मेहर न्यूज़ के आकलन में दावा किया गया कि कम से कम 13 देशों, जिनमें तीन पूर्वी यूरोपीय देश शामिल हैं, ने अमेरिकी दबाव के कारण अपनी योजनाओं में बदलाव किया ।
अमेरिकी दबाव और ईरान द्वारा कुछ देशों को जानबूझकर बाहर रखने के बावजूद, अंतिम संस्कार में दुनिया भर से प्रतिनिधित्व हुआ।
अमेरिकी प्रशासन का व्यापक अभियान कई कारणों से पूरी तरह सफल नहीं हुआ:
अमेरिका ने, विदेश मंत्री रुबियो के नेतृत्व में, ईरान के नेता के अंतिम संस्कार को अलग-थलग करने के लिए एक समन्वित और आक्रामक कूटनीतिक अभियान चलाया। हालाँकि, ईरान की अपनी कूटनीति, रूस, चीन और पाकिस्तान सहित प्रमुख देशों की उपस्थिति, और जनसमर्थन के विशाल प्रदर्शन ने मिलकर इस कोशिश को काफी हद तक नाकाम कर दिया। अंततः, यह अंतिम संस्कार युद्ध और शांति वार्ता के बीच की जटिल भू-राजनीति का एक प्रतीक बन गया, जहाँ कोई भी पक्ष पूरी तरह से अपनी बात नहीं मनवा पाया।