वैश्विक बाजारों में आई इस गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव था। उपलब्ध स्रोतों के अनुसार, दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाइयां अप्रैल 2024 में हुए संघर्ष विराम के बाद सबसे गंभीर स्तर पर पहुंच गई थीं।
8 जुलाई को तुर्की के अंकारा में चल रहे नाटो शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष विराम को खत्म करने की घोषणा कर दी। गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती ब्याज दरों की आशंकाओं के बीच अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट आई।
महत्वपूर्ण बात: कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर 80 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया और ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। लेकिन उपलब्ध स्रोत इन विशिष्ट आंकड़ों की पुष्टि नहीं करते हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड तेल 5% से अधिक उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया।
तेल की कीमतों में इस तेजी ने महंगाई बढ़ने और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका को हवा दे दी।
दक्षिण कोरिया के बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह AI से जुड़ी उम्मीदों पर ठंडा पानी पड़ना भी था। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK हाइनिक्स जैसे दिग्गज सेमीकंडक्टर शेयर कम से कम 6% तक गिर गए थे और विदेशी निवेशकों ने एक ही दिन में 3.5 ट्रिलियन वॉन (लगभग 2.3 बिलियन डॉलर) की बिकवाली कर दी थी। CNBC ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि दक्षिण कोरिया में यह गिरावट "वैश्विक निवेशकों की AI को लेकर बढ़ती शंका और बाजार में अत्यधिक संकेद्रता" की वजह से हुई।
यूरोपीय बाजार भी नहीं बचे
इस गिरावट का असर सिर्फ एशिया तक सीमित नहीं रहा। मिडिल ईस्ट के संकट के चलते यूरोपीय शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई और अमेरिकी बाजारों में भी नुकसान की उम्मीद जताई गई।