ब्रिटिश सरकार ने उसी दिन प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह "24/7 अपनी रक्षा के लिए तैयार है" और ब्रिटिश सेनाएं अलर्ट पर हैं । सरकार ने दोहराया कि उसने अमेरिका को केवल "रक्षात्मक" कार्रवाइयों की अनुमति दी है - जैसे कि ईरानी मिसाइल हमलों का जवाब देना - और आक्रामक अभियानों के लिए सहमति नहीं दी है ।
जुलाई 2026 के अंत में पदभार संभालने के तुरंत बाद, नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने अपने पूर्ववर्ती कीर स्टार्मर की नीति को जारी रखते हुए, ब्रिटिश सैन्य ठिकानों - विशेष रूप से RAF फेयरफोर्ड और डिएगो गार्सिया - के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी । कई मीडिया रिपोर्ट्स ने 21-22 जुलाई 2026 को इस फैसले की पुष्टि की । बर्नहम का यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दबाव के बीच आया ।
उपलब्ध स्रोतों के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ पूर्ण पैमाने पर युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू किया, न कि फरवरी 2025 में । इस दिन दोनों देशों ने समन्वित हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की हत्या शामिल थी । इससे पहले, जून 2025 में एक "बारह दिवसीय युद्ध" हुआ था, जिसमें अमेरिका ने सीधे सैन्य हस्तक्षेप किया (B-2 बमवर्षकों और क्रूज़ मिसाइलों से परमाणु साइटों को निशाना बनाया), और बाद में एक अस्थायी युद्धविराम हुआ ।
जून 2025 में 12 दिनों के हवाई युद्ध के बाद एक नाजुक युद्धविराम हुआ । यह युद्धविराम 2026 की शुरुआत में टूट गया। होर्मुज जलडमरूमध्य एक प्रमुख फ्लैशप्वाइंट बन गया, जहां IRGC ने इसे बंद करने की धमकी दी और युद्ध फारस की खाड़ी के देशों, यमन और वैश्विक ऊर्जा बाजारों तक फैल गया । जुलाई 2026 तक युद्ध जोरों पर था ।
| घटना | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| IRGC ने ब्रिटिश ठिकानों को 'वैध निशाना' घोषित किया | 23 जुलाई 2026 | BBC और अन्य स्रोतों से पुष्टि |
| ब्रिटेन ने 'आत्मरक्षा के लिए तैयार' होने का बयान दिया | 23 जुलाई 2026 | पुष्टि |
| पीएम बर्नहम ने ब्रिटिश ठिकानों के इस्तेमाल को मंजूरी दी | 21-22 जुलाई 2026 | ब्लूमबर्ग सहित अन्य रिपोर्ट्स से पुष्टि |
| अमेरिका-इज़राइल का ईरान पर हमला शुरू | 28 फरवरी 2026 | पुष्टि (फरवरी 2025 नहीं) |
| जून 2025 का युद्धविराम और होर्मुज संकट | मध्य-2026 | कई टाइमलाइन में पुष्टि |