इस नई प्रजाति का वैज्ञानिक नाम कोलोबस कांगोएन्सिस (Colobus congoensis) रखा गया है। स्थानीय बालंगा समुदाय इसे 'लिक्वेली' (Likweli) या 'कसाबा एनकोनी' (kasaba nkoni, यानी 'शाखा हिलाने वाला') कहता है। यह पिछले 75 सालों में पहचानी गई अफ्रीकी बंदरों की पांचवीं नई प्रजाति है । यह खोज 15 जुलाई 2026 को जर्नल PLOS One में प्रकाशित हुई, जो लगभग दो दशकों के क्षेत्रीय शोध, कैमरा-ट्रैप तस्वीरों, जब्त किए गए नमूनों की शारीरिक जांच और उनकी आवाज़ों के विश्लेषण पर आधारित है ।
इस बंदर का पूरा ज्ञात क्षेत्र कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्व-मध्य भाग में लोमामी और कांगो नदियों के बीच के एक दुर्गम क्षेत्र तक सीमित है। इसकी अधिकांश आबादी लोमामी नेशनल पार्क और उसके आसपास रहती है, जो एक बहुत ही सीमित वितरण को दर्शाता है ।
लिक्वेली की खोज कांगो बेसिन की जैव विविधता को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है: