यूरोपीय संसद में 'इन्हें वापस भेजो' के नारे: नए प्रवासन कानून के पारित होने के बाद हंगामा
यूरोपीय संसद ने 17 जून 2026 को रिटर्न रेगुलेशन को 418 मतों के मुकाबले 218 मतों से मंजूरी दी, जिसके बाद दक्षिणपंथी सांसदों ने 'इन्हें वापस भेजो' के नारे लगाए और वामपंथी सांसदों ने 'शर्म करो' का नारा लगाकर विरोध जताया। एमनेस्टी इंटरनेशनल फ्रांस ने कानून को 'बेतुका, क्रूर और भेदभावपूर्ण' बताया और चेतावनी दी कि यह हिरास...
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यूरोपीय संसद ने 17 जून 2026 को रिटर्न रेगुलेशन को 418 मतों के मुकाबले 218 मतों से मंजूरी दी, जिसके बाद दक्षिणपंथी सांसदों ने 'इन्हें वापस भेजो' के नारे लगाए और वामपंथी सांसदों ने 'शर्म करो' का नारा लगाकर विरोध जताया।
एमनेस्टी इंटरनेशनल फ्रांस ने कानून को 'बेतुका, क्रूर और भेदभावपूर्ण' बताया और चेतावनी दी कि यह हिरासत की शक्तियों का विस्तार करता है, ऑफशोर 'रिटर्न हब्स' की अनुमति देता है, और गैर रिफॉलमेंट के सिद्धांत को खतरे में डाल...
कम से कम दो यूरोपीय सांसदों फिनलैंड के सेबेस्टियन टिंकेनन और डेनमार्क के क्रिस्टोफर स्टॉर्म के खिलाफ कथित नस्लवादी टिप्पणियों और ऑनलाइन उत्पीड़न की जांच शुरू की गई है।
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17 जून 2026 को यूरोपीय संसद ने नए रिटर्न रेगुलेशन को मंजूरी दे दी - यह ईयू प्रवासन कानून में एक बड़ा बदलाव है जिसका उद्देश्य निर्वासन की प्रक्रिया को तेज करना है। यह 418 मतों के पक्ष और 218 मतों के विपक्ष में, 30 मतों के परहेज के साथ पारित हुआ । जैसे ही परिणाम घोषित हुआ, स्ट्रासबर्ग में संसद सत्र में दक्षिणपंथी और दूर-दराज़पंथी सांसदों ने "इन्हें वापस भेजो" के नारे लगाने शुरू कर दिए, और कुछ ने मुट्ठियाँ भी हिलाईं । जवाब में वामपंथी और अन्य सांसदों ने का नारा लगाया और विरोध में मुट्ठियाँ उठाईं ।
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"यूरोपीय संसद में 'इन्हें वापस भेजो' के नारे: नए प्रवासन कानून के पारित होने के बाद हंगामा" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
यूरोपीय संसद ने 17 जून 2026 को रिटर्न रेगुलेशन को 418 मतों के मुकाबले 218 मतों से मंजूरी दी, जिसके बाद दक्षिणपंथी सांसदों ने 'इन्हें वापस भेजो' के नारे लगाए और वामपंथी सांसदों ने 'शर्म करो' का नारा लगाकर विरोध जताया।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
यूरोपीय संसद ने 17 जून 2026 को रिटर्न रेगुलेशन को 418 मतों के मुकाबले 218 मतों से मंजूरी दी, जिसके बाद दक्षिणपंथी सांसदों ने 'इन्हें वापस भेजो' के नारे लगाए और वामपंथी सांसदों ने 'शर्म करो' का नारा लगाकर विरोध जताया। एमनेस्टी इंटरनेशनल फ्रांस ने कानून को 'बेतुका, क्रूर और भेदभावपूर्ण' बताया और चेतावनी दी कि यह हिरासत की शक्तियों का विस्तार करता है, ऑफशोर 'रिटर्न हब्स' की अनुमति देता है, और गैर रिफॉलमेंट के सिद्धांत को खतरे में डाल...
