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12 जुलाई, 2026 को नौसैनिक युद्ध के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया जब अमेरिका ने पहली बार युद्ध में मानवरहित सतही जहाजों (USV) को उतारा। तीन सारोनिक कोरसेयर ड्रोन — 24 फीट लंबी स्वायत्त नावें — ने ईरान के बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे पर एक पनडुब्बी और जहाज मरम्मत सुविधा पर हमला किया। यह हमला अमेरिकी हमलों की एक बड़ी लहर का हिस्सा था। आइए, इस ऑपरेशन, इसकी तकनीक और व्यापक रणनीतिक संदर्भ को विस्तार से समझते हैं।
12 जुलाई, 2026 को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने तीन सारोनिक कोरसेयर मानवरहित सतही जहाजों (USVs) का इस्तेमाल ईरान के बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे पर एक 'वन-वे अटैक' (आत्मघाती हमला) करने के लिए किया। इस हमले में एक पनडुब्बी और जहाज मरम्मत सुविधा को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया । सेंटकॉम ने पुष्टि की कि यह "अमेरिकी सेना द्वारा युद्ध में समुद्री ड्रोन का पहली बार इस्तेमाल" था
। यह ऑपरेशन अमेरिकी हमलों की एक व्यापक लहर का हिस्सा था, जिसमें लड़ाकू विमानों और हवाई ड्रोनों ने ईरान की वायु रक्षा प्रणालियों, तटीय रडार साइटों, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं, और IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की तेज़ गति वाली नावों को निशाना बनाया
।
घोषित उद्देश्य: होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक शिपिंग पर हमला करने की ईरान की क्षमता को कम करना ।
कोरसेयर एक 24 फीट लंबा स्वायत्त सतही जहाज है जिसकी निर्माता कंपनी और रक्षा नवाचार इकाई (DIU) द्वारा प्रकाशित विशिष्टताएं इस प्रकार हैं :
| विशेषता | मान |
|---|---|
| लंबाई | 24 फीट |
| अधिकतम गति | 35+ नॉट (लगभग 65 किमी/घंटा) |
| रेंज | 1,000+ समुद्री मील (लगभग 1,852 किमी) |
| पेलोड क्षमता | 1,000 पाउंड (लगभग 454 किग्रा) |
इसे मूल रूप से पेंटागन के रेप्लिकेटर कार्यक्रम के तहत डिज़ाइन किया गया था, जिसका उद्देश्य हजारों सस्ते और खर्च करने योग्य मानवरहित प्लेटफार्मों के झुंड तैनात करना है । सारोनिक को दिसंबर 2025 में तेजी से डिलीवरी के लिए $392 मिलियन का नौसेना उत्पादन अनुबंध मिला था
।
युद्धक हमले से ठीक एक महीने पहले, एक सारोनिक कोरसेयर ने एक बिल्कुल अलग मिशन में अपनी उपयोगिता साबित कर दी थी। 8-9 जून, 2026 की रात को, एक कोरसेयर यूएसवी ने अमेरिकी सेना के दो AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर चालक दल के सदस्यों को बचाया, जिन्हें ओमान के तट के पास, होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट मार गिराया गया था । सेंटकॉम ने इसे इस तरह का पहला अभियान बताया जहां किसी मानवरहित वाहन का उपयोग खोज और बचाव कार्य में किया गया
। ड्रोन ने गिराए गए पायलटों को ढूंढा, उन्हें अपने पतवार पर चढ़ने दिया, और उन्हें एक ऐसे स्थान पर पहुंचाया जहां से एक चालक दल वाला हेलीकॉप्टर उन्हें सुरक्षित उठा सके — पूरा बचाव अभियान लगभग दो घंटे में पूरा हुआ
। कई रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि अपाचे को ईरानी बलों ने मार गिराया था
।
अमेरिकी समुद्री ड्रोन हमले के अगले दिन, ईरान ने समन्वित मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए, जिनका निशाना खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े ठिकाने थे । कई खाड़ी देशों ने हमलों की सूचना दी, जो संघर्ष शुरू होने के बाद से सबसे बड़े जवाबी हमलों में से एक था:
IRGC ने विशेष रूप से कुवैत में अली अल-सलेम एयर बेस और अहमद अल-जाबेर एयर बेस, साथ ही बहरीन और जॉर्डन में सुविधाओं पर हमलों का दावा किया, और कहा कि पैट्रियट सिस्टम और ईंधन टैंक नष्ट कर दिए गए ।
12 जुलाई का समुद्री ड्रोन हमला अलग-थलग नहीं था। यह एक बड़े संघर्ष का हिस्सा था जो महीनों से बन रहा था:
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12 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेंटकॉम ने तीन सारोनिक कोरसेयर मानवरहित सतही जहाजों (USV) का इस्तेमाल कर ईरान के बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे पर हमला किया, जो अमेरिकी सेना द्वारा युद्ध में समुद्री ड्रोन का पहला प्रयोग था।
12 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेंटकॉम ने तीन सारोनिक कोरसेयर मानवरहित सतही जहाजों (USV) का इस्तेमाल कर ईरान के बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे पर हमला किया, जो अमेरिकी सेना द्वारा युद्ध में समुद्री ड्रोन का पहला प्रयोग था। 24 फीट लंबे ये कोरसेयर ड्रोन पेंटागन के 'रेप्लिकेटर' कार्यक्रम के तहत विकसित किए गए थे और 1,000 पाउंड का पेलोड ले जाने तथा 1,000 समुद्री मील तक की रेंज रखने में सक्षम हैं। इससे एक महीने पहले ही इन ड्रोनों ने ओमान के त...
ईरान ने अगले दिन (13 जुलाई) छह खाड़ी देशों (यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान और जॉर्डन) पर समन्वित मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे यह संघर्ष और बढ़ गया।