एक साधारण चैटबॉट के विपरीत, जो एक प्रश्न का एक बार में उत्तर देता है, एक AI एजेंट किसी कार्य को पूरा करने के लिए स्वायत्त रूप से योजना बनाता है, खोज करता है, गणना करता है, कोड निष्पादित करता है और कई चरणों में पुनरावृत्ति करता है। प्रत्येक चरण के लिए एक अलग LLM इन्फ्रेंस की आवश्यकता होती है, जो कंप्यूट और ऊर्जा दोनों को कई गुना बढ़ा देता है ।
शोधकर्ताओं ने इस खपत को डेटा सेंटर के स्तर पर विस्तारित किया और एक चौंकाने वाला परिदृश्य पेश किया। यदि हम मान लें कि भविष्य में एक दिन में 13.7 अरब AI एजेंट अनुरोध (AI अनुरोध) होते हैं, तो डेटा सेंटर की बिजली की मांग लगभग 198.9 गीगावॉट (GW) तक पहुंच सकती है । यह संख्या वर्तमान में दुनिया भर में नियोजित कुछ GW क्षमता वाले AI डेटा सेंटरों से कहीं अधिक है। वास्तव में, यह पूरे अमेरिका की औसत बिजली खपत का लगभग आधा है
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अध्ययन यह भी बताता है कि जहां एजेंट सटीकता में सुधार लाते हैं, वहीं उनकी कंप्यूट आवश्यकताओं में तेजी से घटता प्रतिफल (diminishing returns) मिलता है, जिससे बुनियादी ढांचे की लागत अस्थिर हो जाती है ।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 348.41 Wh का आंकड़ा 70 अरब पैरामीटर वाले एक विशिष्ट मॉडल पर आधारित है। छोटे या अधिक कुशल मॉडल और हार्डवेयर कम संख्या दे सकते हैं । फिर भी, यह अध्ययन एक स्पष्ट संकेत है कि AI एजेंटों को अपनाने से पहले ऊर्जा दक्षता पर गंभीरता से विचार करना होगा। जैसे-जैसे AI उद्योग "सिर्फ उत्तर देने" से "कार्य करने" की ओर बढ़ रहा है, ऊर्जा खपत का यह पहलू नीति निर्माताओं और तकनीकी कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरेगा
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