बाजार पर इस संकट का प्रभाव एक समान नहीं है। बाजार तेजी से दो हिस्सों में बंटता जा रहा है, जहां प्रीमियम ब्रांड्स अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि बजट पर केंद्रित कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
Apple — इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भी Apple ने Q2 2026 में अपने शिपमेंट में 3% की बढ़ोतरी दर्ज की। iPhone 16 और 17 सीरीज़ की मजबूत मांग और इसके प्रीमियम ग्राहक आधार ने, कीमतों के प्रति कम संवेदनशील होने के कारण, कंपनी को इस संकट से बचाए रखा ।
Samsung — काउंटरपॉइंट के अनुसार, सैमसंग ने भी बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया और Apple से वॉल्यूम के मामले में शीर्ष स्थान वापस हासिल कर लिया । सैमसंग सेमीकंडक्टर के माध्यम से इसकी एकीकृत DRAM/NAND आपूर्ति श्रृंखला इसे एक बड़ी लागत प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देती है।
Transsion (Tecno, Infinix, Itel), Xiaomi, और Honor — इन ब्रांडों को सबसे बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। ये कंपनियां एंट्री-लेवल और $150 (लगभग ₹12,500) से कम कीमत वाले फोनों पर निर्भर हैं। ऐसे उपकरणों में मेमोरी की लागत का कुल खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा होता है, जिससे मार्जिन पर भारी दबाव पड़ता है। इससे इन्हें या तो कीमत बढ़ानी पड़ रही है या फीचर्स में कटौती करनी पड़ रही है। कुछ विश्लेषकों को डर है कि $150 (लगभग ₹12,500) से सस्ते फोन पूरी तरह से गायब हो सकते हैं ।
Oppo और Vivo — इन ब्रांडों को भी शिपमेंट में महत्वपूर्ण कमी देखने को मिल रही है, हालांकि यह गिरावट पूरी तरह से बजट-केंद्रित ब्रांडों जितनी गंभीर नहीं है ।
संकट कितने समय तक? कई शोध फर्मों को उम्मीद है कि यह मेमोरी संकट 2027 तक जारी रहेगा। IDC का अनुमान है कि 2026 में DRAM और NAND की आपूर्ति में वृद्धि ऐतिहासिक मानदंडों से काफी कम, क्रमशः 16% और 17% रहेगी, जो मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है । काउंटरपॉइंट का अनुमान है कि यह कमी उद्योग को 2027 के अंत तक प्रभावित कर सकती है
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स्मार्टफोन की कीमतें कितनी बढ़ेंगी? कीमतों में सभी स्तरों पर तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।
संक्षेप में, स्मार्टफोन बाजार 2027 तक आपूर्ति-संचालित मंदी का सामना करेगा। इसका असर ध्रुवीकरणकारी होगा: Apple और जैसे प्रीमियम विक्रेता अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन करेंगे, जबकि बजट पर फोकस करने वाले चीनी और अफ्रीकी ब्रांड्स को बढ़ती मेमोरी लागत और घटती शिपमेंट का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।