इसके बाद, उच्च-शक्ति वाली माइक्रोस्कोपी का उपयोग करते हुए, टीम ने इन ज्ञात निशानों की तुलना लियांग बुआ गुफा (Liang Bua cave) — वही गुफा जहां 2003 में होमो फ्लोरेसिएन्सिस के जीवाश्म मिले थे — से प्राप्त स्टेगोडोन (Stegodon, जो हाथी की एक बौनी प्रजाति थी) की हड्डियों पर मौजूद निशानों से की। परिणाम निर्णायक था। डॉ. एलिज़ाबेथ ग्रेस वीच (Elizabeth Grace Veatch) ने बताया कि वे खुद हैरान रह गईं जब 'लगभग सभी निशान कोमोडो ड्रैगन के दांतों के निकले' ।
सबसे अहम बात, निशानों के वितरण (distribution) ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसने पहले खाया। कोमोडो ड्रैगन के दांतों के निशान शरीर के सबसे मांसल हिस्सों (कंधे और कूल्हे) पर केंद्रित थे। इसके विपरीत, हॉबिट्स द्वारा इस्तेमाल किए गए पत्थर के औजारों (stone tools) के कट के निशान केवल कम पसंद किए जाने वाले हिस्सों (पैर और पसलियां) पर पाए गए। यह स्थानिक पैटर्न मुर्दाखोरी का एक क्लासिक संकेत है: शीर्ष शिकारी पहले खाता है, फिर छोटे मुर्दाखोर बचे हुए हिस्से पर हाथ साफ करते हैं ।
वर्षों तक लियांग बुआ गुफा में मिली जली हुई हड्डियों को इस बात का सबूत माना जाता था कि होमो फ्लोरेसिएन्सिस आग पर काबू रखता था। नए अध्ययन ने इस दावे को व्यवस्थित तरीके से खारिज किया है। टीम ने उन लगभग 4,500 कृंतक (चूहे) हड्डियों का विश्लेषण किया जो हजारों वर्षों तक गुफा में बसेरा करने वाले उल्लुओं द्वारा गुफा में जमा की गई थीं। इनमें से एक भी हड्डी पर जलने या झुलसने का निशान नहीं मिला। शोधकर्ताओं का तर्क है कि यदि गुफा में चूल्हे बनाए गए होते, तो उनके नीचे पड़ी हड्डियों पर स्पष्ट रूप से गर्मी का प्रभाव दिखाई देता ।
इसी तरह, स्टेगोडोन की किसी भी हड्डी पर जलने का चिह्न नहीं मिला । जो पहली बार की गई खुदाई में जली हुई हड्डियाँ होमो फ्लोरेसिएन्सिस को मानी गई थीं, उन्हें नए सिरे से दिनांकित किया गया तो पता चला कि वे गुफा की युवा परतों (जहाँ होमो सेपियन्स रहते थे) से संबंधित हैं — लगभग 46,000 वर्ष पुरानी, यानी उस समय की जब हॉबिट्स और स्टेगोडोन विलुप्त हो चुके थे। आग का सबूत महज स्ट्रेटीग्राफी (भूगर्भिक परतों) की गलत पहचान का मामला निकला
।
खाना पकाने के लिए आग के बिना, हॉबिट्स का आहार पहले की कल्पना से बिल्कुल अलग था। जहाँ दांतों के घिसाव के विश्लेषण से लंबे समय से पता चलता आ रहा है कि वे एक सख्त, रेशेदार आहार खाते थे जिसके लिए जोरदार चबाने की जरूरत थी (जो पौधों के सेवन की ओर इशारा करता है), वहीं उनके आहार में मांस का हिस्सा कच्चा और मुर्दाखोरी से प्राप्त था । चूँकि कोमोडो ड्रैगन का जहर (venom) पेट के एंजाइमों द्वारा नष्ट हो जाता है, इसलिए मुर्दाखोरी से हॉबिट्स को जहर होने का कोई खतरा नहीं था
