लेकिन दर के भीतर होना और उसके औचित्य को स्वीकार करना दो अलग बातें थीं। ब्रसेल्स ने शुल्क की दर को समझौते के अनुरूप माना, पर जबरन श्रम के आरोपों को EU के खिलाफ उचित आधार नहीं माना। यही वजह है कि आयोग की भाषा को ‘guarded welcome’ यानी सावधान और सीमित स्वागत कहा गया।
अमेरिका ने कहा कि उसके व्यापारिक साझेदार जबरन श्रम से बने उत्पादों को अपने बाजारों में आने से रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर ने इसे अमेरिकी श्रमिकों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा से जोड़ा ।
यूरोपीय अधिकारियों और कई अन्य व्यापारिक साझेदारों ने इस दलील को खारिज किया:
EU का कहना है कि उसने जबरन श्रम से बने उत्पादों पर रोक लगाने के लिए अपना Forced Labour Regulation बनाया है। यह नियम EU बाजार में ऐसे उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का ढांचा तैयार करता है और घरेलू तथा आयातित—दोनों तरह के सामान पर लागू होगा। इसके प्रभावी होने की निर्धारित तारीख 14 दिसंबर 2027 है ।
27 जुलाई 2025 को स्कॉटलैंड के टर्नबेरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने व्यापार और टैरिफ पर एक राजनीतिक समझौता किया। अगस्त 2025 के संयुक्त वक्तव्य में इसके प्रमुख प्रावधानों को विस्तार दिया गया ।
मुख्य बिंदु थे:
EU के लिए यह समझौता 30% तक के संभावित अमेरिकी शुल्क की तुलना में कम नुकसान वाला विकल्प माना गया, लेकिन यूरोप में इसे लेकर राजनीतिक असंतोष भी रहा। आलोचकों का कहना था कि EU ने अमेरिकी सामान के लिए बाजार खोलने के बदले पर्याप्त रियायतें दीं।
समझौते को लागू करने की प्रक्रिया आसान नहीं रही। ट्रंप ने 4 जुलाई—अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ—तक EU से ratification की मांग की थी और ऐसा न होने पर “बहुत अधिक” टैरिफ लगाने की धमकी दी थी ।
मार्च 2026 में यूरोपीय संसद ने अपनी वार्ता स्थिति तय की। 20 मई को संसद और EU परिषद ने समझौते के टैरिफ संबंधी हिस्सों को लागू करने वाले नियमों पर अस्थायी सहमति बनाई । इसके बाद 16 जून को यूरोपीय संसद ने 440-151 मतों से ratification को मंजूरी दी; 50 सदस्यों ने मतदान में भाग नहीं लिया ।
EU की ओर से किए जाने वाले शुल्क संबंधी बदलाव 1 जुलाई 2026 से लागू हो गए। इनके तहत अमेरिकी औद्योगिक सामान पर कई शुल्क हटाए गए और कुछ कृषि-खाद्य उत्पादों को बेहतर पहुंच दी गई । इस राजनीतिक पृष्ठभूमि में आयोग के लिए जुलाई में फिर से टकराव बढ़ाना आसान नहीं था।
20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने Learning Resources, Inc. v. Trump मामले में 6-3 का फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) राष्ट्रपति को व्यापक और खुले-ended टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता ।
इस फैसले ने पहले लगाए गए अस्थायी 10% वैश्विक टैरिफ का कानूनी आधार कमजोर कर दिया। IEEPA के तहत राष्ट्रपति को आपातकालीन परिस्थितियों में आयात को नियंत्रित करने की शक्ति मिलती है, लेकिन अदालत ने माना कि इसका अर्थ स्वतः आयात शुल्क लगाने की शक्ति नहीं है ।
इसके बाद अमेरिकी प्रशासन को ऐसा वैधानिक आधार तलाशना पड़ा जिसमें औपचारिक जांच और व्यापारिक साझेदारों की कथित अनुचित प्रथाओं पर निष्कर्ष जरूरी हों। इसके लिए उसने Trade Act of 1974 की Section 301 का सहारा लिया।
2 जून 2026 को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय यानी USTR ने 60 Section 301 जांचों में निष्कर्ष जारी किए। आरोप था कि संबंधित देशों ने जबरन श्रम से बने सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए ।
24 जुलाई के नए शुल्क इसी प्रक्रिया का परिणाम थे। ये समाप्त हो चुके IEEPA-आधारित शुल्कों की जगह आए और जबरन श्रम से जुड़े निष्कर्षों को Section 301 के तहत कार्रवाई का आधार बनाया गया ।
IEEPA की तुलना में Section 301 की प्रक्रिया अधिक औपचारिक, धीमी और दायरे में सीमित है। इसके तहत जांच, निष्कर्ष और प्रशासनिक कार्रवाई की जरूरत होती है। इसलिए यह व्यवस्था तत्काल आपातकालीन टैरिफ की तुलना में बदलना या वापस लेना भी कठिन हो सकता है ।
24 जुलाई की दर ने तत्काल टकराव टाल दिया, क्योंकि EU पर लगा 10% शुल्क 15% की सीमा के भीतर था। लेकिन ब्रसेल्स की चिंता यहीं खत्म नहीं हुई। यूरोपीय आयोग ने संकेत दिया कि यूरोपीय औद्योगिक क्षमता और दवा कीमतों जैसे मुद्दों पर चल रही अन्य अमेरिकी जांचों से भविष्य में अतिरिक्त या संचयी शुल्क का सवाल उठ सकता है ।
इसलिए आयोग का संदेश दोहरा था: समझौते की सीमा का पालन हुआ है, लेकिन जबरन श्रम के नाम पर शुल्क लगाने का अमेरिकी तर्क स्वीकार्य नहीं है। यही संतुलन EU की मौजूदा रणनीति को परिभाषित करता है—टर्नबेरी समझौते को बचाए रखना, 15% की सीमा से ऊपर की वृद्धि रोकना और साथ ही अमेरिकी जांचों के कानूनी तथा व्यापारिक आधार को चुनौती देना।