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
कम से कम दो यूरोपीय सांसदों फिनलैंड के सेबेस्टियन टिंकेनन और डेनमार्क के क्रिस्टोफर स्टॉर्म के खिलाफ कथित नस्लवादी टिप्पणियों और ऑनलाइन उत्पीड़न की जांच शुरू की गई है।
यूरोपीय संसद में 'इन्हें वापस भेजो' के नारे: नए प्रवासन कानून के पारित होने के बाद हंगामा
यूरोपीय संसद ने 17 जून 2026 को रिटर्न रेगुलेशन को 418 मतों के मुकाबले 218 मतों से मंजूरी दी, जिसके बाद दक्षिणपंथी सांसदों ने 'इन्हें वापस भेजो' के नारे लगाए और वामपंथी सांसदों ने 'शर्म करो' का नारा लगाकर विरोध जताया। एमनेस्टी इंटरनेशनल फ्रांस ने कानून को 'बेतुका, क्रूर और भेदभावपूर्ण' बताया और चेतावनी दी कि यह हिरास...
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यूरोपीय संसद ने 17 जून 2026 को रिटर्न रेगुलेशन को 418 मतों के मुकाबले 218 मतों से मंजूरी दी, जिसके बाद दक्षिणपंथी सांसदों ने 'इन्हें वापस भेजो' के नारे लगाए और वामपंथी सांसदों ने 'शर्म करो' का नारा लगाकर विरोध जताया।
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17 जून 2026 को यूरोपीय संसद ने नए रिटर्न रेगुलेशन को मंजूरी दे दी - यह ईयू प्रवासन कानून में एक बड़ा बदलाव है जिसका उद्देश्य निर्वासन की प्रक्रिया को तेज करना है। यह 418 मतों के पक्ष और 218 मतों के विपक्ष में, 30 मतों के परहेज के साथ पारित हुआ । जैसे ही परिणाम घोषित हुआ, स्ट्रासबर्ग में संसद सत्र में दक्षिणपंथी और दूर-दराज़पंथी सांसदों ने "इन्हें वापस भेजो" के नारे लगाने शुरू कर दिए, और कुछ ने मुट्ठियाँ भी हिलाईं । जवाब में वामपंथी और अन्य सांसदों ने का नारा लगाया और विरोध में मुट्ठियाँ उठाईं ।
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"यूरोपीय संसद में 'इन्हें वापस भेजो' के नारे: नए प्रवासन कानून के पारित होने के बाद हंगामा" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
यूरोपीय संसद ने 17 जून 2026 को रिटर्न रेगुलेशन को 418 मतों के मुकाबले 218 मतों से मंजूरी दी, जिसके बाद दक्षिणपंथी सांसदों ने 'इन्हें वापस भेजो' के नारे लगाए और वामपंथी सांसदों ने 'शर्म करो' का नारा लगाकर विरोध जताया।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
यूरोपीय संसद ने 17 जून 2026 को रिटर्न रेगुलेशन को 418 मतों के मुकाबले 218 मतों से मंजूरी दी, जिसके बाद दक्षिणपंथी सांसदों ने 'इन्हें वापस भेजो' के नारे लगाए और वामपंथी सांसदों ने 'शर्म करो' का नारा लगाकर विरोध जताया। एमनेस्टी इंटरनेशनल फ्रांस ने कानून को 'बेतुका, क्रूर और भेदभावपूर्ण' बताया और चेतावनी दी कि यह हिरासत की शक्तियों का विस्तार करता है, ऑफशोर 'रिटर्न हब्स' की अनुमति देता है, और गैर रिफॉलमेंट के सिद्धांत को खतरे में डाल...
