9 जुलाई को, क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि रूसी बुनियादी ढांचे पर यूक्रेन के हमले जारी रहने से मास्को को दोनों देशों के बीच 'बफर ज़ोन का क्षेत्र बढ़ाने' के लिए मजबूर होना पड़ेगा । यह बयान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा 3 जुलाई को जारी एक आदेश के बाद आया, जिसमें उन्होंने यूक्रेन में रूस के 'सुरक्षा क्षेत्र' (बफर ज़ोन) के आधिकारिक विस्तार का आदेश दिया था ।
पुतिन ने इस तर्क को स्पष्ट करते हुए कहा, 'दुश्मन रूस में नागरिक लक्ष्यों पर जितने अधिक हमले करने की कोशिश करेगा, हमें सटे इलाके में उतना ही बड़ा सुरक्षा क्षेत्र बनाना होगा' । पेसकोव ने 5 जुलाई को कहा कि बफर ज़ोन 'व्यवस्थित रूप से' बनाया जा रहा है और इसका विस्तार रूस की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सीमा तक किया जाएगा । दिसंबर 2025 और जुलाई 2026 की शुरुआत की रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि विस्तार विशेष रूप से यूक्रेन के उत्तर-पूर्वी खार्किव और सूमी क्षेत्रों को लक्षित करता है ।
जब वाशिंगटन के इस दृष्टिकोण के बारे में पूछा गया कि यूक्रेन द्वारा रूसी क्षेत्र पर गहरे हमले युद्ध को समाप्त करने में मदद कर सकते हैं, तो क्रेमलिन ने इसे खारिज कर दिया। पेसकोव ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका यह सोचकर 'गलत' है कि तनाव बढ़ाने से शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता खुल सकता है, और चेतावनी दी कि ऐसे हमले संघर्ष को लंबा खींचेंगे । पुतिन ने 3 जुलाई को अपनी टिप्पणी में इस तर्क को चक्रीय तरीके से रखा था: यूक्रेन द्वारा रूस पर गहरे हमले करने से 'सुरक्षा क्षेत्र का विस्तार होगा जिसे बनाना होगा' ।
क्रेमलिन गहरे हमलों के मुद्दे को सामरिक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से देखता है: उसका तर्क है कि रूसी बुनियादी ढांचे पर यूक्रेन के हमले न केवल आगे क्षेत्रीय विस्तार को उचित ठहराते हैं, बल्कि किसी भी बातचीत के समाधान को और दूर कर देते हैं ।
9 जुलाई को क्रेमलिन ने स्वयं €70 बिलियन के आंकड़े पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की। हालांकि, 7 जुलाई को शिखर सम्मेलन के पहले दिन, पेसकोव ने कहा कि रूस शिखर सम्मेलन के नतीजों पर बारीकी से नज़र रखेगा और सम्मेलन से पहले रूस के बारे में दिए गए बयानों को 'टकरावपूर्ण' बताया । 8 जुलाई को अपनाई गई शिखर सम्मेलन की घोषणा में रूस को यूरो-अटलांटिक सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक खतरा बताया गया और सहयोगियों ने यूक्रेन को निरंतर सैन्य सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई ।
8 जुलाई को पुतिन को अपनी लंबे समय से प्रतीक्षित फ़ोन कॉल करने के बजाय, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुरक्षा गारंटी के हिस्से के रूप में यूक्रेन के ऊपर आसमान बंद करने का प्रस्ताव रखा । इस कदम ने मास्को को चौंका दिया। पेसकोव ने 9 जुलाई को कहा कि यूक्रेन के आसमान को बंद करने का कोई भी कदम 'नाटो सैन्य कर्मियों के संघर्ष में शामिल होने के समान होगा' । उन्होंने कहा कि मॉस्को ने व्हाइट हाउस से 'पहले कभी ऐसा कुछ नहीं सुना' था और उसे ट्रंप के अप्रत्याशित बयान को 'पचाने' और उसका विश्लेषण करने के लिए समय चाहिए ।
क्रेमलिन ने छूटी हुई कॉल को कूटनीतिक अंदाज़ में टाल दिया: पेसकोव ने कहा कि ट्रंप 'स्पष्ट रूप से बहुत व्यस्त' थे । उन्होंने कहा, 'कल किसी ने फ़ोन नहीं किया।' और कहा कि पुतिन 'उनसे बात करके हमेशा खुश होते हैं' ।
