शोधकर्ताओं ने अपना ध्यान उन क्रोमोसोम (गुणसूत्र) क्षेत्रों पर केंद्रित किया जो ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट ट्यूमर में सबसे ज्यादा बदलाव से गुज़रते हैं। उन्होंने इन क्षेत्रों में मौजूद 3,700 से अधिक जीनों की जांच की । CRISPR-KOALA के दम पर उन्होंने पाया कि इनमें से 81 जीन ऐसे हैं जो सीधे तौर पर कैंसर को बढ़ावा देते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 90% जीन को पिछले बड़े पैमाने पर हुए कैंसर जीनोमिक्स अध्ययनों में पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया था ।
बेसल-लाइक ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (TNBC) स्तन कैंसर का सबसे आक्रामक प्रकार है। इसका कोई एस्ट्रोजन (ER), प्रोजेस्टेरोन (PR) या HER2 रिसेप्टर नहीं होता, जिसके कारण इसके लिए लक्षित दवाएं (टार्गेटेड थेरेपी) नहीं हैं और इसका इलाज सिर्फ कीमोथेरेपी तक सीमित है । यह बीमारी अक्सर युवा और प्री-मेनोपॉज़ल महिलाओं में पाई जाती है, जिससे यह और भी चिंताजनक हो जाती है।
यह खोज सिर्फ जीन खोजने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई गहरे मायने हैं:
कौन हैं वैज्ञानिक?
इस शोध के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. खालिद अल-ज़हरानी हैं। वह अब टोरंटो यूनिवर्सिटी के डोनली सेंटर में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं । इससे पहले वह लुनेनफेल्ड-टैनेनबाम रिसर्च इंस्टीट्यूट में पोस्टडॉक्टरल फेलो थे, जहाँ उन्होंने यह क्रांतिकारी तकनीक विकसित की थी ।
यह खोज इस बात का एक शानदार उदाहरण है कि कैसे उन्नत तकनीक और समर्पित शोध कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज के लिए नए रास्ते खोल सकते हैं। हालांकि दवा बनने और मरीजों तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है, लेकिन अब हमारे पास एक नक्शा है, और उस पर चलना पहले से कहीं ज्यादा आसान होगा।