22 जून 2026 को प्रकाशित एक यूरोपीय संसद के अध्ययन ने कहा कि ECB एक क्लासिक stagflation दुविधा का सामना कर रहा है: निष्क्रियता मुद्रास्फीति को बढ़ने का जोखिम देती है, जबकि सख्ती मंदी को गहराने का जोखिम उठाती है ।
यूरोपीय आयोग (European Commission) के स्प्रिंग 2026 पूर्वानुमान ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यूरो जोन को पांच साल के भीतर दूसरी ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें तेल $100/बैरल से ऊपर है, जो वृद्धि को धीमा कर रहा है और मुद्रास्फीति को बढ़ा रहा है - यह एक क्लासिक stagflation परिदृश्य है । कई स्वतंत्र विश्लेषणों (Deutsche Bank, Eurobank, European Parliament) ने Hormuz शॉक को यूरोप और एशिया दोनों में व्यापक stagflationary दबावों को ट्रिगर करने वाला बताया है, जहां केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति से लड़ने और मंदी से बचने के बीच फंसे हुए हैं
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ECB के जुलाई ब्लॉग में एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को सबसे अधिक संवेदनशील बताया गया है । इसका कारण खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति पर उनकी संरचनात्मक निर्भरता है।
एशिया सबसे अधिक प्रभावित क्यों है?
खाड़ी आपूर्तिकर्ताओं का योगदान:
ECB के स्थैतिक विश्लेषण से पता चलता है कि एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को सबसे बड़ा उत्पादन नुकसान होगा: दक्षिण कोरिया (11% तक), भारत (लगभग 8%), और जापान (लगभग 7%), इसके बाद ASEAN अर्थव्यवस्थाएं होंगी ।
जमीनी स्तर पर परिणाम:
Banque de France (जून 2026)
यूरोपीय आयोग का स्प्रिंग पूर्वानुमान (मई 2026)
EU का प्रत्यक्ष जोखिम सीमित है, लेकिन अप्रत्यक्ष प्रभाव गंभीर हैं:
गैस बाजार पर तनाव परीक्षण: