EY Parthenon के नए अध्ययन के मुताबिक, चीन पर निर्भरता खत्म करने के लिए अमेरिका, यूरोज़ोन और ब्रिटेन को अगले 25 वर्षों (2050 तक) में 23.6 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त निवेश करना होगा [5][6][8][12]। यह राशि हर साल लगभग 940 बिलियन डॉलर के बराबर है। सबसे ज्यादा बोझ अमेरिका पर पड़ेगा, जिसे 13.7 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने होंगे...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Search & fact-check with cited sources for What is the estimated cost and economic impact of decoupling Western economies from China, as det. Article summary: Here is the fact-checked summary based on EY-Parthenon's study published Monday, July 13, 2026, and reported first by the Financial Times.. Topic tags: general, government, general web, user generated, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clickbait thumbnails, icons, and tiny thumbnail
चीन के साथ आर्थिक संबंध तोड़ने की कीमत कितनी हो सकती है? एक नए बड़े अध्ययन ने इसका सटीक आंकड़ा पेश किया है। EY-Parthenon की इस स्टडी के मुताबिक, पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं को चीन पर अपनी निर्भरता खत्म करने के लिए अगले 25 सालों में 23.6 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने होंगे ।
EY-Parthenon के अर्थशास्त्री मैट्स पर्सन के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में उन नई सप्लाई चेन, विनिर्माण क्षमता, अनुसंधान बुनियादी ढांचे और सॉफ्टवेयर सिस्टम के निर्माण की लागत का अनुमान लगाया गया है, जो फिलहाल चीन पर निर्भर हैं। यह शोध आर्थिक सुरक्षा और व्यापार अंतर्निर्भरता पर चल रही गरमागरम बहस में एक अहम मानक साबित होगा।
अध्ययन के अनुसार, अमेरिका, यूरोज़ोन के देशों और ब्रिटेन को 2050 तक प्रमुख उद्योगों में चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए अतिरिक्त 23.6 ट्रिलियन डॉलर का निवेश करना होगा । यह लगभग हर साल 940 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त निवेश के बराबर है
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यह बोझ अलग-अलग देशों पर इस तरह बंटा हुआ है:
अमेरिका के आंकड़े को समझने के लिए एक उदाहरण देखें: यह लगभग हर साल एक 'इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट' पारित करने के बराबर है । वहीं, यूरोपीय संघ के लिए यह वार्षिक लागत लगभग पूरे ब्लॉक के बजट को दोगुना करने के बराबर होगी
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इस विश्लेषण का एक मुख्य निष्कर्ष यह है कि डी-कपलिंग की प्रक्रिया खुद कीमतों पर लगातार ऊपर की ओर दबाव बनाएगी। अध्ययन ने चेतावनी दी है कि इससे मुद्रास्फीति कुछ परिदृश्यों में 2.5 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकती है, क्योंकि उत्पादन चीन की सस्ती सप्लाई चेन से बाहर ले जाने पर विनिर्माण लागत काफी बढ़ जाएगी ।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप में, अगर चीन की सप्लाई चेन पर निर्भरता तेजी से कम की जाती है, तो प्रमुख उद्योगों के उत्पादों की कीमतें 1% से 2.5% तक बढ़ सकती हैं। विश्लेषण के अनुसार, इससे यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड के लिए अपने 2% मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल करना संरचनात्मक रूप से कठिन हो सकता है ।
EY-Parthenon का अध्ययन स्पष्ट रूप से दो नीतिगत दृष्टिकोणों के बीच अंतर करता है, जिन्हें अक्सर एक ही समझ लिया जाता है :
पूर्ण डी-कपलिंग: यह चीनी सप्लाई चेन से पूरी तरह और कठोरता से अलग होना है। 23.6 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा इसी चरम परिदृश्य को दर्शाता है, जिसमें बुनियादी ढांचे, अनुसंधान एवं विकास, सॉफ्टवेयर, विनिर्माण और रसद जैसे हर तत्व को शून्य से दोहराना होगा।
'डी-रिस्किंग': यह एक अधिक लक्षित रणनीति है जिसे यूरोपीय नेता पसंद करते हैं और यह यूरोपीय संघ की आधिकारिक नीति में भी दिखती है। इसका उद्देश्य सभी आर्थिक संबंधों को खत्म करने के बजाय केवल कुछ रणनीतिक क्षेत्रों में निर्भरता कम करना है। जैसा कि 2024 के यूरोपीय संसद के एक अध्ययन में दर्ज है, यूरोपीय नीति निर्माताओं ने लगातार 'डी-कपलिंग नहीं, बल्कि डी-रिस्किंग' पर जोर दिया है । EY-Parthenon के विश्लेषण का तात्पर्य है कि डी-रिस्किंग की लागत काफी कम होगी, हालांकि रिपोर्ट जोखिम के चरम स्तर को मापने के लिए पूर्ण डी-कपलिंग परिदृश्य पर ध्यान केंद्रित करती है
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EY-Parthenon के विश्लेषण ने चार ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है जिन्हें सप्लाई चेन की नकल करने का सबसे ज्यादा खर्च उठाना पड़ेगा :
अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक अलग विश्लेषण ने भी आईसीटी और क्लाउड टेक्नोलॉजी तथा रक्षा संबंधी तकनीक के साथ इन्हीं क्षेत्रों को सप्लाई चेन में व्यवधान के लिए सबसे संवेदनशील बताया है । यूरोपीय आयोग और अमेरिका ने भी सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, बैटरी और क्रिटिकल मटेरियल को अत्यधिक संकेंद्रित सप्लाई चेन वाले रणनीतिक क्षेत्रों के रूप में पहचाना है
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EY-Parthenon का अध्ययन ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश पहले से ही चीन पर निर्भरता कम करने के प्रयासों में जुटे हैं।
अमेरिकी क्रिटिकल मिनरल और सेमीकंडक्टर खर्च: अमेरिका ने इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट और CHIPS एक्ट के माध्यम से घरेलू क्रिटिकल मिनरल प्रसंस्करण, बैटरी सप्लाई चेन और सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए लगभग 30 बिलियन डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है ।
ईयू के व्यापार रक्षा उपाय: चीन से आयात पर निर्भरता को प्रबंधित करने के लिए पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं द्वारा व्यापार रक्षा उपकरणों के उपयोग के व्यापक पैटर्न को दर्शाते हुए, यूरोपीय संघ ने चीनी बतख आयात पर एक नई एंटी-डंपिंग जांच शुरू की है । इसके अलावा, ईयू ने पिछले कुछ वर्षों में चीनी सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों पर एंटी-डंपिंग शुल्क भी लगाए हैं
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ट्रांसअटलांटिक सहयोग: अप्रैल 2026 में, अमेरिका और ईयू ने क्रिटिकल मिनरल्स पर एक समझौता किया, जिसे विशेष रूप से सप्लाई चेन पर चीन की पकड़ को कमजोर करने के लिए डिज़ाइन किया गया था । स्वीडिश डिफेंस रिसर्च एजेंसी की एक रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि सेमीकंडक्टर और ग्रीन टेक्नोलॉजी में इस्तेमाल होने वाले क्रिटिकल कच्चे माल के लिए ईयू की चीन पर काफी आयात निर्भरता है, जिससे यह व्यापार प्रवाह में हेरफेर के प्रति गंभीर रूप से संवेदनशील है
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अनुमानित लागत का इतना बड़ा आंकड़ा वैश्विक सप्लाई चेन में चीन के गहरे एकीकरण के कारण है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्माता, शीर्ष निर्यातक और क्रिटिकल कच्चे माल का प्रमुख प्रसंस्कर्ता है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने अलग से नोट किया है कि 2009 के बाद से निर्यात प्रतिबंधों के तहत आने वाले महत्वपूर्ण इनपुट की संख्या पांच गुना बढ़ गई है ।
जर्मन सेंट्रल बैंक के एक पिछले विश्लेषण में पाया गया था कि चीन से 'कोल्ड टर्की' (अचानक और पूर्ण) अलगाव के कारण जर्मनी को अल्पावधि में 5% से अधिक और दीर्घावधि में लगभग 1.5% का कल्याणकारी नुकसान हो सकता है । ECB ने यह भी नोट किया है कि डी-कपलिंग की लागत लंबी अवधि की तुलना में छोटी अवधि में लगभग पांच गुना अधिक होती है, जिससे अधिकांश देशों में उपभोक्ता कीमतों में वृद्धि होती है
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EY-Parthenon का अध्ययन पूर्ण डी-कपलिंग की स्पष्ट और विस्तृत कीमत पेश करता है: 25 वर्षों में 23.6 ट्रिलियन डॉलर, जिसमें से 13.7 ट्रिलियन डॉलर अकेले अमेरिका का हिस्सा है। यह 2.5 प्रतिशत अंक के मुद्रास्फीति जोखिम का संकेत देता है और फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स को सबसे संवेदनशील क्षेत्रों के रूप में पहचानता है। हालांकि पूर्ण डी-कपलिंग का आंकड़ा चौंका देने वाला है, यूरोपीय नेता अभी भी एक संकीर्ण 'डी-रिस्किंग' का रास्ता पसंद करते हैं, और अमेरिका और ईयू ने पहले ही इन्हीं क्षेत्रों में खर्च और व्यापार सुरक्षा उपाय शुरू कर दिए हैं।
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EY Parthenon के नए अध्ययन के मुताबिक, चीन पर निर्भरता खत्म करने के लिए अमेरिका, यूरोज़ोन और ब्रिटेन को अगले 25 वर्षों (2050 तक) में 23.6 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त निवेश करना होगा [5][6][8][12]।
EY Parthenon के नए अध्ययन के मुताबिक, चीन पर निर्भरता खत्म करने के लिए अमेरिका, यूरोज़ोन और ब्रिटेन को अगले 25 वर्षों (2050 तक) में 23.6 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त निवेश करना होगा [5][6][8][12]। यह राशि हर साल लगभग 940 बिलियन डॉलर के बराबर है। सबसे ज्यादा बोझ अमेरिका पर पड़ेगा, जिसे 13.7 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने होंगे [7][10][15]।
इस डी कपलिंग प्रक्रिया से मुद्रास्फीति में 2.5 प्रतिशत अंक तक की बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि चीन की सस्ती सप्लाई चेन छोड़ने पर उत्पादन लागत बढ़ जाएगी [7][8]।