ईरान के IRGC ने दावा किया कि 'ऑपरेशन नस्र 2' के 21वें चरण में 20 जुलाई 2026 को जॉर्डन के किंग हुसैन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (अकाबा) पर तैनात अमेरिकी C 17 ग्लोबमास्टर III और बोइंग P 8 पोसीडॉन विमानों को बैलिस्टिक मिसा... IRGC का दावा है कि इस हमले में कई अमेरिकी विमानों को 'भारी नुकसान' पहुंचा और अकाबा एयरपोर्ट पर अ...

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ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि 20 जुलाई 2026 को 'ऑपरेशन नस्र 2' के 21वें चरण के तहत उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन के किंग हुसैन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (अकाबा एयरपोर्ट) पर तैनात अमेरिकी सैन्य विमानों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया । IRGC के अनुसार, इस हमले में निम्नलिखित को निशाना बनाया गया:
महत्वपूर्ण चेतावनी: ये सिर्फ ईरानी दावे हैं। अमेरिकी सेना या किसी स्वतंत्र स्रोत द्वारा इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है । 'ऑपरेशन नस्र 2' के पहले के चरणों में जॉर्डन के अल-अज़राक बेस और कुवैत, बहरीन व कतर में अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया गया था
।
जॉर्डन के अधिकारियों ने अकाबा एयरपोर्ट या बंदरगाह को खाली कराने की खबरों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया, जो अमेरिकी दूतावास की पिछली चेतावनी के बिल्कुल विपरीत था।
अमेरिकी दूतावास की चेतावनी और जॉर्डन के इनकार के बीच यह विरोधाभास सार्वजनिक रिपोर्टिंग में अनसुलझा बना हुआ है।
'ऑपरेशन नस्र 2' मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ ईरान का बहु-चरणीय जवाबी अभियान है। यह तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी 2026 को ईरानी क्षेत्र पर हमले शुरू किए । जुलाई 2026 के मध्य तक, IRGC प्रतिदिन कई चरणों के हमले कर रहा था, जिसमें कुवैत, बहरीन, जॉर्डन, कतर और सीरिया में ठिकानों को निशाना बनाया गया
। जवाब में, अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रखे, जिसमें 18 जुलाई को एक दौर भी शामिल था, जब ईरानी हमलों में कम से कम दो अमेरिकी कर्मी मारे गए थे
।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) — 16 जुलाई को, केवल तीन वाणिज्यिक जहाजों ने जलडमरूमध्य पार किया, जो मई के बाद से सबसे कम दैनिक यातायात था। जहाजों का आवागमन लगभग ठप हो गया क्योंकि ईरान ने जहाजों पर हमले शुरू कर दिए और अमेरिका ने ईरान से संबंधित शिपिंग पर अपनी नाकाबंदी फिर से लगा दी । इस संघर्ष की शुरुआत में ईरान ने जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ईंधन की कीमतें आसमान छू गईं और खाड़ी के तेल और गैस निर्यात को गंभीर झटका लगा
।
खाड़ी देशों पर प्रभाव — खाड़ी के अरब देश इस क्रॉसफायर में फंस गए हैं। उन्होंने ईरान के खतरे को बेअसर करने के लिए अमेरिका से और अधिक निर्णायक कार्रवाई का दबाव डाला , जबकि उन्हें अपनी जमीन पर स्थित अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ रहा है
। कार्नेगी एंडोमेंट ने नोट किया कि इस संकट ने उत्तरी अफ्रीका तक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर दिया है
। युद्ध के बढ़ते खर्च के कारण कुछ खाड़ी देश ईरान के साथ अधिक समझौतावादी रुख अपनाने लगे हैं
।
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ईरान के IRGC ने दावा किया कि 'ऑपरेशन नस्र 2' के 21वें चरण में 20 जुलाई 2026 को जॉर्डन के किंग हुसैन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (अकाबा) पर तैनात अमेरिकी C 17 ग्लोबमास्टर III और बोइंग P 8 पोसीडॉन विमानों को बैलिस्टिक मिसा...
ईरान के IRGC ने दावा किया कि 'ऑपरेशन नस्र 2' के 21वें चरण में 20 जुलाई 2026 को जॉर्डन के किंग हुसैन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (अकाबा) पर तैनात अमेरिकी C 17 ग्लोबमास्टर III और बोइंग P 8 पोसीडॉन विमानों को बैलिस्टिक मिसा... IRGC का दावा है कि इस हमले में कई अमेरिकी विमानों को 'भारी नुकसान' पहुंचा और अकाबा एयरपोर्ट पर अमेरिकी बलों के 20 हैंगरों को भी निशाना बनाया गया [7][14]।
IRGC ने यह भी दावा किया कि ये हमले जॉर्डन के नागरिकों और सैन्य कर्मियों द्वारा दी गई खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए [4][7][11]।