हूती हमलों के बाद तेल की कीमतों में उछाल आया, क्योंकि शिपिंग व्यवधान लाल सागर और खाड़ी दोनों क्षेत्रों में फैल गया ।
इन बढ़ती घटनाओं ने अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक डी-एस्केलेशन को खतरे में डाल दिया है। जवाब में, अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में मिलिशिया के खिलाफ संयुक्त हमले किए हैं, जबकि मध्यस्थों ने चेतावनी दी है कि लगातार हमले चल रही वार्ता को पटरी से उतार सकते हैं ।
यूरोपीय संघ , संयुक्त राष्ट्र और कई मध्यस्थों ने हूती नाकाबंदी की धमकी और ड्रोन हमलों की निंदा की है, इसे एक 'खतरनाक उत्तेजना' (dangerous escalation) बताया है जो कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर करता है । यूरोपीय संघ ने विशेष रूप से लाल सागर हमलों को 'अस्वीकार्य और अवैध' करार दिया और हूतियों से अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग को खतरे में डालने वाली सभी कार्रवाइयों को रोकने का आग्रह किया ।
स्थिति अभी भी बेहद गतिशील और अनिश्चित बनी हुई है। जुलाई 2026 के अंत तक, अमेरिका और ईरान लगातार तीसरे दिन आपसी संयम बनाए हुए हैं, लेकिन कूटनीति की ये खिड़की धीरे-धीरे बंद होती दिख रही है ।