इस्लामाबाद समझौता कैसे ढहा: ईरान के सर्वोच्च नेता ने ट्रंप के हस्ताक्षर को बताया 'बेकार', अमेरिकी हमले फिर शुरू
इस्लामाबाद समझौते पर 17 जून 2026 को हस्ताक्षर हुए थे, जो 60 दिनों की बातचीत की रूपरेखा तय करता था। तीन हफ्ते के अंदर ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'खत्म' घोषित कर दिया और ईरान पर नए हमले शुरू कर दिए। ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने 18 जुलाई 2026 को लिखित बयान जारी कर ट्रंप के हस्ताक्षर को 'बेका...
इस्लामाबाद समझौते पर 17 जून 2026 को हस्ताक्षर हुए थे, जो 60 दिनों की बातचीत की रूपरेखा तय करता था।
तीन हफ्ते के अंदर ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'खत्म' घोषित कर दिया और ईरान पर नए हमले शुरू कर दिए।
ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने 18 जुलाई 2026 को लिखित बयान जारी कर ट्रंप के हस्ताक्षर को 'बेकार और अविश्वसनीय' बताया।
ईरान ने समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को निलंबित कर दिया और आगे की बातचीत से इनकार कर दिया।
Search & fact check with cited sources for What are the key developments in the collapse of the US Iran Islamabad Memorandum of UnderstandinAI-generated editorial hero image for Search & fact check with cited sources for What are the key developments in the collapse of the US Iran Islamabad Memorandum of Understandin.
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तीन हफ्तों के भीतर ही इस्लामाबाद समझौता (Islamabad Memorandum of Understanding) चरमरा गया। दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाइयां, आरोप-प्रत्यारोप और समझौते की अस्पष्ट भाषा इसके टूटने की मुख्य वजहें रहीं। आइए, प्रमुख घटनाक्रमों को समझते हैं।
समझौते की मूल शर्तें क्या थीं?
इस्लामाबाद समझौते पर 17 जून, 2026 को हस्ताक्षर हुए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ वर्साय पैलेस में एक रात्रिभोज के दौरान रिमोट से हस्ताक्षर किए, जबकि ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने तेहरान में हस्ताक्षर किए।
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अपना शोध जारी रखें
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"इस्लामाबाद समझौता कैसे ढहा: ईरान के सर्वोच्च नेता ने ट्रंप के हस्ताक्षर को बताया 'बेकार', अमेरिकी हमले फिर शुरू" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
इस्लामाबाद समझौते पर 17 जून 2026 को हस्ताक्षर हुए थे, जो 60 दिनों की बातचीत की रूपरेखा तय करता था।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
इस्लामाबाद समझौते पर 17 जून 2026 को हस्ताक्षर हुए थे, जो 60 दिनों की बातचीत की रूपरेखा तय करता था। तीन हफ्ते के अंदर ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'खत्म' घोषित कर दिया और ईरान पर नए हमले शुरू कर दिए।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने 18 जुलाई 2026 को लिखित बयान जारी कर ट्रंप के हस्ताक्षर को 'बेकार और अविश्वसनीय' बताया।
इस्लामाबाद समझौता कैसे ढहा: ईरान के सर्वोच्च नेता ने ट्रंप के हस्ताक्षर को बताया 'बेकार', अमेरिकी हमले फिर शुरू
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तीन हफ्ते के अंदर ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'खत्म' घोषित कर दिया और ईरान पर नए हमले शुरू कर दिए।
ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने 18 जुलाई 2026 को लिखित बयान जारी कर ट्रंप के हस्ताक्षर को 'बेकार और अविश्वसनीय' बताया।
ईरान ने समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को निलंबित कर दिया और आगे की बातचीत से इनकार कर दिया।
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तीन हफ्तों के भीतर ही इस्लामाबाद समझौता (Islamabad Memorandum of Understanding) चरमरा गया। दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाइयां, आरोप-प्रत्यारोप और समझौते की अस्पष्ट भाषा इसके टूटने की मुख्य वजहें रहीं। आइए, प्रमुख घटनाक्रमों को समझते हैं।
समझौते की मूल शर्तें क्या थीं?
