23 जुलाई 2026 को हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमला किया, जिससे ब्रेंट क्रूड $100/बैरल के पार चला गया। होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही 45% से कम क्षमता पर चल रहा था; हूती हमलों ने वैकल्पिक मार्ग (बाब अल मंडब) को भी खतरे में डाल दिया। 24 जुलाई को हूती संकेतों के बाद कीमतों में 4% की गिरावट आई...

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23 जुलाई 2026 को ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई। इसकी वजह थी यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर ड्रोन और मिसाइल हमला । यह हमला उस वक्त हुआ जब दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), पहले से ही अमेरिका-ईरान संघर्ष की वजह से लगभग बंद हो चुका था
। इस तरह एक साथ दो प्रमुख समुद्री मार्गों पर संकट पैदा हो गया, जिसे 'दोहरा चोकपॉइंट संकट' (Dual-Chokepoint Crisis) कहा जा रहा है।
हूती विद्रोहियों ने 21 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा की थी । इसके बाद 23 जुलाई को उन्होंने सऊदी झंडे वाले दो टैंकरों - एन्सेलिया (Encelia) और लैला (Layla, एक VLCC) - पर हमला करने का दावा किया
। इस हमले के बाद ब्रेंट क्रूड में एक ही दिन में 6.96% की उछाल आई और यह $100.65 प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो मई 2026 के बाद का सबसे उच्च स्तर था
।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): यह फारस की खाड़ी से तेल निर्यात का मुख्य रास्ता है। अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते यहां से होने वाली तेल आपूर्ति सामान्य स्तर से घटकर 45% से भी कम रह गई थी । गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों के अनुसार, यह 'लगभग ठप' हो चुका था
।
बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb): जब होर्मुज बंद हुआ, तो कुछ सऊदी तेल लाल सागर के रास्ते भेजा जाने लगा । लेकिन हूती हमलों ने इस वैकल्पिक मार्ग को भी खतरे में डाल दिया। इस तरह दोनों रास्तों पर संकट ने वैश्विक बाजार में यह आशंका पैदा कर दी कि मध्य पूर्व से तेल निकासी के लिए कोई सुरक्षित समुद्री मार्ग नहीं बचा है
।
भारत पर सीधा असर: भारत अपने कच्चे तेल के आयात का 50% से अधिक बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य के रास्ते करता है । इस खबर के बाद भारतीय शेयर बाजार (सेंसेक्स और निफ्टी) में शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में गिरावट देखी गई
।
24-25 जुलाई को हूती विद्रोहियों ने संकेत दिया कि वे बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन को पूरी तरह से अवरुद्ध नहीं करेंगे । हूती प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुलसलाम ने स्पष्ट किया, "रणनीतिक बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य में जहाजों का आवागमन अवरुद्ध नहीं किया गया है... कोई पूर्ण नाकाबंदी नहीं होगी"
। इससे कीमतों में बड़ी गिरावट आई:
हालांकि, न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि कीमतें "$100 के करीब" बनी रहीं और ईरान ने उसी दिन अमेरिकी युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया ।
महत्वपूर्ण: गोल्डमैन सैक्स का मूल परिदृश्य (base case) अभी भी $80 प्रति बैरल है। $120 का आंकड़ा उनका 'जोखिम परिदृश्य' (risk scenario) है, न कि केंद्रीय पूर्वानुमान । बार्कलेज ने स्पष्ट किया है कि जोखिम "इस बात पर निर्भर करते हैं कि गतिरोध कितने समय तक रहता है"
।
बाजार अब इस बात पर बारीकी से नजर रख रहा है कि आगे क्या होता है। किसी भी नए हमले या नाकाबंदी की वापसी से कीमतें फिर से उछल सकती हैं, जबकि कूटनीतिक हल निकलने पर कीमतों में और गिरावट आ सकती है।
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23 जुलाई 2026 को हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमला किया, जिससे ब्रेंट क्रूड $100/बैरल के पार चला गया।
23 जुलाई 2026 को हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमला किया, जिससे ब्रेंट क्रूड $100/बैरल के पार चला गया। होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही 45% से कम क्षमता पर चल रहा था; हूती हमलों ने वैकल्पिक मार्ग (बाब अल मंडब) को भी खतरे में डाल दिया।
24 जुलाई को हूती संकेतों के बाद कीमतों में 4% की गिरावट आई कि वे पूर्ण नाकाबंदी नहीं लगाएंगे, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि तेल $120 130 तक जा सकता है।