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
कम से कम दो यूरोपीय सांसदों फिनलैंड के सेबेस्टियन टिंकेनन और डेनमार्क के क्रिस्टोफर स्टॉर्म के खिलाफ कथित नस्लवादी टिप्पणियों और ऑनलाइन उत्पीड़न की जांच शुरू की गई है।
अध्यक्ष मेत्सोला की प्रतिक्रिया और कार्रवाई की चेतावनी
यूरोपीय संसद की अध्यक्ष रॉबर्टा मेत्सोला ने इन नारों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह व्यवहार "मेरी राजनीति का प्रकार नहीं है" । हालांकि उनकी प्रारंभिक सार्वजनिक टिप्पणियाँ संयमित थीं, बाद में उन पर नागरिक समाज और रिन्यू यूरोप समूह के दबाव में अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का दबाव बना । कई गैर-सरकारी संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनके कैबिनेट से मुलाकात कर प्रतिबंधों की मांग की, और रिन्यू यूरोप समूह ने औपचारिक रूप से मेत्सोला से नारों में शामिल सांसदों के खिलाफ संभावित दंडात्मक उपायों पर विचार करने को कहा । रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम दो सांसदों - फिनलैंड के सेबेस्टियन टिंकेनन और डेनमार्क के क्रिस्टोफर स्टॉर्म - के खिलाफ कथित नस्लवादी टिप्पणियों और ऑनलाइन उत्पीड़न की जांच शुरू की गई है, और मेत्सोला को एक आधिकारिक शिकायत भेजी गई है ।
हालांकि, प्रकाशित समाचार रिपोर्टों में मेत्सोला द्वारा स्वयं विशिष्ट प्रतिबंधों या अनुशासनात्मक उपायों की चेतावनी देने वाला कोई सीधा, आधिकारिक बयान नहीं है; उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि प्रतिबंधों का दबाव अन्य समूहों से आया और उनके कार्यालय को निर्देशित किया गया, न कि उनकी ओर से कोई सक्रिय सार्वजनिक चेतावनी जारी की गई। समीक्षा किए गए स्रोतों से किसी भी अनुशासनात्मक कार्यवाही की सटीक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की आलोचना
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने नारों और नए कानून दोनों की कड़ी आलोचना की:
नारों पर: एमनेस्टी इंटरनेशनल फ्रांस और अन्य अधिकार संगठनों ने "इन्हें वापस भेजो" के नारों को अमानवीय और भेदभावपूर्ण बयानबाजी बताया जो यूरोपीय संसद में ज़ेनोफोबिया को सामान्य बनाती है ।
रिटर्न रेगुलेशन पर: एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कानून को "दंडात्मक" और मौलिक अधिकारों के लिए खतरा बताया । संगठन ने चेतावनी दी कि यह विनियमन हिरासत की शक्तियों का विस्तार करता है, अधिकतम हिरासत अवधि को 24 महीने तक बढ़ाता है (जिसमें छह महीने के विस्तार की संभावना है), तीसरे देशों में अपतटीय "रिटर्न हब्स" की स्थापना की अनुमति देता है, और निर्वासन आदेशों के साथ सहयोग न करने पर घरों की तलाशी और संपत्ति जब्त करने की अनुमति देता है । एमनेस्टी ने यह भी चेतावनी दी कि यह कानून नॉन-रिफॉलमेंट के सिद्धांत - यानी लोगों को उन देशों में वापस भेजने पर प्रतिबंध जहां उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है - को खतरे में डाल सकता है और इसके परिणामस्वरूप नाबालिगों को हिरासत में लिया जा सकता है ।
रिटर्न रेगुलेशन के प्रमुख प्रावधान
रिटर्न रेगुलेशन, जिसे यूरोन्यूज़ ने "दशकों में ब्लॉक की प्रवासन नीति में सबसे कड़ा बदलाव" बताया है , में कई विवादास्पद उपाय शामिल हैं:
विस्तारित हिरासत अवधि: प्रवासियों को 24 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है, जिसमें छह महीने के विस्तार की संभावना है ।
अपतटीय रिटर्न हब्स: ईयू देश तीसरे देशों में निर्वासन केंद्र स्थापित कर सकते हैं जहां प्रवासियों को अनिश्चित काल तक रखा जा सकता है ।
घरों की तलाशी और संपत्ति जब्त करना: अधिकारी निर्वासन आदेशों के साथ सहयोग करने से इनकार करने वाले व्यक्तियों के निजी आवासों की तलाशी ले सकते हैं और संपत्ति जब्त कर सकते हैं ।
नाबालिगों के लिए जोखिम: केवल अकेले नाबालिगों को रिटर्न हब्स में हिरासत से स्पष्ट रूप से छूट दी गई है, जिसका अर्थ है कि बच्चों वाले परिवारों को हिरासत में लिया जा सकता है ।
इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी ने रिटर्न हब्स को "कानूनी ब्लैक होल" बताया जहां अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती , जबकि 70 अधिकार समूहों के एक गठबंधन ने चेतावनी दी कि यह सुधार "आईसीई-शैली के आव्रजन प्रवर्तन" को सक्षम करेगा ।
राजनीतिक परिणाम और आगे की राह
इस वोट में केंद्र-दक्षिणपंथी यूरोपीय पीपुल्स पार्टी (ईपीपी) ने बहुमत हासिल करने के लिए दक्षिणपंथी और दूर-दराज़पंथी समूहों के समर्थन पर निर्भर रहा । इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने इस विनियमन को "एक बड़ी सफलता" बताया । जर्मन सांसद माइकल ब्लॉस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि "संसद में भीड़-भाड़ का माहौल शर्मनाक है" ।
इस कानून को पूरी तरह से लागू होने से पहले 27 ईयू सदस्य देशों की सरकारों से औपचारिक मंजूरी की आवश्यकता है । एमनेस्टी इंटरनेशनल, डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स, ऑक्सफैम और ILGA-Europe सहित नागरिक समाज संगठनों ने मेत्सोला से भेदभावपूर्ण बयानबाजी के खिलाफ मजबूत रुख अपनाने और नए नियमों के कार्यान्वयन में मौलिक अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया है ।
youtube.comRightwing MEPs chant 'send them back' after controversial deportation plans are passed
अध्यक्ष मेत्सोला की प्रतिक्रिया और कार्रवाई की चेतावनी
यूरोपीय संसद की अध्यक्ष रॉबर्टा मेत्सोला ने इन नारों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह व्यवहार "मेरी राजनीति का प्रकार नहीं है" । हालांकि उनकी प्रारंभिक सार्वजनिक टिप्पणियाँ संयमित थीं, बाद में उन पर नागरिक समाज और रिन्यू यूरोप समूह के दबाव में अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का दबाव बना । कई गैर-सरकारी संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनके कैबिनेट से मुलाकात कर प्रतिबंधों की मांग की, और रिन्यू यूरोप समूह ने औपचारिक रूप से मेत्सोला से नारों में शामिल सांसदों के खिलाफ संभावित दंडात्मक उपायों पर विचार करने को कहा । रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम दो सांसदों - फिनलैंड के सेबेस्टियन टिंकेनन और डेनमार्क के क्रिस्टोफर स्टॉर्म - के खिलाफ कथित नस्लवादी टिप्पणियों और ऑनलाइन उत्पीड़न की जांच शुरू की गई है, और मेत्सोला को एक आधिकारिक शिकायत भेजी गई है ।
हालांकि, प्रकाशित समाचार रिपोर्टों में मेत्सोला द्वारा स्वयं विशिष्ट प्रतिबंधों या अनुशासनात्मक उपायों की चेतावनी देने वाला कोई सीधा, आधिकारिक बयान नहीं है; उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि प्रतिबंधों का दबाव अन्य समूहों से आया और उनके कार्यालय को निर्देशित किया गया, न कि उनकी ओर से कोई सक्रिय सार्वजनिक चेतावनी जारी की गई। समीक्षा किए गए स्रोतों से किसी भी अनुशासनात्मक कार्यवाही की सटीक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की आलोचना
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने नारों और नए कानून दोनों की कड़ी आलोचना की:
नारों पर: एमनेस्टी इंटरनेशनल फ्रांस और अन्य अधिकार संगठनों ने "इन्हें वापस भेजो" के नारों को अमानवीय और भेदभावपूर्ण बयानबाजी बताया जो यूरोपीय संसद में ज़ेनोफोबिया को सामान्य बनाती है ।
रिटर्न रेगुलेशन पर: एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कानून को "दंडात्मक" और मौलिक अधिकारों के लिए खतरा बताया । संगठन ने चेतावनी दी कि यह विनियमन हिरासत की शक्तियों का विस्तार करता है, अधिकतम हिरासत अवधि को 24 महीने तक बढ़ाता है (जिसमें छह महीने के विस्तार की संभावना है), तीसरे देशों में अपतटीय "रिटर्न हब्स" की स्थापना की अनुमति देता है, और निर्वासन आदेशों के साथ सहयोग न करने पर घरों की तलाशी और संपत्ति जब्त करने की अनुमति देता है । एमनेस्टी ने यह भी चेतावनी दी कि यह कानून नॉन-रिफॉलमेंट के सिद्धांत - यानी लोगों को उन देशों में वापस भेजने पर प्रतिबंध जहां उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है - को खतरे में डाल सकता है और इसके परिणामस्वरूप नाबालिगों को हिरासत में लिया जा सकता है ।
रिटर्न रेगुलेशन के प्रमुख प्रावधान
रिटर्न रेगुलेशन, जिसे यूरोन्यूज़ ने "दशकों में ब्लॉक की प्रवासन नीति में सबसे कड़ा बदलाव" बताया है , में कई विवादास्पद उपाय शामिल हैं:
विस्तारित हिरासत अवधि: प्रवासियों को 24 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है, जिसमें छह महीने के विस्तार की संभावना है ।
अपतटीय रिटर्न हब्स: ईयू देश तीसरे देशों में निर्वासन केंद्र स्थापित कर सकते हैं जहां प्रवासियों को अनिश्चित काल तक रखा जा सकता है ।
घरों की तलाशी और संपत्ति जब्त करना: अधिकारी निर्वासन आदेशों के साथ सहयोग करने से इनकार करने वाले व्यक्तियों के निजी आवासों की तलाशी ले सकते हैं और संपत्ति जब्त कर सकते हैं ।
नाबालिगों के लिए जोखिम: केवल अकेले नाबालिगों को रिटर्न हब्स में हिरासत से स्पष्ट रूप से छूट दी गई है, जिसका अर्थ है कि बच्चों वाले परिवारों को हिरासत में लिया जा सकता है ।
इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी ने रिटर्न हब्स को "कानूनी ब्लैक होल" बताया जहां अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती , जबकि 70 अधिकार समूहों के एक गठबंधन ने चेतावनी दी कि यह सुधार "आईसीई-शैली के आव्रजन प्रवर्तन" को सक्षम करेगा ।
राजनीतिक परिणाम और आगे की राह
इस वोट में केंद्र-दक्षिणपंथी यूरोपीय पीपुल्स पार्टी (ईपीपी) ने बहुमत हासिल करने के लिए दक्षिणपंथी और दूर-दराज़पंथी समूहों के समर्थन पर निर्भर रहा । इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने इस विनियमन को "एक बड़ी सफलता" बताया । जर्मन सांसद माइकल ब्लॉस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि "संसद में भीड़-भाड़ का माहौल शर्मनाक है" ।
इस कानून को पूरी तरह से लागू होने से पहले 27 ईयू सदस्य देशों की सरकारों से औपचारिक मंजूरी की आवश्यकता है । एमनेस्टी इंटरनेशनल, डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स, ऑक्सफैम और ILGA-Europe सहित नागरिक समाज संगठनों ने मेत्सोला से भेदभावपूर्ण बयानबाजी के खिलाफ मजबूत रुख अपनाने और नए नियमों के कार्यान्वयन में मौलिक अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया है ।
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