इस्लामाबाद समझौते पर 17 जून, 2026 को हस्ताक्षर हुए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ वर्साय पैलेस में एक रात्रिभोज के दौरान रिमोट से हस्ताक्षर किए, जबकि ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने तेहरान में हस्ताक्षर किए।
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"इस्लामाबाद समझौता कैसे ढहा: ईरान के सर्वोच्च नेता ने ट्रंप के हस्ताक्षर को बताया 'बेकार', अमेरिकी हमले फिर शुरू" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
इस्लामाबाद समझौते पर 17 जून 2026 को हस्ताक्षर हुए थे, जो 60 दिनों की बातचीत की रूपरेखा तय करता था।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
इस्लामाबाद समझौते पर 17 जून 2026 को हस्ताक्षर हुए थे, जो 60 दिनों की बातचीत की रूपरेखा तय करता था। तीन हफ्ते के अंदर ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'खत्म' घोषित कर दिया और ईरान पर नए हमले शुरू कर दिए।
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने 18 जुलाई 2026 को लिखित बयान जारी कर ट्रंप के हस्ताक्षर को 'बेकार और अविश्वसनीय' बताया।
इस समझौते में 60 दिनों की एक रूपरेखा तय की गई थी, जिसके दौरान एक स्थायी शांति संधि के लिए बातचीत होनी थी। इस संधि में ये मुद्दे शामिल थे:
2026 के ईरान युद्ध में युद्ध विराम
ईरान का परमाणु कार्यक्रम
प्रतिबंधों में ढील
होर्मुज जलडमरूमध्य का फिर से खुलना और उसका प्रबंधन
लेबनान में तनाव कम करना
हालांकि, सबसे अहम बात यह थी कि बड़े और विवादास्पद मुद्दों को भविष्य की बातचीत के लिए टाल दिया गया था।
ट्रंप का ऐलान: "समझौता खत्म"
7-8 जुलाई, 2026 को तुर्की के अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया कि युद्ध विराम व्यावहारिक रूप से खत्म हो चुका है।
7 जुलाई: ट्रंप ने चेतावनी दी कि "हम आज रात उन्हें कड़ा जवाब देने वाले हैं" और उन्होंने युद्ध विराम को 'खत्म' बताया।
8 जुलाई: ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा, "मुझे लगता है कि यह खत्म हो गया है। मैं उनके साथ कोई लेन-देन नहीं करना चाहता। वे गंदे लोग हैं।"
अमेरिकी हमले और पहली अमेरिकी सैन्य मौतें
जुलाई की शुरुआत: अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए। CENTCOM ने 13 जुलाई को बुशहर, चाह बहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास सहित कई ठिकानों पर हमलों की पुष्टि की।
9 जुलाई: ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत, कतर और बहरीन में अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमला किया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हमलों में 14 लोग मारे गए और 78 घायल हुए।
18 जुलाई (आज): अमेरिकी सेना ने ईरान द्वारा सीधे किए गए हमले में पहली अमेरिकी सैन्य मौत की घोषणा की। जॉर्डन में एक बेस पर हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए और एक लापता हो गया।
खामेनेई का बयान: "ट्रंप का हस्ताक्षर बेकार"
शनिवार, 18 जुलाई 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने एक लिखित बयान जारी किया, जिसे ईरानी राज्य टेलीविजन पर पढ़ा गया। इसमें उन्होंने कहा कि समझौते के बार-बार उल्लंघन ने यह साबित कर दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप का हस्ताक्षर "पूरी तरह से बेकार और विश्वसनीयता से रहित है"।
बयान में कहा गया:
"महान शैतान (अमेरिका) द्वारा समझौते के बार-बार उल्लंघन ने एक बार फिर सभी को साबित कर दिया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति का हस्ताक्षर कितना बेकार और अविश्वसनीय है।"
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ईरान पर हमले जारी रखता है तो उसे "अविस्मरणीय सबक" सिखाया जाएगा।
ईरान ने प्रतिबद्धताएं कीं निलंबित
उसी दिन (18 जुलाई) ईरान के उप विदेश मंत्री काज़िम ग़रीबाबादी ने घोषणा की कि तेहरान इस्लामाबाद समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को निलंबित कर रहा है। उन्होंने अमेरिका पर बार-बार उल्लंघन करके समझौते को "प्रभावी रूप से खत्म करने" का आरोप लगाया। ईरान ने साफ संकेत दिया कि वह मौजूदा ढांचे के तहत आगे बातचीत करने से इनकार करता है।
समझौते की कमजोरी: अस्पष्ट भाषा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामाबाद समझौता संरचनात्मक रूप से कमजोर था। तुर्की की समाचार एजेंसी अनादोलु एजेंसी (AA) ने 10 जुलाई को रिपोर्ट किया कि "होर्मुज जलडमरूमध्य, प्रतिबंधों में ढील, जमी ईरानी संपत्तियों और लेबनान पर अनसुलझे विवाद औपचारिक वार्ता शुरू होने से पहले ही समझौते को पटरी से उतारने की धमकी दे रहे हैं।"
आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन ने समझौते को "एक दोषपूर्ण लेकिन स्वागतयोग्य विकास" बताया, जो "संघर्ष के मूल में मौजूद प्रसार संबंधी चिंताओं को दूर करने में विफल रहा।" सबसे विवादास्पद मुद्दों (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य और प्रतिबंधों में ढील) पर अस्पष्ट और टालमटोल वाली भाषा के कारण कोई भी पक्ष उल्लंघन का दावा कर सकता था, और ठीक यही हुआ।
reuters.comIran says it hits U.S. military targets in Gulf, buries slain leader Khamenei
इस समझौते में 60 दिनों की एक रूपरेखा तय की गई थी, जिसके दौरान एक स्थायी शांति संधि के लिए बातचीत होनी थी। इस संधि में ये मुद्दे शामिल थे:
2026 के ईरान युद्ध में युद्ध विराम
ईरान का परमाणु कार्यक्रम
प्रतिबंधों में ढील
होर्मुज जलडमरूमध्य का फिर से खुलना और उसका प्रबंधन
लेबनान में तनाव कम करना
हालांकि, सबसे अहम बात यह थी कि बड़े और विवादास्पद मुद्दों को भविष्य की बातचीत के लिए टाल दिया गया था।
ट्रंप का ऐलान: "समझौता खत्म"
7-8 जुलाई, 2026 को तुर्की के अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया कि युद्ध विराम व्यावहारिक रूप से खत्म हो चुका है।
7 जुलाई: ट्रंप ने चेतावनी दी कि "हम आज रात उन्हें कड़ा जवाब देने वाले हैं" और उन्होंने युद्ध विराम को 'खत्म' बताया।
8 जुलाई: ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा, "मुझे लगता है कि यह खत्म हो गया है। मैं उनके साथ कोई लेन-देन नहीं करना चाहता। वे गंदे लोग हैं।"
अमेरिकी हमले और पहली अमेरिकी सैन्य मौतें
जुलाई की शुरुआत: अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए। CENTCOM ने 13 जुलाई को बुशहर, चाह बहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास सहित कई ठिकानों पर हमलों की पुष्टि की।
9 जुलाई: ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत, कतर और बहरीन में अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमला किया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हमलों में 14 लोग मारे गए और 78 घायल हुए।
18 जुलाई (आज): अमेरिकी सेना ने ईरान द्वारा सीधे किए गए हमले में पहली अमेरिकी सैन्य मौत की घोषणा की। जॉर्डन में एक बेस पर हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए और एक लापता हो गया।
खामेनेई का बयान: "ट्रंप का हस्ताक्षर बेकार"
शनिवार, 18 जुलाई 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने एक लिखित बयान जारी किया, जिसे ईरानी राज्य टेलीविजन पर पढ़ा गया। इसमें उन्होंने कहा कि समझौते के बार-बार उल्लंघन ने यह साबित कर दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप का हस्ताक्षर "पूरी तरह से बेकार और विश्वसनीयता से रहित है"।
बयान में कहा गया:
"महान शैतान (अमेरिका) द्वारा समझौते के बार-बार उल्लंघन ने एक बार फिर सभी को साबित कर दिया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति का हस्ताक्षर कितना बेकार और अविश्वसनीय है।"
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ईरान पर हमले जारी रखता है तो उसे "अविस्मरणीय सबक" सिखाया जाएगा।
ईरान ने प्रतिबद्धताएं कीं निलंबित
उसी दिन (18 जुलाई) ईरान के उप विदेश मंत्री काज़िम ग़रीबाबादी ने घोषणा की कि तेहरान इस्लामाबाद समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को निलंबित कर रहा है। उन्होंने अमेरिका पर बार-बार उल्लंघन करके समझौते को "प्रभावी रूप से खत्म करने" का आरोप लगाया। ईरान ने साफ संकेत दिया कि वह मौजूदा ढांचे के तहत आगे बातचीत करने से इनकार करता है।
समझौते की कमजोरी: अस्पष्ट भाषा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामाबाद समझौता संरचनात्मक रूप से कमजोर था। तुर्की की समाचार एजेंसी अनादोलु एजेंसी (AA) ने 10 जुलाई को रिपोर्ट किया कि "होर्मुज जलडमरूमध्य, प्रतिबंधों में ढील, जमी ईरानी संपत्तियों और लेबनान पर अनसुलझे विवाद औपचारिक वार्ता शुरू होने से पहले ही समझौते को पटरी से उतारने की धमकी दे रहे हैं।"
आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन ने समझौते को "एक दोषपूर्ण लेकिन स्वागतयोग्य विकास" बताया, जो "संघर्ष के मूल में मौजूद प्रसार संबंधी चिंताओं को दूर करने में विफल रहा।" सबसे विवादास्पद मुद्दों (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य और प्रतिबंधों में ढील) पर अस्पष्ट और टालमटोल वाली भाषा के कारण कोई भी पक्ष उल्लंघन का दावा कर सकता था, और ठीक यही हुआ।
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