शैडो फ्लीट टैंकरों पर हमले। जुलाई की शुरुआत में यूक्रेन ने हमले और तेज़ कर दिए। उसने क्रीमिया को ईंधन पहुंचाने वाले एक दर्जन से ज़्यादा रूसी 'शैडो फ्लीट' टैंकरों पर हमला किया, जिसमें 7 जुलाई को एक ऑपरेशन में आठ जहाज़ों को निशाना बनाया गया । 10 जुलाई तक यूक्रेन के ड्रोन कमांडर ने कहा कि आज़ोव सागर में 14 रूसी जहाज़ों को मार गिराया गया है, जिससे पिछले 96 घंटों में निशाना बनाए गए जहाज़ों की कुल संख्या 35 हो गई
। इसने प्रभावी रूप से ईंधन के समुद्री आपूर्ति मार्ग को काट दिया।
नतीजा: ईंधन राशनिंग और आपातकाल। 21 जून तक पूरे क्रीमिया में ईंधन स्टेशनों ने आम लोगों और व्यवसायों को ईंधन की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी । क्यूआर कोड-आधारित राशनिंग शुरू की गई, जिसे बार-बार सख्त किया गया — पहले नकद लेन-देन सीमित किया गया, फिर नए कूपन का वितरण रोक दिया गया
। 26 जून को रूस-समर्थित अधिकारियों ने पूरे प्रायद्वीप में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी
।
जुलाई के दूसरे हफ्ते में यह संकट अपने चरम पर पहुंच गया:
ईंधन और परिवहन। पेट्रोल आम जनता के लिए लगभग अनुपलब्ध है। एक निवासी ने बीबीसी को बताया: "पेट्रोल पंप पर तो है, लेकिन वे बेच नहीं रहे हैं" । एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि उसने साइकिल चलाना शुरू कर दिया है
। काम पर आना-जाना और किराने का सामान खरीदना बेहद मुश्किल हो गया है, और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है
।
व्यावसायिक बंदी और नष्ट हुई गर्मियों की अर्थव्यवस्था। क्रीमिया का गर्मियों का पर्यटन सीज़न — जो स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक मुख्य आधार है — बुरी तरह चरमरा गया है। ईंधन स्टेशनों ने व्यवसायों को बिक्री निलंबित कर दी । बच्चों के समर कैंप और मनोरंजक गतिविधियों को सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया
। दुकानों में स्टॉक कम हो गया है, और खाद्य आपूर्ति बाधित हो गई है। जुलाई की शुरुआत तक क्रीमिया में सभी होटल बुकिंग में से 79% रद्द कर दी गई थी
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भोजन और पानी की कमी। बिजली कटौती के बाद पानी की कटौती होती है क्योंकि पंपिंग स्टेशन बिजली खो देते हैं। निवासियों ने बताया कि बुनियादी किराने की खरीदारी भी एक दैनिक चुनौती बन गई है । आरएफई/आरएल की एक रिपोर्ट ने इसे "न गैस, न लाइट, न कम्युनिकेशन, न पर्यटक" कहकर सारांशित किया
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नागरिक हताहत। 21 जून को क्रीमिया पर एक यूक्रेनी ड्रोन हमले में चार लोग मारे गए और 28 घायल हो गए, रूस-समर्थित गवर्नर के अनुसार । 6 जुलाई के हमलों में एक महिला की मौत हो गई जिससे पूरे प्रायद्वीप में ब्लैकआउट हो गया
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सैन्य प्रभाव। ईंधन की कमी इतनी गंभीर है कि क्रीमिया और खेरसॉन क्षेत्र में रूसी मोबाइल वायु रक्षा इकाइयां फंस गई हैं — वे हिल भी नहीं सकतीं, पक्षपातपूर्ण समूह ATESH के अनुसार ।
जून के अंत में: "कुछ कमी है, लेकिन गंभीर नहीं।" 28 जून को पुतिन ने पहली बार रूसी राज्य टेलीविजन पर स्वीकार किया कि यूक्रेन के हमले ईंधन की कमी पैदा कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थिति "गंभीर नहीं है" और कहा कि रूस अधिक ईंधन का आयात करेगा और मरम्मत में तेजी लाएगा । क्रेमलिन के प्रचारक पावेल ज़रुबिन ने भी इसी लाइन को दोहराया
।
जुलाई के मध्य में: 'सममित' सैन्य धमकी। 13 जुलाई तक, 'एवरीथिंग फॉर विक्ट्री' पीपुल्स फ्रंट फोरम में पुतिन का लहजा सख्त हो गया था। उन्होंने यूक्रेन को युद्ध बढ़ाने की धमकी दी, दावा किया कि रूस की प्रतिक्रिया 'सममित' होगी — जो यूक्रेनी बुनियादी ढांचे पर हमलों का संकेत देती है — और चेतावनी दी कि दुश्मन इसे 'बढ़ते पैमाने पर' महसूस करेगा ।
व्यापक रूसी स्वीकारोक्ति। रूस के उप प्रधान मंत्री ने 10 जुलाई को पुष्टि की कि यूक्रेनी हमलों ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर पूरे रूस में पेट्रोल की कमी पैदा कर दी है, और रूस अब आपातकालीन ईंधन आयात की मांग कर रहा है ।
क्रीमिया 2014 में कब्जे के बाद से अपने सबसे गंभीर ऊर्जा और मानवीय संकट से गुज़र रहा है। यूक्रेन के ड्रोन अभियान ने सड़क, रेल और समुद्री ईंधन आपूर्ति लाइनों को सफलतापूर्वक काट दिया है, जिससे पूरे प्रायद्वीप में ब्लैकआउट, पानी की कमी, ईंधन राशनिंग, व्यवसायों और शिविरों के बंद होने और नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पुतिन का सार्वजनिक संदेश संकट को कम करके आंकने से लेकर सीधे सैन्य वृद्धि की धमकी देने तक बदल गया है — यह एक संकेत है कि क्रेमलिन को प्रायद्वीप की रक्षा या पुन: आपूर्ति करने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है। निवासियों को दैनिक जीवन में ईंधन की कमी, अविश्वसनीय बिजली और पानी, खाली दुकानें और कोई स्पष्ट अंत नज़र नहीं आ रहा है ।