दिमाग के बढ़ने के पीछे का सच:
चेहरे के छोटे होने की वजह:
यह पारंपरिक दृष्टिकोण को कैसे चुनौती देता है:
पारंपरिक कथा को सबसे बड़ी चुनौती स्रोत से मिलती है, जो Nature Human Behaviour में प्रकाशित evo-devo मॉडल है। इसने पाया कि मस्तिष्क का विस्तार प्राकृतिक चयन का प्रत्यक्ष लक्ष्य नहीं था, बल्कि यह अन्य लक्षणों के साथ आनुवंशिक संबंधों का एक उपोत्पाद (byproduct) था
। यह इस लंबे समय से चले आ रहे अनुमान को कमजोर करता है कि बड़े दिमाग को संज्ञानात्मक लाभों के लिए सीधे और मजबूती से पसंद किया गया
। इसके बजाय, अध्ययन बताता है कि मस्तिष्क का विस्तार अन्य विकासात्मक और प्रजनन संबंधी लक्षणों पर चयन के अप्रत्यक्ष परिणाम के रूप में उभरा
। हालांकि, यह अध्ययन Nature Communications में नहीं, बल्कि Nature Human Behaviour में प्रकाशित हुआ था
।
निचली पंक्ति: एक एकल Nature Communications अध्ययन नहीं मिला जो मस्तिष्क विस्तार और चेहरे की कमी दोनों को एक साथ संबोधित करता हो। सबसे प्रासंगिक चुनौती — कि मस्तिष्क का विस्तार एक अप्रत्यक्ष उपोत्पाद था, प्रत्यक्ष चयनात्मक लक्ष्य नहीं — Nature Human Behaviour के एक अध्ययन से आती है, न कि Nature Communications से
।