फिलहाल, EU की कुल अंतिम ऊर्जा खपत में बिजली का हिस्सा केवल 23% है, जो पिछले एक दशक से स्थिर बना हुआ है । आयोग ने 2040 तक इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 46% करने का एक संकेतात्मक (indicative) लक्ष्य प्रस्तावित किया है, जो वर्तमान दर को प्रभावी रूप से दोगुना कर देगा । इससे पहले, क्लीन इंडस्ट्रियल डील के तहत 2030 तक 32% का एक मध्यवर्ती लक्ष्य पहले ही स्थापित किया जा चुका है ।
यह लक्ष्य फिलहाल 'संकेतात्मक' है, कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। आयोग 2026 की चौथी तिमाही में एक प्रभाव आकलन करेगा, जिसके बाद इसे 2030 के बाद के एनर्जी यूनियन पैकेज के हिस्से के रूप में बाध्यकारी कानून में शामिल करने पर विचार किया जाएगा । गौरतलब है कि एक प्रारंभिक मसौदे में इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन अंतिम योजना में इसे हटा लिया गया ।
आयोग के अनुसार, इस लक्ष्य को प्राप्त करने से 2040 तक गैस आयात में 70% से अधिक और कच्चे तेल के आयात में 40% से अधिक की कमी आएगी, जिससे EU को जीवाश्म ईंधन आयात बिल पर प्रति वर्ष €260 बिलियन (लगभग ₹23 लाख करोड़) तक की बचत होगी । यह योजना विद्युतीकरण को केवल एक जलवायु उपाय के रूप में नहीं, बल्कि एक आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता और ऊर्जा सुरक्षा अनिवार्यता के रूप में भी प्रस्तुत करती है, विशेष रूप से 2026 के मध्य पूर्व संकट और अस्थिर जीवाश्म ईंधन बाजारों के मद्देनजर ।
एक केंद्रीय चुनौती यह है कि EU में, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की कीमत गैस की तुलना में लगभग 2.5 गुना अधिक है । इस अंतर को कम करने के लिए योजना में कई उपाय पेश किए गए हैं:
ETS संशोधन (COM(2026) 600) को उसी दिन प्रकाशित किया गया और यह यूरोप के कार्बन बाजार का एक महत्वपूर्ण पुनर्डिज़ाइन है :
विद्युतीकरण कार्य योजना और ETS विधायी प्रस्ताव अब आगे की बातचीत और अनुमोदन के लिए यूरोपीय संसद और परिषद में जाएंगे । आयोग 2026 की चौथी तिमाही में 46% लक्ष्य को बाध्यकारी बनाने पर एक प्रभाव आकलन करेगा ।
कई पर्यावरण समूहों ने इस पैकेज की आलोचना की है। यूरोपीय पर्यावरण ब्यूरो (EEB) ने कहा कि आयोग 'औद्योगिक पिछड़ेपन के आगे झुक गया', और कमजोर LRF और विस्तारित मुफ्त परमिटों को प्रमुख चिंता के रूप में उजागर किया । 350.org ने महत्वाकांक्षा का स्वागत किया, लेकिन चेतावनी दी कि 'अधिक महत्वाकांक्षा, कूटनीति और वित्त के बिना यह योजना अधूरी है' । रॉयटर्स ने बताया कि आलोचकों का तर्क है कि उच्च बिजली की कीमतें लक्ष्यों को प्राप्त करने में बाधा बन सकती हैं । हेनरिक बोल फाउंडेशन ने कहा कि लक्ष्य 'प्रौद्योगिकी-तटस्थ' है और यह जीवाश्म ईंधन और परमाणु ऊर्जा के निरंतर उपयोग को बढ़ावा दे सकता है ।
स्मार्ट मीटर का लक्ष्य 2033 तक 75% है, न कि 65%, जैसा कि कुछ प्रारंभिक मसौदा दस्तावेजों में बताया गया था। आधिकारिक विधायी प्रस्ताव COM(2026) 600 में 2033 का लक्ष्य 75% निर्धारित किया गया है ।