सबसे बड़ा कारण था रूस द्वारा डीज़ल निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध का ऐलान, जो 8 जुलाई से लागू हुआ और 31 जुलाई तक रहेगा । रूसी उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने राष्ट्रपति पुतिन के साथ एक टेलीविज़न बैठक में यह घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम "घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने" के लिए उठाया गया है
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यह प्रतिबंध यूक्रेनी ड्रोन हमलों का सीधा परिणाम था, जिन्होंने रूस की कई तेल रिफाइनरियों को नष्ट कर दिया था, जिससे देश में पेट्रोल की कमी और कीमतों में भारी उछाल आया । रूस पहले ही गैर-उत्पादकों (ईंधन व्यापारियों) के लिए आंशिक प्रतिबंध लगा चुका था; 8 जुलाई के आदेश ने इसे उत्पादकों तक भी बढ़ा दिया
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उसी दिन, कच्चे तेल की कीमतों में भी लगभग 7% का उछाल आया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए हमलों की धमकी देते हुए युद्ध विराम को समाप्त घोषित कर दिया । ब्रेंट क्रूड वायदा 6.6% बढ़कर $79.07 प्रति बैरल और WTI 6.1% बढ़कर $74.71 पर पहुंच गया
। इस भू-राजनीतिक जोखिम ने होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से बंद होने की आशंका बढ़ा दी, जहाँ से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति होती है
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रूस के प्रतिबंध से पहले ही वैश्विक डीज़ल बाजार पर भारी दबाव था। अमेरिकी डीज़ल क्रैक स्प्रेड (रिफाइनरी लाभप्रदता का एक माप) 26 जून को तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर $62.84 प्रति बैरल पर पहुंच गया था । यूरोपीय गैसॉयल वायदा में 13% की उछाल ने वैश्विक डिस्टिलेट संकट की गंभीरता को दर्शाया
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हालांकि यह संकट अमेरिकी बाजार में शुरू हुआ, लेकिन इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ता है। भारत अपनी डीज़ल ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। वैश्विक कीमतों में यह रिकॉर्ड उछाल भारत में डीज़ल की घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ा सकता है, जिससे परिवहन लागत बढ़ेगी और महंगाई को बढ़ावा मिलेगा। भारत में डीज़ल सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला ईंधन है और इसका उपयोग माल ढुलाई, कृषि और सार्वजनिक परिवहन में होता है।
अमेरिकी खुदरा डीज़ल की कीमतें 2026 की शुरुआत में पहले ही 62% बढ़कर $5.64 प्रति गैलन पर पहुंच गई थीं । 8 जुलाई की घटनाओं के बाद, डीज़ल की कीमतों में प्रति गैलन 40 सेंट से अधिक की वृद्धि की उम्मीद है, जिससे ट्रकिंग कंपनियों के संचालन मार्जिन पर और दबाव बढ़ सकता है
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8 जुलाई 2026 का दिन वैश्विक डीज़ल बाजार के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ। तीन अलग-अलग संकटों के एक साथ आने (रूस का प्रतिबंध, ईरान तनाव, और पहले से तंग आपूर्ति) ने कीमतों में ऐतिहासिक उछाल पैदा किया। यह उछाल 2022 के बाद का सबसे बड़ा था और उम्मीद है कि दबाव जल्दी कम नहीं होगा ।
महत्वपूर्ण सावधानियाँ और अनिश्चितताएं: