फ्रांस ने EU के 150 बिलियन यूरो के SAFE रक्षा कोष से UK को बाहर रखने के लिए सख्त पात्रता नियम बनवाए, लेकिन ये नियम फ्रांस की अपनी संयुक्त परियोजनाओं पर ही भारी पड़ गए। फ्रांस के 16.2 बिलियन यूरो के ऋण आवेदन में से यूरोपीय आयोग ने केवल 15.1 बिलियन यूरो को मंजूरी दी, जिससे पेरिस को लगभग 1.1 बिलियन यूरो का नुकसान हुआ।...

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यूरोपीय संघ (EU) के €150 बिलियन (करीब 13.5 लाख करोड़ रुपये) के महत्वाकांक्षी SAFE (Security Action for Europe) रक्षा ऋण कार्यक्रम से ब्रिटेन को बाहर रखने की फ्रांस की कोशिश एक कड़वे और विडंबनापूर्ण मोड़ के साथ उल्टी पड़ गई है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस द्वारा समर्थित सख्त पात्रता शर्तों ने, जो ब्रिटिश रक्षा कंपनियों को दूर रखने के लिए बनाई गई थीं, अंततः फ्रांस की अपनी ही कई फ्रेंको-ब्रिटिश संयुक्त हथियार परियोजनाओं को अयोग्य ठहरा दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि पेरिस को लगभग €1.1 बिलियन (करीब 9,900 करोड़ रुपये) के सस्ते ऋण से हाथ धोना पड़ा।
फ्रांस ने SAFE कोष के लिए कठोर पात्रता मानदंडों का समर्थन किया। यह कोष मई 2025 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य सहयोगी यूरोपीय रक्षा परियोजनाओं के लिए EU-समर्थित ऋण के रूप में €150 बिलियन जुटाना था। फ्रांस द्वारा जोर दिया गया मुख्य नियम यह था कि किसी परियोजना के मूल्य का कम से कम 65% EU सदस्य देशों, नॉर्वे या यूक्रेन से आना चाहिए। तीसरे देशों (जिसमें UK भी शामिल है) के घटकों या सामग्री की हिस्सेदारी अधिकतम 35% तक सीमित रखी गई।
फाइनेंशियल टाइम्स का हवाला देते हुए कई रिपोर्टों के अनुसार, इन नियमों को व्यापक रूप से ब्रिटिश कंपनियों के लिए एक जानबूझकर अवरोध के रूप में देखा गया। फ्रांस का तर्क था कि इस कोष का उद्देश्य सरकारों को 'यूरोपीय उत्पाद खरीदने' के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, न कि पैसा UK की उत्पादन लाइनों पर खर्च करना।
गौरतलब है कि UK के SAFE में शामिल होने की अलग से बातचीत नवंबर 2025 में ही विफल हो गई थी। लंदन ने EU द्वारा मांगी गई कई अरब यूरो की एंट्री फीस (शुरुआत में €6.5 बिलियन तक बताई गई) का भुगतान करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद बातचीत टूट गई थी।
फ्रांस ने SAFE कोष से रक्षा परियोजनाओं के लिए कुल €16.2 बिलियन के ऋण का अनुरोध किया था। इनमें कई ऐसी परियोजनाएं शामिल थीं जो ब्रिटेन के साथ संयुक्त रूप से संचालित होती हैं। यूरोपीय आयोग ने इनमें से केवल €15.1 बिलियन को मंजूरी दी, जिससे लगभग €1.1 बिलियन का अंतर रह गया।
मामले से परिचित तीन सूत्रों ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि यह अंतर इसलिए हुआ क्योंकि UK से जुड़ी कुछ परियोजनाएं फ्रांस द्वारा खुद लागू किए गए सख्त पात्रता मानदंडों को पूरा करने में विफल रहीं।
फ्रांस ने EU-समर्थित रक्षा खर्च से ब्रिटिश रक्षा कंपनियों को दूर रखने के लिए कड़े नियम बनवाए। लेकिन ये वही नियम फ्रांस की अपनी आपस में जुड़ी परियोजनाओं के लिए जाल बन गए। चूंकि फ्रांसीसी रक्षा कार्यक्रमों का एक बड़ा हिस्सा, खासकर MBDA के माध्यम से मिसाइल उत्पादन, ब्रिटिश भागीदारों और घटकों पर निर्भर है, इसलिए इन प्रतिबंधों ने ठीक उसी तरह के सहयोगी कार्य को अयोग्य ठहरा दिया, जिसे पेरिस फंड करने की योजना बना रहा था। इसका शुद्ध परिणाम यह हुआ कि फ्रांस अपने ही लिए गए लगभग €1.1 बिलियन के सस्ते ऋण तक पहुंच खो बैठा, और कई नियोजित फ्रेंको-ब्रिटिश हथियार परियोजनाओं को वित्तपोषित नहीं कर सका।
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फ्रांस ने EU के 150 बिलियन यूरो के SAFE रक्षा कोष से UK को बाहर रखने के लिए सख्त पात्रता नियम बनवाए, लेकिन ये नियम फ्रांस की अपनी संयुक्त परियोजनाओं पर ही भारी पड़ गए।
फ्रांस ने EU के 150 बिलियन यूरो के SAFE रक्षा कोष से UK को बाहर रखने के लिए सख्त पात्रता नियम बनवाए, लेकिन ये नियम फ्रांस की अपनी संयुक्त परियोजनाओं पर ही भारी पड़ गए। फ्रांस के 16.2 बिलियन यूरो के ऋण आवेदन में से यूरोपीय आयोग ने केवल 15.1 बिलियन यूरो को मंजूरी दी, जिससे पेरिस को लगभग 1.1 बिलियन यूरो का नुकसान हुआ।
MBDA जैसी कंपनियों की संयुक्त उत्पादन लाइनें और स्टॉर्म शैडो मिसाइल जैसी परियोजनाएं फ्रांस द्वारा ही लाए गए पात्रता मानदंडों के कारण अयोग्य घोषित कर दी गईं।