चेतावनियों के बावजूद, क्रेमलिन बातचीत के लिए खुलेपन का संकेत देता रहा—लेकिन सख्त शर्तों के साथ। पेसकोव ने 4 जुलाई को दोहराया कि पुतिन यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मिलने को तैयार हैं, लेकिन केवल मास्को में । व्यापक रूप से, क्रेमलिन ने बार-बार कहा है कि पुतिन 'सभी' से बातचीत के लिए तैयार हैं, जिसमें यूरोपीय नेता भी शामिल हैं, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि ब्रुसेल्स को पहला कदम उठाना होगा और मास्को अल्टीमेटम के तहत बातचीत नहीं करेगा ।
पेसकोव ने मई के अंत में कहा, 'रूस बातचीत के लिए खुला है, और राष्ट्रपति पुतिन वार्ता में शामिल होने को तैयार हैं। हालांकि, यूरोपीय देश उस समझ की ओर बढ़ना शुरू ही कर रहे हैं' । क्रेमलिन ने यह भी पुष्टि की है कि पुतिन बिना किसी शर्त के फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं ।
शिखर सम्मेलन से पहले 6 जुलाई को, क्रेमलिन ने कहा था कि पुतिन और ट्रंप ने सप्ताहांत की कॉल में बात की थी और 'निकट भविष्य में' फिर से बात करने पर सहमत हुए थे । इस समझौते ने 8 जुलाई को एक संभावित कॉल की ओर इशारा किया। इसके बजाय, ट्रंप ने नो-फ़्लाई ज़ोन का प्रस्ताव रखा—एक ऐसा प्रस्ताव जिस पर क्रेमलिन ने कथित तौर पर वाशिंगटन के साथ कभी चर्चा नहीं की थी। पेसकोव ने पुष्टि की कि कॉल नहीं हुई और कहा कि क्रेमलिन ने निष्कर्ष निकाला कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पास अन्य काम थे । निर्धारित कॉल या तो स्थगित कर दी गई या ट्रंप के अपरंपरागत बयान ने इसे प्रभावी रूप से बदल दिया।
शिखर सम्मेलन के बाद क्रेमलिन के रुख को छह बिंदुओं में संक्षेपित किया जा सकता है:
9 जुलाई को, क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि रूसी बुनियादी ढांचे पर यूक्रेन के हमले जारी रहने से मास्को को दोनों देशों के बीच 'बफर ज़ोन का क्षेत्र बढ़ाने' के लिए मजबूर होना पड़ेगा । यह बयान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा 3 जुलाई को जारी एक आदेश के बाद आया, जिसमें उन्होंने यूक्रेन में रूस के 'सुरक्षा क्षेत्र' (बफर ज़ोन) के आधिकारिक विस्तार का आदेश दिया था ।
पुतिन ने इस तर्क को स्पष्ट करते हुए कहा, 'दुश्मन रूस में नागरिक लक्ष्यों पर जितने अधिक हमले करने की कोशिश करेगा, हमें सटे इलाके में उतना ही बड़ा सुरक्षा क्षेत्र बनाना होगा' । पेसकोव ने 5 जुलाई को कहा कि बफर ज़ोन 'व्यवस्थित रूप से' बनाया जा रहा है और इसका विस्तार रूस की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सीमा तक किया जाएगा । दिसंबर 2025 और जुलाई 2026 की शुरुआत की रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि विस्तार विशेष रूप से यूक्रेन के उत्तर-पूर्वी खार्किव और सूमी क्षेत्रों को लक्षित करता है ।
जब वाशिंगटन के इस दृष्टिकोण के बारे में पूछा गया कि यूक्रेन द्वारा रूसी क्षेत्र पर गहरे हमले युद्ध को समाप्त करने में मदद कर सकते हैं, तो क्रेमलिन ने इसे खारिज कर दिया। पेसकोव ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका यह सोचकर 'गलत' है कि तनाव बढ़ाने से शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता खुल सकता है, और चेतावनी दी कि ऐसे हमले संघर्ष को लंबा खींचेंगे । पुतिन ने 3 जुलाई को अपनी टिप्पणी में इस तर्क को चक्रीय तरीके से रखा था: यूक्रेन द्वारा रूस पर गहरे हमले करने से 'सुरक्षा क्षेत्र का विस्तार होगा जिसे बनाना होगा' ।
