10 अप्रैल 2026 को यूरोपीय आयोग (European Commission) ने एक नया प्रतिनिधि अधिनियम (Delegated Act 2026/2680) अपनाया ![]()
। इसके तहत, नवीकरणीय ऊर्जा निर्देश (RED II) के अनुसार सोयाबीन के तेल को उच्च अप्रत्यक्ष भू-उपयोग परिवर्तन (ILUC) जोखिम वाला फीडस्टॉक घोषित किया गया था। इसका मतलब था कि 2030 तक सोया-आधारित बायोफ्यूल को EU की नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों में गिना जाना धीरे-धीरे बंद हो जाता ![]()
। लेकिन जुलाई 2026 में यूरोपीय संसद (European Parliament) ने इस प्रतिनिधि अधिनियम को ब्लॉक करने के लिए वोट किया ![]()
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। विश्लेषकों के अनुसार, इस फैसले ने एक त्रिलेम्मा (trilemma) पैदा कर दिया है: EU कृषि की रक्षा, WTO में EU की कानूनी सुरक्षा को कमजोर करना, और जलवायु उद्देश्यों को कमजोर करना—इन तीनों में से कोई भी पूरी तरह से हासिल नहीं हो पाएगा।
संसद ने फेजआउट क्यों रोका?
संसद की ITRE समिति (उद्योग, अनुसंधान और ऊर्जा) ने इस अधिनियम को अस्वीकार करने की सिफारिश की, जिसे EPP और ECR राजनीतिक समूहों के आपत्ति प्रस्ताव का समर्थन प्राप्त था ![]()
। पूर्ण सत्र (plenary) में भी इसी के अनुरूप वोट हुआ ![]()
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। इसके मुख्य कारण थे:
- सामरिक चारा और प्रोटीन सुरक्षा: यूरोपीय बायोडीजल बोर्ड (EBB) और FEDIOL ने तर्क दिया कि यह वर्गीकरण पशु आहार के लिए आवश्यक सोया आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करेगा
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। EU पहले से ही अपने लगभग 70 प्रतिशत पादप प्रोटीन का आयात करता है, जिसमें से अधिकांश अमेरिका से सोया है। इस फेजआउट से यह निर्भरता और गहरी होने की चेतावनी दी गई।
- EU के सोया उत्पादकों को नुकसान: जर्मन तिलहन और प्रोटीन फसल संघ (UFOP) ने चेतावनी दी कि आयोग की योजना यूरोपीय सोया उत्पादन के विस्तार के लिए 'प्रतिउत्पादक' होगी
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- पद्धति विवाद: उद्योग समूहों ने आयोग की अद्यतन ILUC पद्धति के वैज्ञानिक आधार को चुनौती दी, इसे अन्य फीडस्टॉक के आकलन से असंगत बताया
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- WTO में नए विवादों से बचाव: आलोचकों ने चेतावनी दी कि जब पाम तेल के मामले में उसी पद्धति के खिलाफ WTO पहले ही फैसला दे चुका है, तब सोया को उच्च-ILUC जोखिम घोषित करना अर्जेंटीना, ब्राजील और अमेरिका से नए व्यापार विवादों को निमंत्रण देगा
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WTO अनुपालन के लिए परिणाम
WTO पैनल पहले ही दो मामलों में EU के पाम तेल उपायों पर फैसला सुना चुका था:
- मलेशिया का मामला (DS600): पैनल ने RED II के कानूनी ढांचे को बड़े पैमाने पर बरकरार रखा, लेकिन पाया कि प्रतिनिधि अधिनियम के डिजाइन और कार्यान्वयन के कुछ पहलू WTO नियमों के अनुरूप नहीं थे
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। EU को संरचना पर जीत मिली, लेकिन विशिष्ट भेदभावपूर्ण तत्वों को ठीक करने के लिए कहा गया।
- इंडोनेशिया का मामला (DS593): एक समान फैसले ने समग्र WTO अनुकूलता की पुष्टि की, लेकिन WTO नियमों के अनुरूप नहीं होने वाले विशिष्ट पहलुओं को उजागर किया
। इंडोनेशिया ने दावा किया कि EU ने पाम तेल-आधारित बायोफ्यूल के साथ भेदभाव किया
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सोया फेजआउट को रोककर, जबकि पाम तेल फेजआउट यथावत है, EU ने भेदभावपूर्ण व्यवहार का आभास दिया है: पाम तेल पर प्रतिबंध है, सोया पर नहीं। यह EU की कानूनी दलील (ILUC पद्धति वैज्ञानिक और गैर-भेदभावपूर्ण है) को कमजोर करता है ![]()
