17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 60 दिन का युद्धविराम समझौता (MoU) एक महीने के भीतर ही ध्वस्त हो गया है। दोनों देशों के बीच खाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य हमले और जवाबी कार्रवाइयां हुई हैं। ईरान ने हुर्मुज जलडमरूमध्य को 'अगली सूचना तक' बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर खतरा मंडरा रह...

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अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष ने एक बार फिर भयानक रूप ले लिया है। 17 जून 2026 को हुए युद्धविराम समझौते को एक महीने भी नहीं बीते थे कि वह ध्वस्त हो गया। इसके बाद खाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य हमले हुए, ईरान ने हुर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया और इजरायल ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर उसने हमला किया तो उसे 'बहुत शक्तिशाली' जवाब मिलेगा। शांति वार्ता की संभावनाएं अब धुंधली नजर आ रही हैं। आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के अनुसार, वार्ताकारों के सामने अब अंतिम समझौते तक पहुंचने में 'बड़ी बाधाएं' हैं ।
अमेरिका और ईरान ने 17 जून 2026 को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाना और 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को खत्म करने की रूपरेखा तैयार करना था । यह समझौता हुर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और इसे फिर से खोलने पर केंद्रित था
। लेकिन, 19 जून तक ईरानी अधिकारी बातचीत से पीछे हट गए। उनका आरोप था कि इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले कर समझौते का उल्लंघन किया है
। युद्धविराम तब और कमजोर पड़ गया जब ईरान ने हुर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन हमले किए, जिसे राष्ट्रपति ट्रम्प ने 'मूर्खतापूर्ण उल्लंघन' बताया
। 8 जुलाई को, जब ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, तो ट्रम्प ने इस समझौते को 'खत्म' घोषित कर दिया
। 10 जुलाई को ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा, 'युद्धविराम खत्म हो गया है!', हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत जारी रहेगी
। 14 जुलाई तक यह आकलन किया जाने लगा कि ट्रम्प ने एक महीने से भी कम समय में MoU के सभी प्रमुख प्रावधानों को पलट दिया है, जिससे दोनों देश युद्धविराम-पूर्व की स्थिति में लौट गए हैं
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हुर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की करीब एक-पांचवीं तेल आपूर्ति होती है और यह संघर्ष का केंद्र बिंदु रहा है। अप्रैल की शुरुआत तक ही यहां समुद्री यातायात सामान्य स्तर से 10% से भी नीचे आ गया था । 7 जुलाई को अमेरिकी नेतृत्व वाले नौसैनिक गठबंधन ने खतरे के स्तर को 'गंभीर' कर दिया और चेतावनी दी कि ईरान द्वारा 'जानबूझकर शत्रुतापूर्ण कार्रवाई' की 'संभावना' है
। 11 जुलाई को IRGC ने एक जहाज पर हमले के बाद जलडमरूमध्य को 'अगली सूचना तक बंद' घोषित कर दिया और किसी भी जवाबी कार्रवाई पर 'कड़ी प्रतिक्रिया' की चेतावनी दी
। 12 जुलाई को IRGC ने पारगमन का प्रयास कर रहे एक अन्य जहाज पर चेतावनी के तौर पर गोली चलाई और फिर से बंद होने की बात दोहराई। इसके बाद व्यापारिक जहाजों का यातायात रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया - एक दिन में केवल 14 व्यापारिक जहाजों ने इस मार्ग को पार किया
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इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस संघर्ष के दौरान कई बार कड़ी चेतावनी दी है:
इजरायल ने पूरे संघर्ष के दौरान तैयारी की स्थिति बनाए रखी है। 2026 की शुरुआत में नेतन्याहू ने ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले के लिए ट्रम्प को मनाने की कोशिश की थी । मार्च तक, NYT ने बताया कि इजरायल युद्धविराम से पहले ईरान को जितना हो सके, उतना कड़ा झटका देने की कोशिश कर रहा था
। अप्रैल में नेतन्याहू ने कहा था कि इजरायल किसी भी समय ईरान के खिलाफ 'फिर से युद्ध में उतरने' के लिए तैयार है
। 9 जुलाई को नेतन्याहू ने ईरान पर अमेरिकी हमलों के बारे में ट्रम्प से सीधे बात की, जब व्हाइट हाउस एक लंबी उग्रता के लिए तैयार हो रहा था
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कूटनीतिक संभावनाएं बेहद अनिश्चित हैं और फिलहाल धुंधली दिख रही हैं। जबकि 17 जून के MoU ने परमाणु वार्ता को फिर से शुरू करने का रास्ता दिखाया था , यह समझौता पारस्परिक उल्लंघनों के आरोपों के बीच कुछ ही हफ्तों में ध्वस्त हो गया
। एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल जुलाई के मध्य में मध्यस्थों के माध्यम से अप्रत्यक्ष बातचीत जारी रखने के लिए ओमान गया था, उसी समय जब अमेरिका और हमले कर रहा था
। हालांकि, आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन का आकलन है कि अंतिम समझौते के लिए वार्ताकारों के सामने 'महत्वपूर्ण बाधाएं' हैं, क्योंकि बातचीत के साथ-साथ लड़ाई भी जारी है
। सीएफआर का वैश्विक संघर्ष ट्रैकर नोट करता है कि युद्धविराम 'ध्वस्त होने के कगार पर' है, क्योंकि दोनों पक्ष कथित उल्लंघनों के लिए एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं
। 14 जुलाई तक, पर्यवेक्षकों का निष्कर्ष है कि दोनों देश 'MoU से पहले वाली संघर्ष की स्थिति में लौट गए हैं'
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17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 60 दिन का युद्धविराम समझौता (MoU) एक महीने के भीतर ही ध्वस्त हो गया है।
17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 60 दिन का युद्धविराम समझौता (MoU) एक महीने के भीतर ही ध्वस्त हो गया है। दोनों देशों के बीच खाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य हमले और जवाबी कार्रवाइयां हुई हैं।
ईरान ने हुर्मुज जलडमरूमध्य को 'अगली सूचना तक' बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।