कैंसर का खतरा सिर्फ पर्यावरण से नहीं, बल्कि आपके विरासत में मिले जीन्स से भी तय होता है: नेचर अध्ययन ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए
नेचर जर्नल में प्रकाशित एक सटीक नियंत्रित चूहा प्रयोग ने यह साबित किया कि केवल पर्यावरणीय जोखिम ही नहीं, बल्कि विरासत में मिली आनुवंशिक पृष्ठभूमि भी निर्धारित करती है कि डीएनए क्षति कैंसर का कारण बनेगी या नहीं। यह बता... चार आनुवंशिक रूप से भिन्न चूहों की प्रजातियों को एक ही मात्रा में लीवर कार्सिनोजेन दिया गया, फिर...
प्रकाशितकर्ताDeepSeek-V4-Flash से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
नेचर जर्नल में प्रकाशित एक सटीक नियंत्रित चूहा प्रयोग ने यह साबित किया कि केवल पर्यावरणीय जोखिम ही नहीं, बल्कि विरासत में मिली आनुवंशिक पृष्ठभूमि भी निर्धारित करती है कि डीएनए क्षति कैंसर का कारण बनेगी या नहीं। यह बता...
चार आनुवंशिक रूप से भिन्न चूहों की प्रजातियों को एक ही मात्रा में लीवर कार्सिनोजेन दिया गया, फिर भी ट्यूमर की संवेदनशीलता, उत्परिवर्तन के प्रकार और ट्यूमर का विकास पूरी तरह से केवल विरासत में मिले जीन्स पर निर्भर था।
Search & fact-check with cited sources for How does a person's inherited genetic makeup influence the way DNA damage from environmental expoA new Nature study provides the first direct experimental evidence that inherited genetics, not just environmental exposure, determines how DNA damage leads to cancer.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Search & fact-check with cited sources for How does a person's inherited genetic makeup influence the way DNA damage from environmental expo. Article summary: A major new study published in *Nature* provides the first direct experimental evidence that a person's inherited genetic background powerfully shapes how DNA damage from environmental exposures leads to cancer, helping . Topic tags: general, government, education, academic, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
openai.com
वैज्ञानिकों को पहली बार प्रत्यक्ष प्रमाण मिला है कि कैंसर का खतरा सिर्फ पर्यावरण और जीवनशैली पर निर्भर नहीं करता, बल्कि हमारे माता-पिता से मिले जीन्स (जेनेटिक बैकग्राउंड) की भूमिका भी उतनी ही अहम है। नेचर जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन ने एक लंबे समय से चली आ रही पहेली को सुलझाने की कोशिश की है: आखिर क्यों अधिकतर धूम्रपान करने वालों को फेफड़ों का कैंसर नहीं होता, जबकि कुछ ऐसे लोग जो कभी धूम्रपान नहीं करते, वे इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं । शोध बताता है कि आनुवंशिक संरचना न केवल डीएनए क्षति के बाद उत्परिवर्तन प्रक्रिया को प्रभावित करती है, बल्कि ट्यूमर के विकास के मार्ग (एवोल्यूशनरी पाथवे) को भी आकार देती है। इस खोज के कैंसर के जोखिम का आकलन, स्क्रीनिंग और व्यक्तिगत उपचार (पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट) पर गहरे प्रभाव पड़ सकते हैं ।
Studio Global AI
अपना शोध जारी रखें
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"कैंसर का खतरा सिर्फ पर्यावरण से नहीं, बल्कि आपके विरासत में मिले जीन्स से भी तय होता है: नेचर अध्ययन ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
नेचर जर्नल में प्रकाशित एक सटीक नियंत्रित चूहा प्रयोग ने यह साबित किया कि केवल पर्यावरणीय जोखिम ही नहीं, बल्कि विरासत में मिली आनुवंशिक पृष्ठभूमि भी निर्धारित करती है कि डीएनए क्षति कैंसर का कारण बनेगी या नहीं। यह बता...
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
नेचर जर्नल में प्रकाशित एक सटीक नियंत्रित चूहा प्रयोग ने यह साबित किया कि केवल पर्यावरणीय जोखिम ही नहीं, बल्कि विरासत में मिली आनुवंशिक पृष्ठभूमि भी निर्धारित करती है कि डीएनए क्षति कैंसर का कारण बनेगी या नहीं। यह बता... चार आनुवंशिक रूप से भिन्न चूहों की प्रजातियों को एक ही मात्रा में लीवर कार्सिनोजेन दिया गया, फिर भी ट्यूमर की संवेदनशीलता, उत्परिवर्तन के प्रकार और ट्यूमर का विकास पूरी तरह से केवल विरासत में मिले जीन्स पर निर्भर था।
कैंसर का खतरा सिर्फ पर्यावरण से नहीं, बल्कि आपके विरासत में मिले जीन्स से भी तय होता है: नेचर अध्ययन ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए
नेचर जर्नल में प्रकाशित एक सटीक नियंत्रित चूहा प्रयोग ने यह साबित किया कि केवल पर्यावरणीय जोखिम ही नहीं, बल्कि विरासत में मिली आनुवंशिक पृष्ठभूमि भी निर्धारित करती है कि डीएनए क्षति कैंसर का कारण बनेगी या नहीं। यह बता... चार आनुवंशिक रूप से भिन्न चूहों की प्रजातियों को एक ही मात्रा में लीवर कार्सिनोजेन दिया गया, फिर...
प्रकाशितकर्ताDeepSeek-V4-Flash से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
नेचर जर्नल में प्रकाशित एक सटीक नियंत्रित चूहा प्रयोग ने यह साबित किया कि केवल पर्यावरणीय जोखिम ही नहीं, बल्कि विरासत में मिली आनुवंशिक पृष्ठभूमि भी निर्धारित करती है कि डीएनए क्षति कैंसर का कारण बनेगी या नहीं। यह बता...
चार आनुवंशिक रूप से भिन्न चूहों की प्रजातियों को एक ही मात्रा में लीवर कार्सिनोजेन दिया गया, फिर भी ट्यूमर की संवेदनशीलता, उत्परिवर्तन के प्रकार और ट्यूमर का विकास पूरी तरह से केवल विरासत में मिले जीन्स पर निर्भर था।
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वैज्ञानिकों को पहली बार प्रत्यक्ष प्रमाण मिला है कि कैंसर का खतरा सिर्फ पर्यावरण और जीवनशैली पर निर्भर नहीं करता, बल्कि हमारे माता-पिता से मिले जीन्स (जेनेटिक बैकग्राउंड) की भूमिका भी उतनी ही अहम है। नेचर जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन ने एक लंबे समय से चली आ रही पहेली को सुलझाने की कोशिश की है: आखिर क्यों अधिकतर धूम्रपान करने वालों को फेफड़ों का कैंसर नहीं होता, जबकि कुछ ऐसे लोग जो कभी धूम्रपान नहीं करते, वे इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं । शोध बताता है कि आनुवंशिक संरचना न केवल डीएनए क्षति के बाद उत्परिवर्तन प्रक्रिया को प्रभावित करती है, बल्कि ट्यूमर के विकास के मार्ग (एवोल्यूशनरी पाथवे) को भी आकार देती है। इस खोज के कैंसर के जोखिम का आकलन, स्क्रीनिंग और व्यक्तिगत उपचार (पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट) पर गहरे प्रभाव पड़ सकते हैं ।
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"कैंसर का खतरा सिर्फ पर्यावरण से नहीं, बल्कि आपके विरासत में मिले जीन्स से भी तय होता है: नेचर अध्ययन ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
नेचर जर्नल में प्रकाशित एक सटीक नियंत्रित चूहा प्रयोग ने यह साबित किया कि केवल पर्यावरणीय जोखिम ही नहीं, बल्कि विरासत में मिली आनुवंशिक पृष्ठभूमि भी निर्धारित करती है कि डीएनए क्षति कैंसर का कारण बनेगी या नहीं। यह बता...
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
नेचर जर्नल में प्रकाशित एक सटीक नियंत्रित चूहा प्रयोग ने यह साबित किया कि केवल पर्यावरणीय जोखिम ही नहीं, बल्कि विरासत में मिली आनुवंशिक पृष्ठभूमि भी निर्धारित करती है कि डीएनए क्षति कैंसर का कारण बनेगी या नहीं। यह बता... चार आनुवंशिक रूप से भिन्न चूहों की प्रजातियों को एक ही मात्रा में लीवर कार्सिनोजेन दिया गया, फिर भी ट्यूमर की संवेदनशीलता, उत्परिवर्तन के प्रकार और ट्यूमर का विकास पूरी तरह से केवल विरासत में मिले जीन्स पर निर्भर था।
प्रोफेसर डंकन ओडोम (सीआरयूके कैम्ब्रिज इंस्टीट्यूट / डीकेएफजेड), डॉ. सारा एटकेन (येल स्कूल ऑफ मेडिसिन), और प्रोफेसर मार्टिन टेलर (यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग) के नेतृत्व वाली टीम ने एक ऐसा प्रयोग डिज़ाइन किया जिसमें मानव अध्ययनों में पाए जाने वाले पर्यावरणीय कारकों को नियंत्रित कर लिया गया ।
चार आनुवंशिक रूप से अलग चूहों की प्रजातियाँ (माउस स्ट्रेन) पाली गईं, जिनकी आनुवंशिक विविधता मानव आबादी में पाई जाने वाली विविधता के बराबर थी ।
सभी चूहों को एक ही उम्र (15 दिन) में, समान नियंत्रित परिस्थितियों में, एक ही मात्रा में लीवर कार्सिनोजेन डाइएथिलनाइट्रोसामाइन (DEN) दिया गया । DEN एक रसायन है जो तंबाकू के धुएं और कुछ प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में पाया जाता है और लीवर की कोशिकाओं में डीएनए को नुकसान पहुंचाता है ।
टीम ने लगभग 600 ट्यूमर के जीनोम को सीक्वेंस किया और यह पुनर्निर्माण किया कि प्रत्येक ट्यूमर अपनी मूल कैंसर पैदा करने वाली म्यूटेशन से कैसे विकसित हुआ ।
मुख्य जैविक निष्कर्ष: सभी चूहों की प्रजातियों में, ट्यूमर ने लगभग हमेशा एक ही MAPK सिग्नलिंग पाथवे को सक्रिय करने वाली ड्राइवर म्यूटेशन प्राप्त की। हालांकि, चूहे की आनुवंशिक पृष्ठभूमि के आधार पर, उस ड्राइवर म्यूटेशन ने अन्य कैंसर से जुड़े सिग्नलिंग पाथवे की गतिविधि को अलग-अलग तरीके से बदल दिया और कुछ पृष्ठभूमियों में पूरे जीनोम के दोगुने होने (होल-जीनोम डुप्लीकेशन) की प्रबल प्रवृत्ति पैदा की ।
प्रोफेसर ओडोम ने कहा: "कैंसर पूरी तरह से संयोग से उत्पन्न नहीं होता। हालांकि ट्यूमर अक्सर एक ही जैविक मुकाम पर पहुंचते हैं, उस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता किसी व्यक्ति की आनुवंशिक पृष्ठभूमि से तय होता है" ।
विरासत में मिले जीन्स डीएनए क्षति और कैंसर के जोखिम को कैसे प्रभावित करते हैं?
यह अध्ययन एक स्थापित जैविक ढांचे पर आधारित है: कैंसर तब होता है जब डीएनए में म्यूटेशन जमा हो जाती है जिससे कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं । सिगरेट का धुआं या सूरज की रोशनी जैसे पर्यावरणीय कारक प्रभावित करते हैं कि कितनी डीएनए क्षति होती है, लेकिन विरासत में मिले आनुवंशिक बदलाव यह बदल सकते हैं कि कितनी म्यूटेशन जमा होती हैं और कोशिकाएं कैसे प्रतिक्रिया करती हैं ।
विरासत में मिले कैंसर संवेदनशीलता जीन — जिनमें ट्यूमर सप्रेसर जीन, ऑन्कोजीन और डीएनए रिपेयर प्रोटीन को एनकोड करने वाले जीन शामिल हैं — जब उत्परिवर्तित होते हैं तो विशिष्ट कैंसर के लिए उच्च जोखिम पैदा करते हैं ।
हालांकि, अधिकांश कैंसर जोखिम दुर्लभ उच्च-प्रवेश वाली म्यूटेशन के बारे में नहीं है। इसके बजाय, जीनोम में सामान्य आनुवंशिक भिन्नता संवेदनशीलता का एक स्पेक्ट्रम बनाती है । समान कार्सिनोजेन के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों में कैंसर की घटनाओं में भिन्नता को आनुवंशिक संरचना में अंतर-व्यक्तिगत भिन्नता के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है ।
यहां तक कि विरासत में कैंसर-पूर्वानुमान वाली म्यूटेशन वाले व्यक्तियों में भी, कैंसर विकसित होने का वास्तविक जोखिम अन्य आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों द्वारा संशोधित होता है ।
क्यों अधिकतर धूम्रपान करने वालों को फेफड़ों का कैंसर नहीं होता (और कुछ गैर-धूम्रपान करने वालों को होता है)
यह अध्ययन सीधे तौर पर इस लंबे समय से चली आ रही पहेली को संबोधित करता है। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा: "एक ही पर्यावरणीय जोखिम कारकों के संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति कैंसर विकसित नहीं करेगा। अधिकांश धूम्रपान करने वालों को फेफड़ों का कैंसर नहीं होता – और कुछ गैर-धूम्रपान करने वालों को फेफड़ों का कैंसर हो जाता है। इसका कारण लगभग निश्चित रूप से हमारी विरासत में मिली आनुवंशिक संरचना से संबंधित है" ।
पिछले मानव समूह अध्ययन इस कारण संबंध को साबित करने में संघर्ष करते रहे हैं क्योंकि व्यक्ति जीवनशैली, पर्यावरण और जोखिम के इतिहास में भिन्न होते हैं, जिससे आनुवंशिक प्रभावों को पर्यावरण से अलग करना लगभग असंभव हो जाता है ।
चूहों में पर्यावरण को प्रयोगात्मक रूप से नियंत्रित करके, यह अध्ययन प्रत्यक्ष कारण प्रमाण प्रदान करता है कि आनुवंशिक पृष्ठभूमि अकेले — जोखिम में अंतर से स्वतंत्र — ट्यूमर की संवेदनशीलता, उत्पन्न होने वाली म्यूटेशन के प्रकार और ट्यूमर के बढ़ने के मार्गों को निर्धारित करती है ।
कैंसर स्क्रीनिंग और व्यक्तिगत उपचार के लिए निहितार्थ
शोधकर्ताओं का कहना है कि इन निष्कर्षों के "कैंसर स्क्रीनिंग और सटीक चिकित्सा (प्रिसिज़न मेडिसिन) के लिए निहितार्थ हैं" ।
जोखिम स्तरीकरण और स्क्रीनिंग: भविष्य की कैंसर रोकथाम और स्क्रीनिंग रणनीतियों में संभवतः विरासत में मिली आनुवंशिकी और जनसंख्या विविधता को अधिक सावधानी से ध्यान में रखना होगा । "उच्च-संवेदनशीलता" आनुवंशिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को जल्दी या अधिक बार स्क्रीनिंग से लाभ हो सकता है।
व्यक्तिगत उपचार: अध्ययन बताता है कि डीएनए-क्षति करने वाले कैंसर उपचारों (कीमोथेरेपी, रेडिएशन) की प्रतिक्रिया किसी मरीज की आनुवंशिक पृष्ठभूमि के आधार पर काफी भिन्न हो सकती है । यदि आनुवंशिक पृष्ठभूमि म्यूटेशन प्रक्रियाओं और ट्यूमर को चलाने वाले सिग्नलिंग पाथवे दोनों को प्रभावित करती है, तो एक ही दवा अलग-अलग आनुवंशिक जीनोम वाले रोगियों में अलग तरह से काम कर सकती है।
जनसंख्या विविधता: यह निष्कर्ष कि मानव आबादी के बराबर आनुवंशिक विविधता ने नाटकीय रूप से भिन्न ट्यूमर परिणाम उत्पन्न किए, कैंसर अनुसंधान और नैदानिक परीक्षणों में विविध आबादी को शामिल करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है ।
