पहले यह कर्ज सिर्फ अमेज़न, गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और ओरेकल जैसी दिग्गज टेक कंपनियों (हाइपरस्केलर्स) तक सीमित था। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट बताती है कि इस साल AI से जुड़े कर्ज में हाइपरस्केलर्स की हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 40% रह गई है । बाकी 60% कर्ज AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों, डेटा सेंटर ऑपरेटरों, और यहां तक कि क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग से AI में आए निवेशकों से आ रहा है ।
इस बदलाव की एक बड़ी मिसाल है गैलेक्सी डिजिटल (Galaxy Digital) का 3.5 अरब डॉलर का जंक बॉन्ड ऑफरिंग । कंपनी ने अपनी सहायक कंपनी के जरिए यह कर्ज जुटाने की घोषणा की है, जिसका इस्तेमाल टेक्सास के डिकेंस काउंटी में एक AI डेटा सेंटर बनाने में होगा । दिलचस्प बात यह है कि यह जगह पहले क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग के लिए इस्तेमाल होती थी । अब इसे AI कंपनी कोरवीव (CoreWeave) को 15 साल के लिए लीज पर दिया जाएगा । ब्लूमबर्ग ने इस डील को "अमेरिकी क्रेडिट मार्केट के जोखिम भरे कोने में AI फाइनेंसिंग का विस्तार" बताया है ।
यह सवाल इन दिनों निवेशकों के बीच गर्मागर्म बहस का विषय है। इस मामले पर विशेषज्ञ दो खेमों में बंट गए हैं:
विशेषज्ञों का कहना है कि AI फाइनेंसिंग का एक बड़ा हिस्सा कंपनियों की बैलेंस शीट पर नजर नहीं आता। ये ऑफ-बैलेंस-शीट देनदारियां हैं, जो ऑपरेटिंग लीज, बिजली खरीद समझौतों और जॉइंट-वेंचर के जरिए बनती हैं । बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) ने आगाह किया है कि AI कंपनियों को दिए जाने वाले प्राइवेट क्रेडिट लोन की राशि शून्य से बढ़कर 200 अरब डॉलर से अधिक हो गई है ।
यह जानकारी भारतीय निवेशकों के लिए भी अहम है क्योंकि:
2026 में AI कर्ज का बुखार एक ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। यह सिर्फ बड़ी टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा इकोसिस्टम इसमें शामिल हो रहा है। हालांकि इस बात पर बहस जारी है कि क्या यह कर्ज अमेरिकी सरकारी बॉन्ड बाजार को कमजोर कर रहा है, लेकिन इतना तय है कि AI की यह दौड़ कर्ज के इस उछाल के बिना संभव नहीं थी। निवेशकों को इस नए ट्रेंड को समझना होगा और अपने पोर्टफोलियो को इस हिसाब से संतुलित करना होगा।