। वे संभवतः छोटे जानवरों, कीड़ों और स्थानीय पादप खाद्य पदार्थों से भी अपनी आहार पूर्ति करते थे
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यह अध्ययन फ्लोरेस द्वीप के पारिस्थितिकी तंत्र में हॉबिट्स के स्थान को स्पष्ट करता है। कोमोडो ड्रैगन (Varanus komodoensis) निर्विवाद रूप से सर्वोच्च शिकारी थे, जो अपने जहरीले दंश से स्टेगोडोन का शिकार करते थे । होमो फ्लोरेसिएन्सिस इस द्वीप पर मुर्दाखोरों के एक व्यापक समूह का सिर्फ एक सदस्य था, जिसमें गिद्ध, विशालकाय सारस और कौवे भी शामिल थे, और सभी स्टेगोडोन के शवों पर निर्भर थे
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ड्रैगन के प्रभुत्व के बावजूद, हॉबिट्स आमतौर पर उनके शिकार नहीं बनते थे। आधुनिक कोमोडो ड्रैगन बिना उकसावे के मनुष्यों पर बहुत कम हमला करते हैं, और लेखकों का सुझाव है कि समूह में रहना और सतर्कता बरतना संभवतः उनके बचाव के लिए पर्याप्त था ।
शायद इस अध्ययन का सबसे गहरा निहितार्थ होमो फ्लोरेसिएन्सिस के मानवीय परिवार वृक्ष पर स्थान के बारे में है। बड़े जानवरों के शिकार और नियंत्रित आग के उपयोग की अनुपस्थिति एक काफी कम उन्नत व्यवहारिक टूलकिट (behavioral toolkit) का संकेत देती है। यह सीधे तौर पर इस धारणा को कमजोर करती है कि वे होमो इरेक्टस की एक बौनी प्रजाति थे, जिसे आग के उपयोग और बड़े शिकार के लिए जाना जाता है ।
इसके बजाय, अध्ययन एक अल्पमत दृष्टिकोण (minority view) को बल देता है: कि होमो फ्लोरेसिएन्सिस एक अधिक आदिम होमिनिन (शायद होमो हेबिलिस-जैसा या ऑस्ट्रेलोपिथेकस-जैसा) से विकसित हुआ होगा जो 10 लाख साल से भी पहले, होमो प्रजाति की उन्नत व्यवहारिक विशेषताओं के विकसित होने से पहले ही फ्लोरेस पहुँच गया था ।
मुख्य लेखिका वीच ने कहा: 'एक अधिक सरल व्यवहारिक प्रदर्शन एक ऐसे वंश का संकेत हो सकता है जो इन अधिक उन्नत व्यवहारिक अनुकूलन से पहले ही होमो वंशावली से अलग हो गया था' । लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के डॉ. क्रिस स्ट्रिंगर (Chris Stringer), जो इस अध्ययन में शामिल नहीं थे, ने कहा कि यह 'उस अल्पमत दृष्टिकोण को पुष्ट करता है कि फ्लोरेसिएन्सिस वास्तव में होमो वंश में नहीं आता और इसे पुनर्वर्गीकृत किया जाना चाहिए'
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हालाँकि, सभी विशेषज्ञ पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। स्मिथसोनियन की पेलियोइकोलॉजिस्ट के बेहरेन्समेयर (Kay Behrensmeyer) का कहना है कि 'हड्डियों पर मौजूद परिवर्तनों के आधार पर शिकार को मुर्दाखोरी से अलग करना बहुत मुश्किल है' और वे 'सिर्फ मुर्दाखोरी' की परिकल्पना पर अभी पूरी तरह सहमत नहीं हैं — हालाँकि उन्होंने कोमोडो और औजारों के निशानों की पहचान को लेकर टीम के तर्क को सम्मोहक बताया ।