युगांडा में इस प्रकोप की आधिकारिक शुरुआत मई 2026 के मध्य में हुई थी । स्वास्थ्य मंत्री क्रिस बैरियोमुन्सी (Chris Baryomunsi) ने 28 जुलाई 2026 को देश को इबोला-मुक्त घोषित किया। यह घोषणा 42 दिनों की अनिवार्य निगरानी अवधि के बाद की गई, जो वायरस के अधिकतम दो इन्क्यूबेशन चक्रों के बराबर होती है। इस पूरी अवधि के दौरान कोई नया मामला सामने नहीं आया ।
युगांडा में कुल 20 पुष्ट मामले दर्ज किए गए:
आखिरी मरीज को 16 जुलाई 2026 को इलाज केंद्र से छुट्टी दे दी गई, जिसके बाद 42 दिनों की काउंटडाउन शुरू हुई । 21 जून 2026 के बाद युगांडा में कोई नया मामला सामने नहीं आया ।
जहां युगांडा ने राहत की सांस ली, वहीं डीआरसी में हालात लगातार बिगड़ते गए। 14 मई 2026 को इटुरी प्रांत (Ituri Province) में शुरू हुआ यह प्रकोप, अब तक के सबसे तेजी से फैलने वाले इबोला प्रकोपों में से एक बन गया है । विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक ने 16 जुलाई 2026 को चेतावनी दी थी कि यह महामारी 'रिस्पॉन्स से भी तेज' फैल रही है ।
आंकड़ों पर नजर डालें तो इसकी गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है:
तुलना के लिए, 2018-2019 में DRC में फैले इबोला को 2,000 मामलों तक पहुंचने में 10 महीने से ज्यादा लगे थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा महज दो महीने में पार हो गया ।
इसके अलावा, फ्रांस और जर्मनी में भी आयातित मामले सामने आए। फ्रांस में एक डॉक्टर ठीक हो गया, जबकि जर्मनी में भी एक मामला रिपोर्ट हुआ ।
महामारी को फैलने से रोकने के लिए युगांडा ने 27 मई 2026 को डीआरसी के साथ अपनी सीमा बंद कर दी। यह एक अस्थायी कदम था, जिसमें केवल महामारी राहत, मानवीय सहायता, जरूरी सामान और अधिकृत यात्रियों को ही आने-जाने की अनुमति थी । सभी को सख्त स्वास्थ्य जांच और निगरानी से गुजरना पड़ता था ।
अमेरिकी सीडीसी (CDC) ने युगांडा और DRC के लिए 'लेवल 4' यात्रा सलाह जारी की, जिसमें 'वहां न जाएं' (Do Not Travel) कहा गया । कनाडा ने भी दोनों देशों के लिए यात्रा प्रतिबंध लगा दिए।
इस महामारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि 'बुंडिबुग्यो वायरस' (Bundibugyo virus) के लिए कोई लाइसेंस प्राप्त टीका या इलाज मौजूद नहीं है । मर्क (Merck) की एर्वेबो (Ervebo) वैक्सीन केवल ज़ेरे इबोलावायरस (Zaire ebolavirus) के लिए लाइसेंस प्राप्त है, बुंडिबुग्यो के लिए नहीं ।
हालांकि, उम्मीद की एक किरण है। एफ्रीका सीडीसी (Africa CDC) DRC में क्लिनिकल ट्रायल आयोजित करने की तैयारी कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या एर्वेबो वैक्सीन बुंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ भी कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान कर सकती है । जुलाई 2026 में न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि एर्वेबो आंशिक सुरक्षा दे सकता है, जो इस ट्रायल के लिए वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है । हालांकि, अफ्रीकन मेडिसिन्स एजेंसी (AMA) ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा उपाय 'बिना अनुकूलन के पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने में असमर्थ' हैं ।
डीआरसी में राहत कार्य को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:
नतीजा दो विपरीत तस्वीरें हैं। एक तरफ युगांडा, जिसने तेजी से सीमाएं बंद कर, निगरानी बढ़ाकर और सभी मामलों का इलाज करके इस प्रकोप पर काबू पा लिया। दूसरी तरफ DRC, जहां महामारी बेकाबू हो रही है और उसके पास न तो कोई लाइसेंस प्राप्त टीका है और न ही इलाज।