वील कॉर्नेल मेडिसिन, NYGC, हार्वर्ड और MGB के शोधकर्ताओं ने IDH म्यूटेंट ग्लियोमा के 36 नमूनों का अध्ययन किया। प्रगति के पीछे का तंत्र: DNA मिथाइलेशन का धीरे धीरे घटना (हाइपोमिथाइलेशन), जो कोशिकाओं को स्टेम सेल जैसी अवस्था में धकेलता है। ये स्टेम सेल जैसी कोशिकाएं अधिक तेज़ी से बढ़ती हैं, फैलती हैं और उपचार के प्रति...

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यह लेख IDH म्यूटेंट ग्लियोमा नामक मस्तिष्क कैंसर की प्रगति के पीछे के जैविक तंत्र और एक नए अध्ययन के निष्कर्षों पर आधारित है।
22 जून, 2026 को, वील कॉर्नेल मेडिसिन, न्यूयॉर्क जीनोम सेंटर (NYGC), हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और मास जनरल ब्रिघम (MGB) के शोधकर्ताओं ने नेचर जेनेटिक्स (Nature Genetics) में एक अध्ययन प्रकाशित किया । इस अध्ययन में IDH-म्यूटेंट ग्लियोमा (युवा वयस्कों में सबसे आम मस्तिष्क कैंसर) के 36 दीर्घकालिक (longitudinal) ट्यूमर नमूनों का विश्लेषण किया गया
।
शोधकर्ताओं ने एकल-कोशिका (single-cell), मल्टी-मोडैलिटी प्रोफाइलिंग तकनीक का उपयोग किया। इस तकनीक से वे एक ही कोशिका में DNA मिथाइलेशन, DNA उत्परिवर्तन (mutations) और जीन गतिविधि को एक साथ माप सके । यह पहली बार था जब IDH-ग्लियोमा की प्रगति को इतने विस्तृत, एकल-कोशिका स्तर पर देखा गया
।
यह अध्ययन दर्शाता है कि कैसे सिंगल-सेल मल्टीमॉडल प्रोफाइलिंग कैंसर के विकास को चलाने वाले एपिजेनेटिक कारकों का अभूतपूर्व विस्तार से पता लगा सकती है, और यह अन्य कैंसरों में उपचार प्रतिरोध और प्रगति का अध्ययन करने के लिए एक खाका प्रदान करती है ।
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वील कॉर्नेल मेडिसिन, NYGC, हार्वर्ड और MGB के शोधकर्ताओं ने IDH म्यूटेंट ग्लियोमा के 36 नमूनों का अध्ययन किया।
वील कॉर्नेल मेडिसिन, NYGC, हार्वर्ड और MGB के शोधकर्ताओं ने IDH म्यूटेंट ग्लियोमा के 36 नमूनों का अध्ययन किया। प्रगति के पीछे का तंत्र: DNA मिथाइलेशन का धीरे धीरे घटना (हाइपोमिथाइलेशन), जो कोशिकाओं को स्टेम सेल जैसी अवस्था में धकेलता है।
ये स्टेम सेल जैसी कोशिकाएं अधिक तेज़ी से बढ़ती हैं, फैलती हैं और उपचार के प्रति प्रतिरोधी होती हैं।