क्रेमलिन गहरे हमलों के मुद्दे को सामरिक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से देखता है: उसका तर्क है कि रूसी बुनियादी ढांचे पर यूक्रेन के हमले न केवल आगे क्षेत्रीय विस्तार को उचित ठहराते हैं, बल्कि किसी भी बातचीत के समाधान को और दूर कर देते हैं ।
9 जुलाई को क्रेमलिन ने स्वयं €70 बिलियन के आंकड़े पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की। हालांकि, 7 जुलाई को शिखर सम्मेलन के पहले दिन, पेसकोव ने कहा कि रूस शिखर सम्मेलन के नतीजों पर बारीकी से नज़र रखेगा और सम्मेलन से पहले रूस के बारे में दिए गए बयानों को 'टकरावपूर्ण' बताया । 8 जुलाई को अपनाई गई शिखर सम्मेलन की घोषणा में रूस को यूरो-अटलांटिक सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक खतरा बताया गया और सहयोगियों ने यूक्रेन को निरंतर सैन्य सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई ।
8 जुलाई को पुतिन को अपनी लंबे समय से प्रतीक्षित फ़ोन कॉल करने के बजाय, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुरक्षा गारंटी के हिस्से के रूप में यूक्रेन के ऊपर आसमान बंद करने का प्रस्ताव रखा । इस कदम ने मास्को को चौंका दिया। पेसकोव ने 9 जुलाई को कहा कि यूक्रेन के आसमान को बंद करने का कोई भी कदम 'नाटो सैन्य कर्मियों के संघर्ष में शामिल होने के समान होगा' । उन्होंने कहा कि मॉस्को ने व्हाइट हाउस से 'पहले कभी ऐसा कुछ नहीं सुना' था और उसे ट्रंप के अप्रत्याशित बयान को 'पचाने' और उसका विश्लेषण करने के लिए समय चाहिए ।
क्रेमलिन ने छूटी हुई कॉल को कूटनीतिक अंदाज़ में टाल दिया: पेसकोव ने कहा कि ट्रंप 'स्पष्ट रूप से बहुत व्यस्त' थे । उन्होंने कहा, 'कल किसी ने फ़ोन नहीं किया।' और कहा कि पुतिन 'उनसे बात करके हमेशा खुश होते हैं' ।
चेतावनियों के बावजूद, क्रेमलिन बातचीत के लिए खुलेपन का संकेत देता रहा—लेकिन सख्त शर्तों के साथ। पेसकोव ने 4 जुलाई को दोहराया कि पुतिन यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मिलने को तैयार हैं, लेकिन केवल मास्को में । व्यापक रूप से, क्रेमलिन ने बार-बार कहा है कि पुतिन 'सभी' से बातचीत के लिए तैयार हैं, जिसमें यूरोपीय नेता भी शामिल हैं, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि ब्रुसेल्स को पहला कदम उठाना होगा और मास्को अल्टीमेटम के तहत बातचीत नहीं करेगा ।
पेसकोव ने मई के अंत में कहा, 'रूस बातचीत के लिए खुला है, और राष्ट्रपति पुतिन वार्ता में शामिल होने को तैयार हैं। हालांकि, यूरोपीय देश उस समझ की ओर बढ़ना शुरू ही कर रहे हैं' । क्रेमलिन ने यह भी पुष्टि की है कि पुतिन बिना किसी शर्त के फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं ।
शिखर सम्मेलन से पहले 6 जुलाई को, क्रेमलिन ने कहा था कि पुतिन और ट्रंप ने सप्ताहांत की कॉल में बात की थी और 'निकट भविष्य में' फिर से बात करने पर सहमत हुए थे । इस समझौते ने 8 जुलाई को एक संभावित कॉल की ओर इशारा किया। इसके बजाय, ट्रंप ने नो-फ़्लाई ज़ोन का प्रस्ताव रखा—एक ऐसा प्रस्ताव जिस पर क्रेमलिन ने कथित तौर पर वाशिंगटन के साथ कभी चर्चा नहीं की थी। पेसकोव ने पुष्टि की कि कॉल नहीं हुई और कहा कि क्रेमलिन ने निष्कर्ष निकाला कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पास अन्य काम थे । निर्धारित कॉल या तो स्थगित कर दी गई या ट्रंप के अपरंपरागत बयान ने इसे प्रभावी रूप से बदल दिया।
शिखर सम्मेलन के बाद क्रेमलिन के रुख को छह बिंदुओं में संक्षेपित किया जा सकता है: