26 जुलाई 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने ऐलान किया कि अमेरिका से कोई भी शांति समझौता तभी संभव होगा जब इज़राइल लेबनान पर अपने हमले बंद करेगा यह शर्त 14 जून के समझौते (एमओयू) में नहीं थी। अमेरिका और ईरान के बीच 26 जुलाई तक हमलों पर एक नाजुक रुकावट है, लेकिन खामेनेई की शर्त अंतिम समझौते को इज़राइल लेबना...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Search & fact-check with cited sources for What conditions did Iran's Supreme Leader Mojtaba Khamenei set for any US-Iran peace agreement, a. Article summary: ## Khamenei's New Condition and the State of Play. Topic tags: general, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clickbait thumbnails, icons, and tiny thumbnail layouts. Make it useful as an illustrative visual, not as factual evidence.
26 जुलाई 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ कोई भी शांति समझौता अब इस बात पर निर्भर करेगा कि इज़राइल लेबनान पर अपने हमले बंद करता है या नहीं । यह नई शर्त जून में हुए फ्रेमवर्क समझौते से कहीं आगे की बात है और इसने ट्रंप-नेतन्याहू की आने वाली व्हाइट हाउस बैठक को पूरी समीकरण के केंद्र में ला खड़ा किया है।
खामेनेई ने स्पष्ट किया, "ईरान ने लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा और ज़ायोनी शासन के आक्रमण की पूर्ण, बिना शर्त समाप्ति को किसी भी समझौते के लिए प्राथमिक शर्त बना दिया है" । यह एक स्पष्ट जुड़ाव है जो 14 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) में नहीं था।
26 जुलाई तक, अमेरिका और ईरान के बीच एक नाजुक, अनौपचारिक युद्ध विराम है। दोनों पक्षों ने हमले रोक दिए हैं और अंतरिम संघर्ष विराम को बचाने की कोशिशें जारी हैं । यह संघर्ष विराम अप्रैल में तय हुआ था और जून के एमओयू में कोडिफाई किया गया था, लेकिन जून के अंत से दोनों पक्षों द्वारा बार-बार इसका उल्लंघन किया गया है
। खामेनेई की लेबनान से जुड़ी नई शर्त ने स्थायी समझौते की संभावनाओं को और मुश्किल बना दिया है।
इज़राइल कई घोषित युद्धविरामों के बावजूद दक्षिणी लेबनान में हवाई हमले और ज़मीनी कार्रवाई जारी रखे हुए है । हाल ही में 24 जुलाई को भी इज़राइल ने अल-मंसूरी और मजदल ज़ौन में विस्फोट किए
। खामेनेई की शर्त सीधे तौर पर ईरान-अमेरिका शांति को इन हमलों की समाप्ति से जोड़ती है। इसका मतलब है कि जब तक लेबनान में इज़राइल का अभियान जारी रहेगा, खामेनेई वाशिंगटन के साथ कोई अंतिम समझौता नहीं करेंगे।
14 जून को अमेरिका और ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन की घोषणा की। इसमें मुख्य शर्तें थीं: ईरान का परमाणु हथियार न बनाने या न खरीदने पर सहमत होना; ईरान का अपने उच्च-संवर्धित यूरेनियम भंडार को देश में ही पतला करना; होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना; और आगे परमाणु वार्ता के लिए एक रूपरेखा तैयार करना । खामेनेई ने व्यक्तिगत आपत्तियों के बावजूद 18 जून को इस एमओयू को मंजूरी दी थी, जब राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने उन्हें आश्वासन दिया कि ईरान के अधिकारों और 'प्रतिरोध मोर्चा' के हितों की रक्षा की जाएगी
। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि ईरान अमेरिका की "अनुचित मांगों" को कभी स्वीकार नहीं करेगा
।
एमओयू में लेबनान से जुड़ी कोई शर्त नहीं थी। खामेनेई का 26 जुलाई का बयान एक नई पूर्व शर्त जोड़ता है जो हस्ताक्षरित ढांचे में मौजूद नहीं थी, जिससे समझौते पर फिर से मुहर लगाने या इसे रोकने की संभावना पैदा हो गई है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू की राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को व्हाइट हाउस में होनी है । यह ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से उनकी पहली आमने-सामने की बैठक होगी। नेतन्याहू के सामने एक नाजुक संतुलन बनाने की चुनौती है: उन्हें अमेरिका-इज़राइल गठबंधन को बनाए रखना है, जबकि ट्रंप सार्वजनिक रूप से इज़राइल पर लेबनान में हिंसा न बढ़ाने का दबाव डाल रहे हैं
।
समय बेहद अहम है। खामेनेई ने अपनी लेबनान शर्त इस बैठक से सिर्फ दो दिन पहले रखी है, जिससे ट्रंप और नेतन्याहू पर सीधा दबाव बढ़ गया है। खामेनेई प्रभावी रूप से वाशिंगटन से कह रहे हैं: जब तक आपका सहयोगी लेबनान पर बमबारी कर रहा है, आप ईरान के साथ अंतिम शांति नहीं पा सकते। ट्रंप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं - क्या वे ईरान समझौते को पक्का करने के लिए नेतन्याहू पर लेबनान युद्ध विराम का दबाव डालेंगे, या इज़राइल के सैन्य अभियान का समर्थन करेंगे - यह तय करेगा कि जून का एमओयू एक स्थायी समझौते में बदल पाएगा या नहीं।
खामेनेई की 26 जुलाई की शर्त ने एक त्रिकोणीय संबंध बना दिया है: ईरान-अमेरिका शांति अब लेबनान में इज़राइल की कार्रवाइयों पर निर्भर है। इसने आगामी ट्रंप-नेतन्याहू बैठक को पूरे समीकरण के केंद्र में रख दिया है। इज़राइल-लेबनान मोर्चे पर तनाव कम करने में प्रगति के बिना, खामेनेई की स्पष्ट स्थिति एक अंतिम ईरान-अमेरिका समझौते को असंभव बना देती है, भले ही जून एमओयू की परमाणु और समुद्री शर्तें अभी भी लागू हों।
Studio Global AI
Use this topic as a starting point for a fresh source-backed answer, then compare citations before you share it.
26 जुलाई 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने ऐलान किया कि अमेरिका से कोई भी शांति समझौता तभी संभव होगा जब इज़राइल लेबनान पर अपने हमले बंद करेगा यह शर्त 14 जून के समझौते (एमओयू) में नहीं थी।
26 जुलाई 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने ऐलान किया कि अमेरिका से कोई भी शांति समझौता तभी संभव होगा जब इज़राइल लेबनान पर अपने हमले बंद करेगा यह शर्त 14 जून के समझौते (एमओयू) में नहीं थी। अमेरिका और ईरान के बीच 26 जुलाई तक हमलों पर एक नाजुक रुकावट है, लेकिन खामेनेई की शर्त अंतिम समझौते को इज़राइल लेबनान मोर्चे पर प्रगति से जोड़ देती है, जहां कई युद्धविराम के बावजूद हिंसा जारी है।
खामेनेई का यह बयान 28 जुलाई को व्हाइट हाउस में होने वाली नेतन्याहू ट्रंप बैठक से सिर्फ दो दिन पहले आया है, जिसने कूटनीति को एक त्रिकोणीय पहेली में बदल दिया है और अमेरिका इज़राइल गठबंधन की परीक्षा लेगा।