होर्मुज संकट: कैसे बदल रहा है वैश्विक कच्चे तेल का नक्शा, भारत-चीन पर क्या है असर?
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए अमेरिका इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया है, जहां से दुनिया की 20% तेल आपूर्ति होती थी। [1][2][6][7] इस ऐतिहासिक संकट ने वैश्विक समुद्री कच्चे तेल की आपूर्ति में 16% की कटौती की है और तेल बाजार में सबसे बड़ा झटका दिया है। [1][2][6][7] चीनी रिफ...
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28 फरवरी 2026 को शुरू हुए अमेरिका इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया है, जहां से दुनिया की 20% तेल आपूर्ति होती थी। [1][2][6][7]
इस ऐतिहासिक संकट ने वैश्विक समुद्री कच्चे तेल की आपूर्ति में 16% की कटौती की है और तेल बाजार में सबसे बड़ा झटका दिया है। [1][2][6][7]
चीनी रिफाइनरियों के लिए रूसी ESPO क्रूड पर छूट लगातार कम हो रही है। जुलाई 2026 में सितंबर लोडिंग के लिए यह छूट घटकर केवल 1 3 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। [2][5]
भारतीय रिफाइनरों (BPCL) के अनुसार, सितंबर 2026 की डिलीवरी के लिए रूसी कच्चे तेल पर कोई छूट नहीं मिल रही है। [1][5][11][12]
Search & fact-check with cited sources for How are the Middle East crisis and Strait of Hormuz disruptions reshaping global crude flows, speThe Strait of Hormuz crisis has reduced shipping traffic through the waterway to a near standstill, triggering a historic reshuffling of global crude and refined product flows.
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Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Search & fact-check with cited sources for How are the Middle East crisis and Strait of Hormuz disruptions reshaping global crude flows, spe. Article summary: The 2026 Strait of Hormuz crisis — triggered by the US-Israeli air war against Iran starting February 28, 2026 — has practically closed the chokepoint through which roughly 20% of global oil supply transited, cutting sea. Topic tags: general, education, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
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28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हवाई हमले के बाद शुरू हुए युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लगभग बंद कर दिया है। इस रणनीतिक मार्ग से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति होती थी, लेकिन अब यहां व्यावसायिक शिपिंग लगभग ठप है। इस ऐतिहासिक संकट ने वैश्विक समुद्री कच्चे तेल की आपूर्ति में 16% की कमी कर दी है, जो तेल बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा झटका है । आइए जानते हैं कि यह संकट एशिया में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग की गतिशीलता को कैसे नया आकार दे रहा है।
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"होर्मुज संकट: कैसे बदल रहा है वैश्विक कच्चे तेल का नक्शा, भारत-चीन पर क्या है असर?" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए अमेरिका इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया है, जहां से दुनिया की 20% तेल आपूर्ति होती थी। [1][2][6][7]
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए अमेरिका इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया है, जहां से दुनिया की 20% तेल आपूर्ति होती थी। [1][2][6][7] इस ऐतिहासिक संकट ने वैश्विक समुद्री कच्चे तेल की आपूर्ति में 16% की कटौती की है और तेल बाजार में सबसे बड़ा झटका दिया है। [1][2][6][7]
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
चीनी रिफाइनरियों के लिए रूसी ESPO क्रूड पर छूट लगातार कम हो रही है। जुलाई 2026 में सितंबर लोडिंग के लिए यह छूट घटकर केवल 1 3 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। [2][5]
दिसंबर 2025: कमजोर मांग और प्रतिबंधों के कारण चीनी बंदरगाहों पर ESPO ब्लेंड ब्रेंट की तुलना में रिकॉर्ड 5-6 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बिक रहा था ।
2026 की शुरुआत: आपूर्ति के डर के बीच चीनी रिफाइनरों ने मार्च लोडिंग के कार्गो को सुरक्षित करने की होड़ में छूट कम हो गई ।
23 जुलाई 2026: प्रमुख चीनी रिफाइनरों ने घटती छूट के बावजूद रूसी ESPO क्रूड की खरीद बढ़ा दी है। इसका कारण यह है कि ईरान युद्ध ने मध्य पूर्व के निर्यात को गंभीर रूप से बाधित कर दिया है। दो बड़ी चीनी कंपनियों ने सितंबर लोडिंग के लिए एक दुर्लभ ESPO ब्लेंड टेंडर की अधिकांश मात्रा बुक कर ली ।
भारतीय रिफाइनरों के लिए रूसी क्रूड पर छूट गायब
23 जुलाई 2026: भारत की सरकारी रिफाइनर भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के वित्त निदेशक, वेत्सा रामकृष्ण गुप्ता ने कहा कि व्यापारियों ने भारत को बेचे जाने वाले रूसी क्रूड पर कोई छूट देना बंद कर दिया है। मध्य पूर्व की आपूर्ति में व्यवधान ने सभी वैकल्पिक ग्रेड की मांग बढ़ा दी है । BPCL ने पुष्टि की कि सितंबर 2026 की डिलीवरी के लिए छूट की खिड़की प्रभावी रूप से बंद हो गई है ।
संदर्भ: मार्च 2026 में भारत ने लगभग 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रूसी क्रूड का आयात किया, जो जून 2025 के बाद सबसे अधिक था। लेकिन तब भी, एक बार रूसी तेल को आकर्षक बनाने वाली भारी छूट कम हो रही थी ।
चीन और भारत का रूसी क्रूड और विकल्पों की ओर रुख
चीन:
चीनी रिफाइनर कीमत में कम लाभ के बावजूद अधिक रूसी ESPO खरीद रहे हैं। साथ ही, वे मध्य पूर्व आपूर्ति संकट को देखते हुए ईरानी कच्चे तेल पर भी नज़र गड़ाए हुए हैं। इस संघर्ष ने प्रतिबंधित तेल को बड़ी छूट पर खरीदने के लिए चीन के 'शैडो फ्लीट' (छाया बेड़े) के मूल्य को बहुत कम कर दिया है ।
भारत:
रूसी छूट खत्म होने के बाद, भारतीय रिफाइनर कमी को पूरा करने के लिए अब गैर-मध्य पूर्वी ग्रेड की ओर रुख कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि भारतीय खरीदार विकल्प के तौर पर ईरानी, वेनेजुएला और अंगोलन कच्चे तेल की सक्रिय रूप से तलाश कर रहे हैं । अमेरिकी नाकाबंदी (13 अप्रैल–29 मई 2026) के कारण ईरानी आपूर्ति जटिल है, लेकिन इसकी मांग मजबूत बनी हुई है ।
एशियाई बाजारों में भारत के रिफाइंड उत्पाद निर्यात में उछाल
भारत ने एक अलग रणनीति अपनाई है: छूट पर रूसी क्रूड खरीदना और बंद हुई मध्य पूर्वी और रूसी रिफाइनरियों की कमी को पूरा करने के लिए रिफाइंड उत्पादों का निर्यात बढ़ाना।
जुलाई 2026: भारत के हल्के और मध्यम डिस्टिलेट के निर्यात के 1.55 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंचने की उम्मीद है। यह सितंबर के बाद सबसे अधिक मासिक मात्रा होगी और मई की तुलना में लगभग 50% अधिक है । Kpler के आंकड़ों के अनुसार, भारत जुलाई में लगभग 1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन रिफाइंड उत्पादों का निर्यात कर सकता है ।
भारत से पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात वित्त वर्ष 2025 के 44.4 बिलियन डॉलर के स्तर से लगभग 25% बढ़ सकता है, क्योंकि देश दुनिया का वास्तविक रिफाइनिंग 'स्विंग प्रोड्यूसर' (उतार-चढ़ाव को संभालने वाला उत्पादक) बनकर उभर रहा है । मध्य पूर्व और रूस के रिफाइनरी उत्पादन से वंचित एशियाई ईंधन बाजार, इन आपूर्तियों को मजबूत मार्जिन पर अपना रहे हैं ।