इन्फेंटिनो ने बाद में कहा कि उन्होंने ट्रंप को बताया था कि यह फैसला फीफा के स्वतंत्र न्यायिक निकायों द्वारा लिया जाएगा । इस फैसले के समय और अभूतपूर्व प्रकृति ने राजनीतिक हस्तक्षेप के व्यापक आरोप लगाए। कई मीडिया आउटलेट्स ने इसे 1962 के बाद पहली बार बताया जब फीफा ने किसी निलंबित खिलाड़ी को नॉकआउट मैच में खेलने की अनुमति दी ।
बालोगन प्रकरण से पहले, 5 दिसंबर 2025 को, इन्फेंटिनो ने वाशिंगटन डी.सी. में 2026 विश्व कप ड्रा के दौरान ट्रंप को पहला 'फीफा शांति पुरस्कार' प्रदान किया था । 8 दिसंबर 2025 को, लंदन स्थित मानवाधिकार संगठन FairSquare ने फीफा की नैतिकता समिति में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि इन्फेंटिनो ने फीफा आचार संहिता के अनुच्छेद 15 का बार-बार उल्लंघन किया है, जो राजनीतिक तटस्थता की मांग करता है ।
जून 2026 में, 50 यूरोपीय संसद सदस्यों (MEPs) ने फीफा की नैतिकता समिति को पत्र लिखकर 'अत्यधिक गति और ईमानदारी से इस जांच को आगे बढ़ाने' का आग्रह किया । नार्वेजियन फुटबॉल संघ ने भी जून 2026 की शुरुआत में इस मामले को फीफा की नैतिकता समिति के पास उठाया ।
बालोगन के प्रतिबंध को पलटे जाने के बाद, FairSquare ने मामले को और आगे बढ़ाया। 8-9 जुलाई 2026 के आसपास, FairSquare ने घोषणा की कि वह IOC नैतिकता आयोग में शिकायत दर्ज कराएगा, यह तर्क देते हुए कि इन्फेंटिनो के कार्यों ने ओलंपिक की राजनीतिक तटस्थता के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है । यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि फीफा एक IOC-मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघ है, जो इन नियमों से बंधा है ।
ट्रंप के वार्षिक वित्तीय खुलासे, जो 30 जून 2026 को प्रकाशित हुए, से पता चला कि इन्फेंटिनो ने ट्रंप को 2025 फीफा क्लब विश्व कप फाइनल के $15,000 मूल्य के 10 टिकट दिए थे । इसके अलावा, ट्रंप ने विश्व कप फाइनल सहित विभिन्न खेल आयोजनों के लगभग $120,000 के टिकट प्राप्त होने की भी अलग से सूचना दी । आलोचकों ने इसे 'कुछ लो, कुछ दो' का आयाम बताते हुए इन्फेंटिनो पर ट्रंप को लाभ पहुंचाने का पैटर्न बताया - एक शांति पुरस्कार, टिकट, और एक अनुकूल अनुशासनात्मक फैसला ।
इस फैसले का सीधा असर बेल्जियम पर पड़ा, जिसे राउंड ऑफ 16 में बालोगन का सामना करना था। कई रिपोर्टों में फीफा के इस फैसले के बाद 'लगभग हर कोने से गुस्सा और प्रतिक्रिया' का वर्णन किया गया । फीफा ने बालोगन के लाल कार्ड के प्रभाव को बहाल करने के लिए बेल्जियम की अपील को खारिज कर दिया । बेल्जियन फुटबॉल फेडरेशन को इस फैसले से 'स्तब्ध' बताया गया ।
इस विवाद ने कई प्रणालीगत चिंताएं उठाई हैं जो एक मैच से कहीं आगे तक जाती हैं: