इसी के साथ, जॉर्जीवा ने IMF के अपने टूलकिट और नीतियों में 'व्यापक अपडेट और अपग्रेड' की घोषणा की है, ताकि सदस्य देश झटकों और बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था से निपट सकें ।
एक उच्च-स्तरीय नीति भाषण में, जॉर्जीवा ने जोर देकर कहा कि मौजूदा स्थिति कोविड-19 के दौर से बिल्कुल अलग है ।
IMF के 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' (विश्व आर्थिक परिदृश्य) में 2026 के लिए लगातार कटौती की गई है:
| अनुमान की तारीख | वैश्विक विकास दर का अनुमान | मुख्य संशोधन का कारण |
|---|---|---|
| जनवरी 2026 | 3.3% | युद्ध-पूर्व स्थिति; टेक क्षेत्र से प्रेरित गति |
| अप्रैल 2026 | 3.1% | मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद, ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान |
| जुलाई 2026 | 3.0% | फिर से शुरू हुई लड़ाई, महंगाई घटने की रफ्तार थमना, व्यापार विखंडन, AI सुधार के जोखिम |
कारण 1: मिडिल ईस्ट युद्ध और तेल आपूर्ति पर संकट। इस संघर्ष के कारण, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान ने तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है (2026 में औसतन $110 प्रति बैरल होने का अनुमान) और आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित किया है । IMF के सबसे बुरे परिदृश्य में, अगर ये व्यवधान जारी रहे तो 2026 में विकास दर 2.5% तक गिर सकती है ।
कारण 2: महंगाई घटने की रफ्तार थमना और फिर से बढ़ती महंगाई। IMF ने 2026 के लिए वैश्विक महंगाई (हेडलाइन इन्फ्लेशन) के अनुमान को 0.3 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 4.7% कर दिया है। चेतावनी दी गई है कि युद्ध ने 2024 की शुरुआत से चली आ रही महंगाई घटने की प्रवृत्ति (disinflation trend) को उलट दिया है । ऊर्जा और खाद्य कीमतों में उछाल इसकी मुख्य वजह है ।
कारण 3: व्यापार में विखंडन (ट्रेड फ्रैगमेंटेशन)। अमेरिका के नेतृत्व में चल रहे व्यापार व्यवधान और बढ़ती अनिश्चितता वैश्विक गतिविधियों पर भारी पड़ रही है और मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं को कम कर रही है ।
कारण 4: AI बाजार में सुधार का जोखिम। IMF ने AI के प्रति बाजार की उम्मीदों में संभावित सुधार (correction) को एक जोखिम के रूप में चिह्नित किया है, खासकर जब पिछले कुछ वर्षों में टेक्नोलॉजी कंपनियों के वैल्यूएशन में भारी उछाल आया है ।
कारण 5: असमान और कमजोर सुधार। जुलाई 2026 के अपडेट में, IMF का कहना है कि युद्ध का झटका ऊर्जा आयात करने वाले देशों और कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर सबसे ज्यादा भारी है। वहीं, AI से प्रेरित मांग उन देशों को फायदा पहुंचा रही है जो वैश्विक टेक्नोलॉजी मूल्य श्रृंखला में शामिल हैं। इससे वैश्विक सुधार असमान और नाजुक बन गया है ।
एक अधिक अस्थिर दुनिया का सामना करते हुए, IMF खुद भी एक महत्वपूर्ण बदलाव से गुजर रहा है:
जॉर्जीवा की मुख्य चेतावनी यह है कि दुनिया के पास अगले संकट से निपटने के लिए कोई वित्तीय बफर नहीं बचा है। ईरान से जुड़े युद्ध, तेल की कीमतों में उछाल, फिर से बढ़ती महंगाई, व्यापार विखंडन और AI से जुड़ी अनिश्चितता के कारण IMF का दृष्टिकोण तेजी से बिगड़ा है। इसके जवाब में, फंड अपने स्वयं के संस्थागत ढांचे को नया रूप दे रहा है — अपने ऋण देने के टूलकिट, शासन संरचना और नीतिगत सलाह को अपडेट कर रहा है — ताकि एक अधिक अस्थिर दुनिया में प्रासंगिक बना रह सके। क्या ये सुधार गहरे आर्थिक मंदी को रोकने के लिए पर्याप्त होंगे, यह एक खुला प्रश्न है।