हॉरमुज जलडमरूमध्य में संकट (ईरान-अमेरिका संघर्ष): अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद हॉरमुज जलडमरूमध्य से शिपिंग लगभग ठप हो गई, जिससे फारस की खाड़ी से रिफ़ाइंड उत्पादों का निर्यात लगभग 3.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन कम हो गया । हालांकि जून के अंत तक जलडमरूमध्य आंशिक रूप से फिर से खुल गया, लेकिन सप्लाई चेन में उलझनें बनी रहीं
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रूस का डीज़ल निर्यात प्रतिबंध: रूस ने डीज़ल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसके बाद यूरोपीय डीज़ल रिफ़ाइनिंग मार्जिन 60 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया ।
यूक्रेनी ड्रोन हमले: यूक्रेन की ओर से रूसी रिफाइनरियों पर लगातार ड्रोन हमलों ने डीज़ल, पेट्रोल और जेट फ्यूल के निर्यात को लगभग ठप कर दिया, और रूस को कुछ उत्पादों का शुद्ध आयातक बनने पर मजबूर कर दिया। यह लगभग 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन का सप्लाई शॉक था ।
क्षमता की कमी: 2023 के बाद से दुनिया भर में लगभग 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन की रिफ़ाइनिंग क्षमता स्थायी रूप से बंद हो चुकी थी, जिससे सिस्टम में किसी भी झटके को झेलने की कोई अतिरिक्त क्षमता नहीं बची थी ।
एशियाई रिफ़ाइनिंग मार्जिन 2022 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए, जिसकी मुख्य वजह हॉरमुज से सप्लाई में व्यवधान था ।
भारतीय रिफाइनरों को भी इसी वैश्विक तूफान से फायदा हुआ, लेकिन तस्वीर पूरी तरह से एक जैसी नहीं है:
निष्कर्ष: जुलाई 2026 के रिकॉर्ड क्रैक स्प्रेड तीन बड़े सप्लाई शॉक - हॉरमुज में व्यवधान, रूस का डीज़ल निर्यात प्रतिबंध और यूक्रेनी हमले - के साथ-साथ लंबे समय से चली आ रही क्षमता में कमी के कारण आए। अमेरिकी रिफाइनरों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ, जबकि भारतीय रिफाइनरों के मुनाफे पर घरेलू मूल्य नियंत्रण और विंडफॉल टैक्स ने कुछ असर डाला ।