जुलाई 2026 में Neuralink ने वीडियो जारी कर दिखाया कि PRIME Study में शामिल क्वाड्रिप्लेजिया के मरीज अपने N1 इम्प्लांट से दिमागी संकेतों के ज़रिए व्हीलचेयर को आगे, पीछे, मोड़ और सीट एडजस्ट कर रहे हैं [3][33]। N1 इम्प्लांट मस्तिष्क के मोटर कॉर्टेक्स से न्यूरल सिग्नल लेता है और एक कस्टम ऐप के ज़रिए उन्हें व्हीलचेयर कमा...

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जुलाई 2026 में Neuralink ने एक वीडियो जारी किया जिसमें PRIME Study के प्रतिभागी — जिन्हें गर्दन से नीचे का सारा शरीर लकवाग्रस्त है (क्वाड्रिप्लेजिया) — बिना किसी शारीरिक हरकत के, सिर्फ अपने दिमाग से पावर्ड व्हीलचेयर को चला रहे हैं । यह पहली बार है जब Neuralink ने सार्वजनिक रूप से दिखाया है कि उनका N1 इम्प्लांट सिर्फ कंप्यूटर कर्सर या कीबोर्ड ही नहीं, बल्कि एक वास्तविक मोबिलिटी डिवाइस को भी नियंत्रित कर सकता है
।
N1 इम्प्लांट एक इंट्राकॉर्टिकल ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस है । इसमें 64 अल्ट्रा-थिन थ्रेड्स पर 1,024 इलेक्ट्रोड लगे होते हैं, जो मस्तिष्क के मोटर कॉर्टेक्स से न्यूरल सिग्नल रिकॉर्ड करते हैं
। जब कोई प्रतिभागी किसी हरकत के बारे में सोचता है — जैसे जॉयस्टिक को बाएँ या दाएँ धकेलना — तो इम्प्लांट उस सोच से जुड़े स्पाइकिंग पैटर्न को पकड़ लेता है
।
ये सिग्नल वायरलेस तरीके से एक कनेक्टेड डिवाइस पर चलने वाले कस्टम Neuralink ऐप में भेजे जाते हैं। यह ऐप रियल टाइम में आपकी सोच को डिकोड करता है और उसे डिजिटल कमांड्स (आगे, पीछे, मोड़, सीट एडजस्ट) में बदल देता है, जिसे व्हीलचेयर तुरंत एक्ज़ीक्यूट करती है ।
Neuralink के अनुसार, सिस्टम इस तरह काम करता है कि जैसे आप ऑन-स्क्रीन कर्सर को घुमाते हैं: कर्सर ऊपर = व्हीलचेयर आगे, नीचे = पीछे, बाएँ-दाएँ = स्टीयरिंग। कर्सर को जितना ज़ोर से धक्का दोगे, व्हीलचेयर उतनी तेज़ चलेगी । हर प्रतिभागी के लिए यह सिस्टम उसके अपने न्यूरल "शब्दकोश" के हिसाब से कैलिब्रेट किया जाता है, इसलिए मरीज को कोई मांसपेशी हिलाने की ज़रूरत नहीं — सिर्फ सोचने से काम हो जाता है
।
PRIME Study (Precise Robotically IMplanted Brain-Computer InterfacE, NCT06429735) एक फर्स्ट-इन-ह्यूमन फीज़िबिलिटी ट्रायल है, जो स्पाइनल कॉर्ड इंजरी या ALS के कारण क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित वयस्कों में N1 इम्प्लांट और R1 सर्जिकल रोबोट की सुरक्षा और शुरुआती कार्यक्षमता का मूल्यांकन करता है ।
मुख्य माइलस्टोन्स:
N1 इम्प्लांट एक इन्वेस्टिगेशनल डिवाइस है, जिसे अभी बाजार में बिक्री या आम इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी नहीं मिली है ।
संक्षेप में, Neuralink का व्हीलचेयर डेमॉन्स्ट्रेशन एक सावधानीपूर्वक नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल के तहत एक प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट है। यह तकनीक PRIME Study के प्रतिभागियों के लिए काम करती है, लेकिन N1 इम्प्लांट को बाजार में आने में अभी कई साल लग सकते हैं, जो ट्रायल की सफलता, पीयर-रिव्यू डेटा और FDA की समीक्षा पर निर्भर करेगा ।
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जुलाई 2026 में Neuralink ने वीडियो जारी कर दिखाया कि PRIME Study में शामिल क्वाड्रिप्लेजिया के मरीज अपने N1 इम्प्लांट से दिमागी संकेतों के ज़रिए व्हीलचेयर को आगे, पीछे, मोड़ और सीट एडजस्ट कर रहे हैं [3][33]।
जुलाई 2026 में Neuralink ने वीडियो जारी कर दिखाया कि PRIME Study में शामिल क्वाड्रिप्लेजिया के मरीज अपने N1 इम्प्लांट से दिमागी संकेतों के ज़रिए व्हीलचेयर को आगे, पीछे, मोड़ और सीट एडजस्ट कर रहे हैं [3][33]। N1 इम्प्लांट मस्तिष्क के मोटर कॉर्टेक्स से न्यूरल सिग्नल लेता है और एक कस्टम ऐप के ज़रिए उन्हें व्हीलचेयर कमांड्स में बदलता है — जैसे कर्सर ऊपर ले जाने पर व्हीलचेयर आगे बढ़ती है [8][39]।
जनवरी 2026 तक दुनिया भर में 21 प्रतिभागियों में N1 इम्प्लांट लगाया जा चुका है और अब तक कोई गंभीर डिवाइस संबंधी दुष्प्रभाव नहीं देखा गया [4][5][13]।