इसका अर्थ यह है कि मॉस्को इस समय कथित हवाई युद्धविराम योजना को स्वीकार या खारिज करने के बजाय पहले उसके वास्तविक प्रारूप और शर्तों की प्रतीक्षा कर रहा है।
25 जुलाई को ओम्स्क में रूस-कज़ाखस्तान अंतरक्षेत्रीय सहयोग मंच के दौरान कज़ाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्त तोकायेव ने यूक्रेन संघर्ष को फ्रीज़ करने और 2022 में हुई रूस-यूक्रेन वार्ताओं के आधार पर “इस्तांबुल 2.0” ढांचे में लौटने का सुझाव दिया ।
‘संघर्ष को फ्रीज़’ करने का मतलब तत्काल पूर्ण शांति समझौता नहीं, बल्कि मौजूदा मोर्चे पर लड़ाई रोककर बाद की बातचीत के लिए स्थिति स्थिर करना है। तोकायेव ने इस प्रक्रिया में बड़ी शक्तियों की गारंटी की आवश्यकता का भी उल्लेख किया ।
क्रेमलिन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। पेस्कोव ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संघर्ष को फ्रीज़ करना संभव नहीं है और रूस अपने “विशेष सैन्य अभियान” के घोषित उद्देश्यों को पूरा करने तक आगे बढ़ेगा। रूसी आधिकारिक मीडिया में भी यही रुख दोहराया गया कि युद्ध को केवल रोक देना व्यवहारिक विकल्प नहीं है ।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की वॉशिंगटन में 29 जुलाई को बैठक प्रस्तावित थी। व्हाइट हाउस ने इसकी तारीख की पुष्टि की थी ।
बैठक से पहले क्रेमलिन का सार्वजनिक संदेश दो स्तरों वाला है:
23 जुलाई की रूस-यूक्रेन वार्ता में युद्धबंदियों की अदला-बदली पर आगे बढ़ने की चर्चा हुई, लेकिन व्यापक युद्धविराम पर कोई समझौता नहीं हो सका ।
28 जुलाई 2025 तक उपलब्ध संकेतों के आधार पर रूस का रुख इस प्रकार समझा जा सकता है: कथित हवाई युद्धविराम योजना पर वह पहले ठोस जानकारी चाहता है, नए शांति प्रस्तावों को लेकर उसे कोई औपचारिक विवरण नहीं मिला है और कज़ाखस्तान के “इस्तांबुल 2.0” संघर्ष-विराम सुझाव को उसने स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया है।
इसलिए ट्रंप-जेलेंस्की बैठक से पहले मॉस्को की नीति फिलहाल “बातचीत के लिए तैयार, लेकिन अपनी शर्तों पर” वाली दिखाई देती है।