गूगल क्लाउड इस तिमाही का सबसे बड़ा स्टार रहा। इसका राजस्व साल-दर-साल 82% बढ़कर $24.8 बिलियन हो गया। यह AI इंफ्रास्ट्रक्चर, एंटरप्राइज AI सॉल्यूशंस और Gemini से जुड़े वर्कलोड की मांग से प्रेरित था । यह एनालिस्टों के 63–65% ग्रोथ के अनुमान से कहीं बेहतर रहा
।
| सेगमेंट | राजस्व | साल-दर-साल वृद्धि |
|---|---|---|
| गूगल सर्विसेज (सर्च, यूट्यूब, आदि) | $94.5 बिलियन | +15% |
| गूगल क्लाउड | $24.8 बिलियन | +82% |
| यूट्यूब विज्ञापन | — | +13% |
Alphabet का बढ़ता कैपेक्स एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है। अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट और मेटा सहित सबसे बड़ी अमेरिकी हाइपरस्केलर कंपनियों का 2026 में संयुक्त पूंजीगत खर्च लगभग $725 बिलियन होने का अनुमान है। यह 2025 के लगभग $410 बिलियन से 77% अधिक है । लगभग पूरा खर्च AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित है।
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि 2025-2030 के बीच ये चारों कंपनियां कुल $5.3 ट्रिलियन खर्च करेंगी । वेडबश के एनालिस्ट डैन इव्स इस स्थिति को "हथियारों की होड़" बता रहे हैं, जहां कोई भी कंपनी पीछे नहीं हटना चाहती
। मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि अकेले अगले साल AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर कुल खर्च 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकता है
।
विश्लेषकों द्वारा उठाया गया प्रमुख जोखिम: हाइपरस्केलर कंपनियों का संयुक्त फ्री कैश फ्लो 2026 की तीसरी तिमाही तक निगेटिव हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कैपेक्स सालाना लगभग 70% की दर से बढ़ रहा है, जबकि कैश फ्लो में केवल 23% की वृद्धि हो रही है । Alphabet का अपना Q2 में निगेटिव $5.9 बिलियन का फ्री कैश फ्लो इसी तनाव का शुरुआती संकेत है।