13 नवंबर 2025 को, जर्मन संसद (बुंडेस्टाग) ने औपचारिक रूप से एक द्विदलीय "चीन और जर्मनी के बीच सुरक्षा-प्रासंगिक आर्थिक संबंधों की समीक्षा के लिए आयोग" का गठन किया । यह प्रस्ताव CDU/CSU और SPD गठबंधन दलों द्वारा पेश किया गया था और AfD के समर्थन से पारित हुआ, जबकि ग्रीन्स और वाम दल ने मतदान में भाग नहीं लिया ।
नवंबर 2025 की एक रॉयटर्स रिपोर्ट के अनुसार, जर्मन सरकार विशेष रूप से सुरक्षा-प्रासंगिक क्षेत्रों को लक्षित करते हुए अपनी व्यापार नीतियों का एक व्यवस्थित पुनर्मूल्यांकन कर रही है । इसका एक प्रमुख कारण बीजिंग द्वारा दुर्लभ मृदा (रेयर अर्थ) के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध थे, जिसने दिखाया कि जर्मनी की औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को कितनी जल्दी बाधित किया जा सकता है ।
मर्केटर इंस्टीट्यूट फॉर चाइना स्टडीज (MERICS) और हिनरिच फाउंडेशन के मई 2025 के एक विश्लेषण ने तीन अभिसरण कमजोरियों की पहचान की: चीनी कंपनियों का मूल्य श्रृंखला में तेजी से ऊपर आना और जर्मन फर्मों की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करना; कुछ महत्वपूर्ण कच्चे माल के लिए जर्मनी की लगभग 100% निर्भरता; और यह जोखिम कि चीन में जर्मन कॉर्पोरेट निवेश बीजिंग के लिए रणनीतिक लाभ पैदा कर सकते हैं ।
9 फरवरी 2026 को, फ्रांसीसी उच्चायोग रणनीति और योजना (Haut-Commissariat au Plan) ने एक सख्त रिपोर्ट जारी की जिसमें चीन के औद्योगिक विस्तार को एक 'स्टीमरोलर' (भाप रोलर) बताया गया, जो यूरोपीय उद्योग को कुचल रहा है । रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि यूरोपीय विनिर्माण के मूल्य वर्धन का 55% तक हिस्सा चीनी प्रतिस्पर्धा के संपर्क में आ सकता है, विशेष रूप से मशीनरी, ऑटोमोटिव, केमिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उन्नत क्षेत्रों में ।
रिपोर्ट ने दो कठोर नीतिगत प्रतिक्रियाओं का प्रस्ताव रखा: EU में सभी चीनी आयातों पर 30% का एक समान टैरिफ, या रॅन्मिन्बी (चीनी मुद्रा) के मुकाबले यूरो के मूल्य में 20-30% की गिरावट । इसमें यह भी पाया गया कि चीनी निर्माता अब लगभग चार गुना गति और यूरोपीय प्रतिस्पर्धियों की लागत के एक चौथाई पर सामान का उत्पादन कर रहे हैं ।
27 जुलाई 2026 को, इटली के मशीन टूल निर्माता संघ UCIMU ने EU से चीनी प्रतिस्पर्धा के खिलाफ तत्काल व्यापार सुरक्षा उपायों को मजबूत करने का आह्वान किया । मुख्य मुद्दे:
EU ने ठोस रक्षात्मक उपायों को लागू करना शुरू कर दिया है। 1 जुलाई 2026 से, EU ने स्टील आयात पर टैरिफ दोगुना कर 50% कर दिया और शुल्क-मुक्त आयात कोटा आधा कर दिया, साथ ही EU क्षेत्र में प्रवेश करने वाले प्रत्येक छोटे पार्सल पर 3 यूरो का शुल्क लगाया (जिसका लक्ष्य शीइन और टेमू जैसे प्लेटफॉर्म हैं) । यूरोपीय आयोग चीन के निर्यात उछाल से यूरोपीय उद्योग की रक्षा के लिए एक व्यापक नीतिगत बदलाव पर सक्रिय रूप से बहस कर रहा है ।
चीन ने लगातार EU और अमेरिका द्वारा अतिउत्पादन (ओवरकैपेसिटी) के आरोपों को सार्वजनिक रूप से खारिज किया है, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों, स्टील और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में। 2025-2026 के दौरान प्रेस ब्रीफिंग और आधिकारिक बयानों में, बीजिंग ने तर्क दिया है कि इसका औद्योगिक उत्पादन राज्य-निर्देशित अतिउत्पादन से नहीं, बल्कि बाजार की मांग, नवाचार और तुलनात्मक लाभ से प्रेरित है। यह ऊपर वर्णित बढ़ते तनावों के बीच EU-चीन व्यापार वार्ता में विवाद का एक आवर्ती बिंदु रहा है।
निष्कर्ष: जर्मनी रिकॉर्ड €87 बिलियन घाटे, दुर्लभ मृदा निर्यात प्रतिबंधों के झटके, और फ्रांस की चेतावनी कि 55% तक यूरोपीय विनिर्माण खतरे में है, से प्रेरित होकर एक प्रतीकात्मक चीन रणनीति से बाध्यकारी विधायी पुनर्परीक्षा की ओर बढ़ गया है। इटली के मशीन टूल उद्योग ने EU पर कार्रवाई करने का दबाव बढ़ाया, और ब्रुसेल्स ने टैरिफ बढ़ोतरी और पार्सल आयात शुल्क के साथ जवाब दिया है, जबकि बीजिंग अतिउत्पादन के आरोपों को खारिज करना जारी रखे हुए है।