डॉ. सारा एटकेन, पहली लेखिका ने सारांशित किया: "यदि आनुवंशिक पृष्ठभूमि कैंसर के जोखिम और ट्यूमर के विकास पथ दोनों को प्रभावित करती है, तो हमें इस बारे में ध्यान से सोचने की ज़रूरत है कि हम अलग-अलग आनुवंशिक पृष्ठभूमि वाले लोगों में कैंसर की जांच कैसे करते हैं और उसका इलाज कैसे करते हैं" ।
pmc.ncbi.nlm.nih.gov
Mechanisms of inherited cancer susceptibility - PMC - NIH
प्रोफेसर डंकन ओडोम (सीआरयूके कैम्ब्रिज इंस्टीट्यूट / डीकेएफजेड), डॉ. सारा एटकेन (येल स्कूल ऑफ मेडिसिन), और प्रोफेसर मार्टिन टेलर (यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग) के नेतृत्व वाली टीम ने एक ऐसा प्रयोग डिज़ाइन किया जिसमें मानव अध्ययनों में पाए जाने वाले पर्यावरणीय कारकों को नियंत्रित कर लिया गया ।
चार आनुवंशिक रूप से अलग चूहों की प्रजातियाँ (माउस स्ट्रेन) पाली गईं, जिनकी आनुवंशिक विविधता मानव आबादी में पाई जाने वाली विविधता के बराबर थी ।
सभी चूहों को एक ही उम्र (15 दिन) में, समान नियंत्रित परिस्थितियों में, एक ही मात्रा में लीवर कार्सिनोजेन डाइएथिलनाइट्रोसामाइन (DEN) दिया गया । DEN एक रसायन है जो तंबाकू के धुएं और कुछ प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में पाया जाता है और लीवर की कोशिकाओं में डीएनए को नुकसान पहुंचाता है ।
टीम ने लगभग 600 ट्यूमर के जीनोम को सीक्वेंस किया और यह पुनर्निर्माण किया कि प्रत्येक ट्यूमर अपनी मूल कैंसर पैदा करने वाली म्यूटेशन से कैसे विकसित हुआ ।
मुख्य जैविक निष्कर्ष: सभी चूहों की प्रजातियों में, ट्यूमर ने लगभग हमेशा एक ही MAPK सिग्नलिंग पाथवे को सक्रिय करने वाली ड्राइवर म्यूटेशन प्राप्त की। हालांकि, चूहे की आनुवंशिक पृष्ठभूमि के आधार पर, उस ड्राइवर म्यूटेशन ने अन्य कैंसर से जुड़े सिग्नलिंग पाथवे की गतिविधि को अलग-अलग तरीके से बदल दिया और कुछ पृष्ठभूमियों में पूरे जीनोम के दोगुने होने (होल-जीनोम डुप्लीकेशन) की प्रबल प्रवृत्ति पैदा की ।
प्रोफेसर ओडोम ने कहा: "कैंसर पूरी तरह से संयोग से उत्पन्न नहीं होता। हालांकि ट्यूमर अक्सर एक ही जैविक मुकाम पर पहुंचते हैं, उस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता किसी व्यक्ति की आनुवंशिक पृष्ठभूमि से तय होता है" ।
विरासत में मिले जीन्स डीएनए क्षति और कैंसर के जोखिम को कैसे प्रभावित करते हैं?
यह अध्ययन एक स्थापित जैविक ढांचे पर आधारित है: कैंसर तब होता है जब डीएनए में म्यूटेशन जमा हो जाती है जिससे कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं । सिगरेट का धुआं या सूरज की रोशनी जैसे पर्यावरणीय कारक प्रभावित करते हैं कि कितनी डीएनए क्षति होती है, लेकिन विरासत में मिले आनुवंशिक बदलाव यह बदल सकते हैं कि कितनी म्यूटेशन जमा होती हैं और कोशिकाएं कैसे प्रतिक्रिया करती हैं ।
विरासत में मिले कैंसर संवेदनशीलता जीन — जिनमें ट्यूमर सप्रेसर जीन, ऑन्कोजीन और डीएनए रिपेयर प्रोटीन को एनकोड करने वाले जीन शामिल हैं — जब उत्परिवर्तित होते हैं तो विशिष्ट कैंसर के लिए उच्च जोखिम पैदा करते हैं ।
हालांकि, अधिकांश कैंसर जोखिम दुर्लभ उच्च-प्रवेश वाली म्यूटेशन के बारे में नहीं है। इसके बजाय, जीनोम में सामान्य आनुवंशिक भिन्नता संवेदनशीलता का एक स्पेक्ट्रम बनाती है । समान कार्सिनोजेन के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों में कैंसर की घटनाओं में भिन्नता को आनुवंशिक संरचना में अंतर-व्यक्तिगत भिन्नता के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है ।
यहां तक कि विरासत में कैंसर-पूर्वानुमान वाली म्यूटेशन वाले व्यक्तियों में भी, कैंसर विकसित होने का वास्तविक जोखिम अन्य आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों द्वारा संशोधित होता है ।
क्यों अधिकतर धूम्रपान करने वालों को फेफड़ों का कैंसर नहीं होता (और कुछ गैर-धूम्रपान करने वालों को होता है)
यह अध्ययन सीधे तौर पर इस लंबे समय से चली आ रही पहेली को संबोधित करता है। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा: "एक ही पर्यावरणीय जोखिम कारकों के संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति कैंसर विकसित नहीं करेगा। अधिकांश धूम्रपान करने वालों को फेफड़ों का कैंसर नहीं होता – और कुछ गैर-धूम्रपान करने वालों को फेफड़ों का कैंसर हो जाता है। इसका कारण लगभग निश्चित रूप से हमारी विरासत में मिली आनुवंशिक संरचना से संबंधित है" ।
पिछले मानव समूह अध्ययन इस कारण संबंध को साबित करने में संघर्ष करते रहे हैं क्योंकि व्यक्ति जीवनशैली, पर्यावरण और जोखिम के इतिहास में भिन्न होते हैं, जिससे आनुवंशिक प्रभावों को पर्यावरण से अलग करना लगभग असंभव हो जाता है ।
चूहों में पर्यावरण को प्रयोगात्मक रूप से नियंत्रित करके, यह अध्ययन प्रत्यक्ष कारण प्रमाण प्रदान करता है कि आनुवंशिक पृष्ठभूमि अकेले — जोखिम में अंतर से स्वतंत्र — ट्यूमर की संवेदनशीलता, उत्पन्न होने वाली म्यूटेशन के प्रकार और ट्यूमर के बढ़ने के मार्गों को निर्धारित करती है ।
कैंसर स्क्रीनिंग और व्यक्तिगत उपचार के लिए निहितार्थ
शोधकर्ताओं का कहना है कि इन निष्कर्षों के "कैंसर स्क्रीनिंग और सटीक चिकित्सा (प्रिसिज़न मेडिसिन) के लिए निहितार्थ हैं" ।
जोखिम स्तरीकरण और स्क्रीनिंग: भविष्य की कैंसर रोकथाम और स्क्रीनिंग रणनीतियों में संभवतः विरासत में मिली आनुवंशिकी और जनसंख्या विविधता को अधिक सावधानी से ध्यान में रखना होगा । "उच्च-संवेदनशीलता" आनुवंशिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को जल्दी या अधिक बार स्क्रीनिंग से लाभ हो सकता है।
व्यक्तिगत उपचार: अध्ययन बताता है कि डीएनए-क्षति करने वाले कैंसर उपचारों (कीमोथेरेपी, रेडिएशन) की प्रतिक्रिया किसी मरीज की आनुवंशिक पृष्ठभूमि के आधार पर काफी भिन्न हो सकती है । यदि आनुवंशिक पृष्ठभूमि म्यूटेशन प्रक्रियाओं और ट्यूमर को चलाने वाले सिग्नलिंग पाथवे दोनों को प्रभावित करती है, तो एक ही दवा अलग-अलग आनुवंशिक जीनोम वाले रोगियों में अलग तरह से काम कर सकती है।
जनसंख्या विविधता: यह निष्कर्ष कि मानव आबादी के बराबर आनुवंशिक विविधता ने नाटकीय रूप से भिन्न ट्यूमर परिणाम उत्पन्न किए, कैंसर अनुसंधान और नैदानिक परीक्षणों में विविध आबादी को शामिल करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है ।
डॉ. सारा एटकेन, पहली लेखिका ने सारांशित किया: "यदि आनुवंशिक पृष्ठभूमि कैंसर के जोखिम और ट्यूमर के विकास पथ दोनों को प्रभावित करती है, तो हमें इस बारे में ध्यान से सोचने की ज़रूरत है कि हम अलग-अलग आनुवंशिक पृष्ठभूमि वाले लोगों में कैंसर की जांच कैसे करते हैं और उसका इलाज कैसे करते हैं" ।
pmc.ncbi.nlm.nih.gov
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