उबर ने कहा कि ग्राहक सेवा संचालन "बहुत जटिल और सिलोड हो गया था" (siloed का मतलब अलग-अलग हिस्सों में बंट जाना), और ये कटौती "AI को अपनाने", संरचना को सरल बनाने और दक्षता बढ़ाने का हिस्सा है । कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि इसका उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना है, जहां AI ज़्यादा काम संभालेगा । पुनर्गठन के तहत, रिमोट कर्मचारियों को निर्धारित हब ऑफिसों में स्थानांतरित होने के लिए कहा गया ।
इससे सिर्फ सात हफ्ते पहले, 3 जून 2026 को, उबर ने अपने "पीपल एंड प्लेसेस" डिवीजन में 23% की कटौती की थी — यह वो टीम है जो HR, रिक्रूटमेंट, टैलेंट अक्विजिशन, ऑफिस सुविधाएं और कल्चर देखती है । ये कटौती मुख्य रूप से सीनियर पदों पर हुई और उबर के लगभग 34,000 वैश्विक कर्मचारियों के 1% से भी कम थी ।
सबसे अहम अंतर: उबर ने साफ तौर पर जून की छंटनियों को AI से नहीं जोड़ा। यह पुनर्गठन नई प्रेसिडेंट जिल हैज़लबेकर के नेतृत्व में "टीम संरचना को सरल बनाने" के लिए किया गया था । सीईओ दारा खोसरोशाही ने कहा कि ये बदलाव "पीपल टीम की उत्पादकता को अनुकूलित करने के लिए आवश्यक" हैं । कुछ रिपोर्टों की सुर्खियां थीं, "उबर ने HR और रिक्रूटमेंट की 23% नौकरियां काटीं, कहा AI इसकी वजह नहीं है" ।
जून में उबर यह कहने पर तुला हुआ था कि AI वजह नहीं है। जुलाई में, पहली बार उसने साफ कहा कि AI वजह है ।
जनवरी 2026 में दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में, खोसरोशाही ने WSJ को एक इंटरव्यू दिया जिसका शीर्षक था "क्यों उबर AI को कस्टमर सर्विस में 'कॉमन सेंस' इस्तेमाल करने दे रहा है।" उन्होंने समझाया कि उबर कठोर नियम-आधारित सिस्टम को खत्म कर रहा है और AI को फैसले लेने की शक्ति दे रहा है — संदर्भ और "कॉमन सेंस" का उपयोग करके बेहतर कस्टमर सर्विस देने के लिए ।
खोसरोशाही इस बात पर भी स्पष्ट थे कि कई कंपनियां AI को सिर्फ दिखावे के लिए अपना रही हैं। उन्होंने उन फर्मों को "प्ले-एक्टिंग" (नाटक करना) करार दिया, जो असली बदलाव की बजाय नकली AI ट्रांसफॉर्मेशन में लगी हैं । दावोस के उस इंटरव्यू ने दार्शनिक आधार तैयार किया: उबर पहले से ही इंसानों के नियम-आधारित कस्टमर सर्विस से AI के फैसलों की ओर बढ़ रहा था। जुलाई की छंटनियां उस रणनीतिक बदलाव का परिचालनात्मक नतीजा थीं।
इस बीच, उबर का AI खर्च बेकाबू हो गया। कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026 के लिए अपना पूरा आंतरिक AI टूलिंग बजट अप्रैल 2026 के अंत तक ही खत्म कर दिया — यानी साल के सिर्फ चार महीने में । यह बजट लगभग 12 महीनों के उपयोग के लिए बनाया गया था, लेकिन वास्तविक खर्च दर अनुमान से लगभग तीन गुना (3x) थी ।
खर्च किस वजह से बढ़ा? क्लॉड कोड (एंथ्रोपिक का AI कोडिंग असिस्टेंट) को उबर के लगभग 5,000 इंजीनियरों ने बड़े पैमाने पर अपना लिया । एक आंतरिक लीडरबोर्ड जो AI उपयोग की मात्रा को रैंक करता था, उसने क्लॉड कोड को अपनाने वालों की संख्या 32% से बढ़ाकर 84% कर दी । प्रति इंजीनियर लागत ₹42,000 से ₹1,67,000 ($500 से $2,000) प्रति माह तक थी ।
जून की शुरुआत में, खोसरोशाही ने कहा, "हमने पूरे साल का AI बजट सिर्फ एक तिमाही में पार कर लिया," और पुष्टि की कि इस उच्च खर्च ने कंपनी को हायरिंग धीमी करने पर मजबूर कर दिया ।
2 जून 2026 को, ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट किया कि उबर ने प्रति कर्मचारी प्रति AI कोडिंग टूल ₹1,25,000 ($1,500) मासिक टोकन खर्च की सीमा लगा दी है — यानी अगर कोई इंजीनियर क्लॉड कोड और कर्सर (एक और AI टूल) दोनों का उपयोग करता है, तो उसे हर टूल के लिए ₹1,25,000 की अलग-अलग सीमा मिलेगी । ये सीमाएं बजट फटने के बाद खर्च को नियंत्रित करने का सीधा उपाय थीं । कई रिपोर्ट्स पुष्टि करती हैं कि AI टूल्स अब उबर के कम से कम 10% प्रोडक्शन कोड जेनरेट करते हैं । यह दर्शाता है कि AI एकीकरण कोई साइड प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का एक मुख्य हिस्सा है।
यह पैटर्न पूरे उद्योग में देखा जा रहा है। इकोनॉमिक टाइम्स ने इसे "टेक छंटनियों का नया चालक AI" (AI becomes latest driver of tech layoffs) करार दिया और अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट और अन्य बड़ी टेक कंपनियों में भी यही गतिशीलता देखी । 23 जुलाई को उबर के ऐलान के दिन ही अमेज़न ने भी नौकरी में कटौती की घोषणा की ।
टकराव साफ है:
यह विरोधाभास — कंपनियां AI पर आक्रामक तरीके से खर्च कर रही हैं और उसी AI का इस्तेमाल नौकरियां कम करने के लिए कर रही हैं — 2026 के टेक लेबर मार्केट का केंद्रीय विषय है।