तेल की कीमतों में आए इस झटके ने यूरोप में महंगाई (इन्फ्लेशन) की आशंका को हवा दे दी, जिसका सीधा असर यूरो ज़ोन के सरकारी बॉन्ड पर पड़ा। जर्मनी का 10-वर्षीय बंड यील्ड (Bund Yield) 16 जुलाई को बढ़कर 3.13% पर पहुंच गया, जो 20 मई के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है । इस सप्ताह में यह 9 आधार अंक (bps) और जुलाई महीने में कुल 26 आधार अंक बढ़ चुका है
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इसका तंत्र सीधा था: तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की उम्मीदें बढ़ा दीं, जिससे बाजार में यह विश्वास मजबूत हुआ कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) को महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करनी पड़ेगी । इसी वजह से जर्मन और अमेरिकी 10-वर्षीय उधारी लागत के बीच का अंतर (स्प्रेड) घटकर लगभग 144 आधार अंक रह गया, जो एक महीने में सबसे कम है
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अमेरिका की ओर देखें तो, जून के दो सरकारी आंकड़ों ने यील्ड पर बढ़ते दबाव को कुछ हद तक कम किया:
इन नरम मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बाद, बाजार में फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा इस साल एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना घटकर लगभग 40% रह गई । इससे अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड पर दबाव कम हुआ, भले ही तेल की कीमतें बढ़ रही थीं
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नरम CPI/PPI आंकड़ों के बावजूद, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई की चिंता ने बाजारों में हलचल बनाए रखी: