अली ख़ामेनेई के सात दिनों के राजकीय अंतिम संस्कार (3-9 जुलाई, 2026) के दौरान आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आ गए। शोक संतप्त भीड़ ने 'समझौताकारी की मौत' के नारे लगाते हुए राष्ट्रपति पेज़ेशकियान को घेर लिया और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को भी कट्टरपंथी भीड़ ने घेर लिया । इज़राइली और ईरानी स्रोतों के अनुसार, IRGC-समर्थित शोक संतप्त लोगों ने दोनों अधिकारियों को शारीरिक रूप से निशाना बनाया । इसे प्रशासन को डराने की कोशिश माना गया, क्योंकि वह जंग के बीच कूटनीति की कोशिश कर रहा था ।
मौजूदा संकट की सबसे बड़ी वजह ईरान के नए सर्वोच्च नेता, मोजतबा ख़ामेनेई की लगातार अनुपस्थिति है। उन्हें मार्च 2026 की शुरुआत में यानी अपने पिता अली ख़ामेनेई की 28 फरवरी को हुई मौत के कुछ दिनों बाद ही सर्वोच्च नेता नियुक्त कर दिया गया था । इसके बाद से उनका एक भी सार्वजनिक दीदार नहीं हुआ और न ही कोई वीडियो संदेश जारी हुआ ।
पाकिस्तान की मध्यस्थता में जून 2026 के मध्य में एक युद्धविराम समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर हुए थे । यह जुलाई की शुरुआत में कई घटनाओं के बाद ढह गया:
इस संकट ने ईरान के नेतृत्व को दो खेमों में बांट दिया है :
संक्षेप में, ईरान में मौजूदा संकट तीन बड़े झटकों से उपजा है: अली ख़ामेनेई की अचानक हत्या और उनके उत्तराधिकारी का गंभीर रूप से घायल होना, नाजुक अमेरिकी युद्धविराम का ढहना, और जंग से बाहर निकलना चाहने वाले मध्यमार्गियों और कूटनीति को देशद्रोह मानने वाले कट्टरपंथियों के बीच एक भीषण सत्ता संघर्ष - ये सब एक ऐसे वक़्त में हो रहा है जब कोई दिखने वाला या काम करने वाला सर्वोच्च नेता मौजूद नहीं है।