ये चारों श्वेत बौने पोस्ट-कॉमन-एनवलप बाइनरी में पाए गए। यह एक प्रकार का निकट द्विआधारी तंत्र है जिसमें श्वेत बौना और एक कम द्रव्यमान वाला लाल बौना एक दूसरे की परिक्रमा करते हैं, और यह वही क्षेत्र है जो कभी एक विशाल तारे का बाहरी आवरण हुआ करता था । लाल बौने साथी दृश्य प्रकाश में बहुत बड़े और अधिक चमकीले होते हैं, जो छोटे श्वेत बौनों को पूरी तरह से ढक लेते हैं। हालांकि खगोलविदों ने पहले इन तंत्रों में गुरुत्वाकर्षण के कारण होने वाले डगमगाहट का पता लगा लिया था - जो एक अदृश्य विशाल साथी का संकेत है - लेकिन श्वेत बौनों को सीधे देखा या स्पेक्ट्रोस्कोपिक रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी थी ।
| गुण | विवरण |
|---|---|
| दूरी | लगभग 65 प्रकाश-वर्ष (20 पारसेक) के भीतर |
| तारकीय प्रकार | प्रत्येक श्वेत बौना एक कम द्रव्यमान वाले लाल बौने तारे से जुड़ा है |
| छिपने का कारण | लाल बौने, श्वेत बौनों की तुलना में दृश्य प्रकाश में कहीं अधिक चमकीले होते हैं |
| खोज की विधि | हबल का अल्ट्रावॉयलेट स्पेक्ट्रोग्राफ श्वेत बौने के यूवी उत्सर्जन को अलग करता है |
श्वेत बौने बेहद गर्म होते हैं - अक्सर 100,000°C से अधिक - और पराबैंगनी (यूवी) किरणों में जोरदार उत्सर्जन करते हैं। इसके विपरीत, लाल बौने यूवी में मंद होते हैं। टीम ने हबल के अल्ट्रावॉयलेट स्पेक्ट्रोग्राफ का उपयोग करके दोनों संकेतों को अलग किया। इस तकनीक के लिए विशेष अंशांकन की आवश्यकता थी क्योंकि लाल बौनों में होने वाले विस्फोट (फ्लेयर) श्वेत बौने के संकेत की नकल कर सकते हैं । स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी के एक्स-रे डेटा ने श्वेत बौनों की उपस्थिति की और पुष्टि प्रदान की ।
G 203‑47 अब सूर्य का नौवां सबसे निकटतम ज्ञात श्वेत बौना है, लेकिन यह सभी अपेक्षाओं को धता बताता है । एक सामान्य निकट द्विआधारी तंत्र में, गुरुत्वाकर्षणीय ज्वार तारों को अपनी कक्षा के साथ तालमेल बिठाकर घूमने के लिए मजबूर करते हैं - ठीक वैसे ही जैसे चंद्रमा हमेशा पृथ्वी की ओर एक ही मुख दिखाता है। लेकिन यहां ऐसा नहीं है।
| गुण | मान |
|---|---|
| दूरी | 25 प्रकाश-वर्ष |
| लाल बौने की परिक्रमा अवधि | 14.9 दिन |
| लाल बौने की घूर्णन अवधि | >100 दिन |
| एक्स-रे उत्सर्जन | अपेक्षा से कहीं कमजोर |
यह लाल बौना हर 14.9 दिनों में एक परिक्रमा पूरी करता है, लेकिन अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में 100 दिन से अधिक का समय लेता है - यानी यह ज्वारीय रूप से लॉक नहीं है। टीम का सुझाव है कि G 203‑47 ने अपने जैसे अन्य द्विआधारी तंत्रों की तुलना में एक अधिक सौम्य और छोटा 'कॉमन-एनवलप' चरण अनुभव किया है, जिसने इसे इस असामान्य अतुल्यकालिक अवस्था में छोड़ दिया। अप्रत्याशित रूप से कमजोर एक्स-रे संकेत भी एक धीमी गति से घूमने वाले, चुंबकीय रूप से शांत लाल बौने की ओर इशारा करता है ।
शोधकर्ताओं ने जनसंख्या मॉडल चलाए, जिन्होंने भविष्यवाणी की कि 20 पारसेक के भीतर लगभग चार से पांच ऐसे निकट परिक्रमा करने वाले श्वेत बौने-लाल बौने द्विआधारी तंत्र मौजूद होने चाहिए। टीम को ठीक चार मिले, जो "सैद्धांतिक कार्य के अनुरूप" है । इससे पता चलता है कि सूर्य के तत्काल पड़ोस में इन विशिष्ट पोस्ट-कॉमन-एनवलप बाइनरी की जनगणना अब लगभग पूरी हो गई है, हालांकि यह कार्य अधिक दूरी पर या व्यापक पृथक्करण वाले अन्य प्रकार के छिपे हुए श्वेत बौने द्विआधारी तंत्रों की संभावना को खारिज नहीं करता है ।