ChAdOx1 BDBV एक वायरल-वेक्टर वैक्सीन है, जो उसी चिम्पैंजी एडेनोवायरस (ChAdOx1) प्लेटफ़ॉर्म पर बनाई गई है जिसका इस्तेमाल ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राजेनेका के कोविड-19 टीके में हुआ था । वैज्ञानिकों ने इस हानिरहित चिम्पैंजी एडेनोवायरस में आनुवंशिक रूप से बदलाव करके इसमें Bundibugyo इबोला वायरस का आनुवंशिक पदार्थ डाला है। इसका उद्देश्य मानव प्रतिरक्षा प्रणाली को असली वायरस को पहचानने और उससे लड़ने का प्रशिक्षण देना है ।
उल्लेखनीय बात यह है कि ऑक्सफ़ोर्ड की टीम ने इस टीके को महामारी का पता चलने के महज आठ हफ्तों में विकसित कर लिया । यह तेज़ी इसलिए मुमकिन हो पाई क्योंकि ChAdOx1 प्लेटफ़ॉर्म की तकनीक पहले से मौजूद थी और इसका इस्तेमाल दूसरी बीमारियों के लिए पशुओं और मनुष्यों पर पहले ही किया जा चुका था । भारत का सीरम इंस्टीट्यूट, जो दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माताओं में से एक है, ने इस टीके को बनाने की ज़िम्मेदारी ली है। सफल परीक्षणों और संभावित आपातकालीन इस्तेमाल को देखते हुए SII पहले ही लगभग 620,000 खुराकें तैयार और संग्रहीत कर चुका है ।
इस प्रायोगिक टीका को लगवाने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति बने एड हंट (Ed Hunt), जो ब्रिटेन के 37 वर्षीय निवासी हैं । एड को जुलाई 2026 के अंत में ऑक्सफ़ोर्ड में टीका लगाया गया। वे उन 50 स्वस्थ स्वयंसेवकों में से पहले हैं जिन्हें फेज़ I क्लिनिकल परीक्षण के लिए चुना गया है ।
इस परीक्षण को BD-Ebov नाम दिया गया है और इसका संचालन ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी का वैक्सीन ग्रुप कर रहा है । इसका मुख्य उद्देश्य टीके की सुरक्षा (safety) और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने की इसकी क्षमता (immunogenicity) का आकलन करना है । सभी प्रतिभागियों को टीका लगने से पहले गहन चिकित्सा जांच से गुज़रना होगा और बाद में उन पर लगातार नज़र रखी जाएगी ।
ChAdOx1 BDBV परीक्षण की तात्कालिकता के पीछे वैश्विक स्वास्थ्य तैयारियों में एक बड़ी कमी है। दुनिया भर में Bundibugyo स्ट्रेन (Orthoebolavirus bundibugyoense) के लिए कोई भी लाइसेंस प्राप्त टीका या विशेष इलाज मौजूद नहीं है । यह स्थिति ज़ैरे इबोला वायरस से बिल्कुल अलग है, जिसके लिए Ervebo टीका और अन्य उपचार उपलब्ध हैं ।
WHO और वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों ने सिफारिश की है कि Bundibugyo के लिए किसी भी संभावित उपचार या टीके का इस्तेमाल केवल क्लिनिकल परीक्षणों के तहत ही किया जाए, ताकि मज़बूत सुरक्षा और प्रभावशीलता का डेटा तैयार हो सके । ChAdOx1 BDBV का फेज़ I परीक्षण किसी भी Bundibugyo-विशिष्ट टीके का पहला मानव परीक्षण है । IAVI और Moderna जैसे अन्य उम्मीदवार अभी प्री-क्लिनिकल या शुरुआती विकास के चरणों में ही हैं ।
यह क्लिनिकल परीक्षण मध्य अफ्रीका में फैले भीषण और बढ़ते प्रकोप की पृष्ठभूमि में शुरू किया गया था।
यह महामारी Bundibugyo वायरस के कारण फैली है, जो Orthoebolavirus की एक दुर्लभ प्रजाति है। इसकी पहचान सबसे पहले 2007 में युगांडा में हुई थी । यह प्रतिरक्षात्मक रूप से ज़ैरे और सूडान प्रजातियों से अलग है, यही कारण है कि मौजूदा टीके और उपचार इसके खिलाफ काम नहीं करते ।
ChAdOx1 BDBV का फेज़ I परीक्षण कई महीनों तक चलने की उम्मीद है। यदि टीका सुरक्षित पाया जाता है और मज़बूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है, तो सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के पास बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने की क्षमता है । इसके बाद फेज़ II और III के परीक्षण, संभवतः डीआरसी और युगांडा के प्रभावित क्षेत्रों में, तेज़ी से शुरू किए जा सकते हैं । सफल होने पर, यह टीका इस घातक स्ट्रेन के खिलाफ पहला विशिष्ट और अधिकृत चिकित्सा उपाय साबित हो सकता है।