। ट्रांसपोर्ट एंड एनवायरनमेंट (T&E) का तर्क है कि संसद के इस फैसले ने EU की WTO रक्षा में 'सुराख' कर दिया है
। USDA विदेशी कृषि सेवा की रिपोर्ट के अनुसार, नई ILUC गणना में पाम तेल और सोयाबीन दोनों शामिल हैं ![]()
, जिसका अर्थ है कि संसद के अस्वीकार ने एक सीधी असंगति पैदा कर दी है।
व्यापार प्रतिशोध: इंडोनेशिया और मलेशिया
यह सबसे तात्कालिक परिणाम है:
- इंडोनेशिया ने पहले ही रियायतें निलंबित करने के लिए आवेदन कर दिया है: मार्च 2026 में, इंडोनेशिया ने WTO को सूचित किया कि वह पाम तेल विवाद पर EU से जवाबी व्यापार प्रतिबंध लगाने की मांग करेगा, EU द्वारा WTO फैसले का अनुपालन न करने का हवाला देते हुए
। व्यापार मंत्री बुडी संतोसो ने कहा कि यह प्रतिबंध वस्तुओं, सेवाओं और बौद्धिक संपदा के व्यापार को लक्षित करेगा
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- संभावित लागत बहुत बड़ी है: T&E का अनुमान है कि अकेले इंडोनेशिया को EU निर्यात पर प्रति वर्ष 5.6 अरब डॉलर से अधिक के जवाबी टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है
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। क्लीनटेक्निका (CleanTechnica) रिपोर्ट करता है कि संसद की 'भूल' EU को इस रेंज में प्रतिबंधों के लिए उजागर कर सकती है
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- मलेशिया भी अनुसरण कर सकता है: अपने मामले (DS600) में आंशिक निष्कर्ष जीतने के बाद, मलेशिया के पास भी अनुपालन में विफलता पर जवाबी कार्रवाई की मांग करने का अवसर है
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EU की घरेलू कृषि के लिए परिणाम
- EU के सोया उत्पादकों को अल्पकालिक राहत: UFOP ने वोट का स्वागत किया, यह तर्क देते हुए कि वैश्विक उच्च-ILUC वर्गीकरण यूरोपीय किसानों को घरेलू सोया उत्पादन बढ़ाने के प्रोत्साहन को कमजोर करता
। यह अस्वीकार EU में उगाए गए सोया के लिए बाजार को बायोफ्यूल फीडस्टॉक के रूप में संरक्षित करता है।
- रेपसीड और अन्य तिलहन उत्पादकों को लाभ: सोया बायोफ्यूल को पात्र रखने से, संसद मांग में अचानक बदलाव से बचती है जो EU के रेपसीड बायोडीजल उत्पादकों को प्रभावित करता
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- प्रोटीन सुरक्षा संबंधी चिंताएँ अनसुलझी रहीं: EU लगभग 70 प्रतिशत पादप प्रोटीन का आयात करता है, जिसमें से अधिकांश अमेरिका से सोया है। आलोचकों ने तर्क दिया कि सोया को डीक्लासीफाई करने से EU की प्रोटीन फीड आपूर्ति श्रृंखला खतरे में पड़ जाएगी
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। यह अस्वीकार अल्पकालिक राहत प्रदान करता है, लेकिन अंतर्निहित निर्भरता को हल नहीं करता।
- भोजन-बनाम-ईंधन बहस जारी: पर्यावरण समूहों (T&E, क्लीनटेक्निका) का तर्क है कि संसद का वोट उच्च-उत्सर्जन वाले फसल-आधारित बायोफ्यूल के निरंतर उपयोग को सुनिश्चित करता है, जो EU के जलवायु लक्ष्यों के विपरीत है
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मुख्य तनाव
संसद का यह निर्णय एक त्रिलेम्मा पैदा करता है: सोया फेजआउट को रोककर EU कृषि की रक्षा करता है और सोया निर्यातकों से तत्काल WTO दावों से बचता है, लेकिन यह साथ ही साथ पाम तेल WTO विवादों में अपनी कानूनी स्थिति को कमजोर करता है, इंडोनेशिया और मलेशिया को अरबों डॉलर की जवाबी कार्रवाई के लिए प्रोत्साहित करता है, और वनों की कटाई से जुड़े बायोफ्यूल पर EU की जलवायु महत्वाकांक्षा को कमजोर करता है। EU अब एक ऐसी पसंद के सामने है जहाँ वह एक साथ व्यापार, कृषि और जलवायु—तीनों को संतुष्ट नहीं कर सकता।