अमेरिकी हमलों ने ईरान के चाबहार में शहीद कलंतरी बंदरगाह को निशाना बनाया — यह एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण, भारत-समर्थित बंदरगाह है — यह हमला अमेरिकी अभियान की दूसरी रात (9 जुलाई) को हुआ । ईरानी प्रतिक्रियाओं में शामिल थे:
17-18 जुलाई, 2026 तक, अमेरिका और ईरान लगातार सातवीं रात भीषण हमलों में उलझे हुए थे :
निष्कर्ष: अंतरिम शांति समझौता होर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रैफिक अधिकारों की अलग-अलग व्याख्याओं, उसके बाद टैंकर हमलों, अमेरिकी हमलों, तेल प्रतिबंधों की बहाली और ट्रंप द्वारा मेमोरेंडम को खत्म घोषित करने के कारण ध्वस्त हो गया। ईरान ने — भारत में अपने दूतावास और सुप्रीम लीडर के कार्यालय के माध्यम से — चाबहार हमले को युद्ध अपराध बताया और तीव्रता बढ़ाने की धमकी दी। सातवीं रात तक, अमेरिका रात में ईरानी बुनियादी ढांचे पर हमला कर रहा था, जबकि ईरान पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर रहा था, और कोई कूटनीतिक समाधान नज़र नहीं आ रहा था।