23 जुलाई, 2026 को, यूरोपीय आयोग ने Google पर DMA का उल्लंघन करने के लिए कुल €890 मिलियन का जुर्माना लगाया । यह जुर्माना दो मुख्य कारणों से लगाया गया:
यह अब तक का किसी भी कंपनी पर लगाया गया सबसे बड़ा DMA जुर्माना है । आयोग ने Google को 60 दिनों के भीतर इन प्रथाओं को बंद करने का आदेश दिया, अन्यथा लगातार बढ़ते दैनिक जुर्माने का सामना करना पड़ेगा ।
अगले ही दिन, 24 जुलाई 2026 को, राष्ट्रपति ट्रंप ने पलटवार किया। उन्होंने घोषणा की कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का कार्यालय (USTR) ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 (Section 301 of the Trade Act of 1974) के तहत EU द्वारा अमेरिकी टेक कंपनियों पर लगाए गए जुर्माने की जांच शुरू करेगा ।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने Google के जुर्माने को "अवैध और अत्यधिक भेदभावपूर्ण" करार दिया और कहा कि EU की यह कार्रवाई अमेरिकी उद्योग पर एक समन्वित हमला है । उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका जांच करेगा कि कैसे EU "अमेरिकी कंपनियों को लूट" रहा है ।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सिर्फ जांच की घोषणा ही नहीं की, बल्कि EU पर एक "भारी टैरिफ" (substantial tariff) लगाने की भी धमकी दी। उन्होंने कहा, "यूरोपीय संघ इस अवैध और अत्यधिक भेदभावपूर्ण प्रथा के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकाएगा" । उन्होंने इस टैरिफ की धमकी को सीधे Google के जुर्माने और Apple तथा Meta पर पिछले जुर्मानों से जोड़ा ।
पोलिटिको (Politico) की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने लिखा, "जुर्माने को पूरी तरह से वापस लिया जाएगा और हम उन पर जल्द से जल्द एक भारी टैरिफ लगाने की उम्मीद करते हैं" । अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के कार्यालय ने चेतावनी दी कि यह जुर्माना EU-अमेरिका व्यापार समझौते के लिए "अनिश्चितता पैदा करता है" ।
यूरोपीय संसद की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समिति के अध्यक्ष, जर्मन सोशलिस्ट एमईपी बर्नड लैंग (Bernd Lange) ने इस बढ़ते तनाव पर सीधी प्रतिक्रिया दी। यूरोन्यूज (Euronews) को दिए एक इंटरव्यू में, लैंग ने चेतावनी दी कि EU को अमेरिका से और कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए और कहा कि नए अमेरिकी टैरिफ EU-अमेरिका व्यापार समझौते को निलंबित कर सकते हैं ।
यह व्यापार समझौता जुलाई 2025 में स्कॉटलैंड के टर्नबेरी में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुआ एक राजनीतिक समझौता था । यूरोपीय संसद ने मार्च 2026 में इसे सशर्त मंजूरी दी थी ।
इस समझौते में एक निलंबन खंड (suspension clause) भी शामिल किया गया था, जिसे एमईपी ने और मजबूत किया था। यह खंड EU को अनुमति देता है कि अगर अमेरिका तय सीमा (15%) से अधिक टैरिफ लगाता है, तो वह इस समझौते के तहत मिलने वाले टैरिफ लाभों को वापस ले सकता है । लैंग की चेतावनी साफ संकेत है कि Google जुर्माने का विवाद इस तंत्र को सक्रिय कर सकता है। लैंग ने यह भी स्पष्ट किया कि DMA और डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) EU के लिए "गैर-परक्राम्य" हैं ।
यह पहली बार नहीं है जब EU-अमेरिका व्यापार समझौता खतरे में पड़ा हो। पहले भी यह कई बार निलंबित हो चुका था:
इस तरह, जुलाई 2026 का Google जुर्माना पहले से ही कमजोर व्यापार संबंधों पर एक नया संकट लेकर आया।
€890 मिलियन का Google जुर्माना सिर्फ एक रिकॉर्ड एंटीट्रस्ट जुर्माना नहीं है, बल्कि यह डिजिटल नियमन पर एक बड़े भू-राजनीतिक संघर्ष का नया केंद्र बिंदु है। ट्रंप प्रशासन EU के टेक जुर्मानों को अमेरिकी कंपनियों पर एक टैक्स के रूप में देखता है, जबकि EU अपने नियमों को गैर-परक्राम्य मानता है। EU-अमेरिका व्यापार समझौते में निलंबन खंड का मतलब है कि टैरिफ का अगला दौर औपचारिक रूप से उन टैरिफ कटौतियों को खत्म कर सकता है, जिन पर 2025 में दोनों पक्ष सहमत हुए थे।
इसके तत्काल परिणाम साफ हैं: एक सेक्शन 301 जांच, एक "भारी" टैरिफ की धमकी, और EU-अमेरिका व्यापार समझौते के निलंबन की एक बहुत वास्तविक संभावना। आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या ट्रंप प्रशासन अपनी टैरिफ धमकी पर अमल करता है और क्या EU अपने निलंबन खंड को सक्रिय करता है।