फाइनल खत्म होने के तुरंत बाद, पूर्व फीफा अध्यक्ष सेप ब्लैटर ने अपने उत्तराधिकारी जियानी इन्फेंटिनो पर अभूतपूर्व सार्वजनिक हमला बोलते हुए घोषणा की कि विश्व कप ने "अपनी विश्वसनीयता खो दी है" और फीफा में "नए नेतृत्व" की आवश्यकता है ।
ब्लैटर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया कि टूर्नामेंट राजनीतिक हस्तक्षेप से दूषित हो गया है। उन्होंने लिखा: "लाल कार्ड राजनीतिक फोन कॉल से पलटे नहीं जाते। वे नियमों, सबूतों और स्वतंत्र निकायों द्वारा पलटे जाते हैं" । उन्होंने ला लीगा अध्यक्ष जेवियर टेबास का भी समर्थन किया, जिन्होंने इन्फेंटिनो पर "फुटबॉल उद्योग को नष्ट करने" का आरोप लगाया और उनसे इस्तीफा मांगा
। बाद में ब्लैटर ने कतर ट्रिब्यून को बताया कि "सही" टीम जीती, लेकिन उन्होंने दोहराया कि फीफा को शीर्ष पर बदलाव की जरूरत है
। इससे पहले 2026 में, ब्लैटर ने फीफा को "तानाशाही" करार दिया था और अमेरिका में "चल रहे राजनीतिक संघर्ष" के बीच विश्व कप की मेजबानी पर सवाल उठाए थे
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ब्लैटर के हमले का तत्काल कारण अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन के लाल कार्ड के निलंबन को फीफा द्वारा पलटना था, जो कथित तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे हस्तक्षेप के बाद हुआ था ।
मेक्सिको को विश्व कप की मेजबानी से जो आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद थी, वह उम्मीदों से काफी कम रहा:
2026 टूर्नामेंट को इतिहास का सबसे राजनीतिक विश्व कप बताया गया:
2026 विश्व कप अत्यधिक विरोधाभासों का टूर्नामेंट था। मैदान पर एक नाटकीय और उच्च गुणवत्ता वाला फाइनल था, लेकिन इस पर अभूतपूर्व राजनीतिक तनाव, फीफा में नेतृत्व संकट और मेक्सिको के लिए अपेक्षा से कम आर्थिक लाभ की छाया मंडराती रही।