रिपोर्टों से पता चलता है कि यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान की वायु रक्षा प्रणालियां सक्रिय हो गईं और आने वाले प्रोजेक्टाइल्स पर प्रतिक्रिया दी । कुछ खास इंटरसेप्शन:
मौजूदा स्रोतों में शनिवार के इस विशिष्ट हमले की निंदा करने वाले खाड़ी देशों के संयुक्त बयान या उद्धरण शामिल नहीं हैं। हालांकि, यह देखते हुए कि इन देशों ने अपनी वायु रक्षा प्रणालियों को सक्रिय किया (जो यह दर्शाता है कि वे प्रोजेक्टाइल्स को शत्रुतापूर्ण मानते हैं), और पिछली रिपोर्टों में खाड़ी देशों ने अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच "सभी लाल रेखाएं पार होने" की बात कही थी , यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वे इसे एक अस्वीकार्य उकसावे के रूप में देखते हैं। 11-12 जुलाई के हमलों पर सटीक राजनयिक भाषा के लिए अतिरिक्त खोज की आवश्यकता होगी।
ईरान की शनिवार की जवाबी कार्रवाई का सीधा कारण अमेरिकी सेना का एक बड़ा ऑपरेशन था। 11 जुलाई को, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घोषणा की कि उसने उस सप्ताह ईरान के खिलाफ अपनी तीसरी लहर पूरी कर ली है, जिसमें लगभग 140 ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया । इनमें मिसाइल साइटें, ड्रोन लॉन्च पोजीशन, नौसैनिक क्षमताएं और रडार/निगरानी प्रतिष्ठान शामिल थे
। अमेरिका ने कहा कि ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक कंटेनर जहाज पर ईरानी हमले के जवाब में किए गए थे, जिसमें जहाज में आग लग गई और एक चालक दल का सदस्य लापता हो गया
।
युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य एक केंद्रीय फ़्लैशपॉइंट रहा है:
युद्ध को समाप्त करने के लिए राजनयिक ढांचा इस्लामाबाद ज्ञापन (MoU) था, जिसे मुख्य रूप से पाकिस्तान ने कतर के सह-मध्यस्थता से तैयार किया था । मुख्य बिंदु:
इस राजनयिक ढांचे के बावजूद, युद्धविराम नाजुक साबित हुआ। 11 जुलाई को अमेरिकी हमले और छह खाड़ी देशों के खिलाफ ईरान की जवाबी कार्रवाई इस्लामाबाद प्रक्रिया में एक बड़ा विघटन है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज पर ईरानी हमले से शुरू हुआ ।