2 जुलाई तक, जलडमरूमध्य उम्मीद से भी तेजी से खुल रहा था और तेल की कीमतों में लगभग 1% की गिरावट जारी रही । खाड़ी के उत्पादकों ने संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के तटों पर जहाज-से-जहाज (ship-to-ship) स्थानांतरण के माध्यम से निर्यात बढ़ा दिया था, जिससे मध्य पूर्वी कच्चे तेल के स्पॉट अंतर (spot differentials) पर दबाव बना ।
तेल की कीमतों में इस नाटकीय गिरावट ने वैश्विक मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण को नया आकार दिया है। बाजार विश्लेषण बताते हैं कि कम ऊर्जा कीमतों ने केंद्रीय बैंकों पर सख्त रुख (हॉकिश) बनाए रखने का दबाव कम कर दिया है । प्रमुख घटनाक्रम इस प्रकार हैं:
स्टैंडर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered) ने अपने विश्लेषण में कहा कि यदि तेल की कीमतों में वृद्धि कुछ हफ्तों से अधिक नहीं टिकती है, तो वैश्विक मुद्रास्फीति का दबाव क्षणिक होगा। इससे 'सॉफ्ट-लैंडिंग' परिदृश्य की वापसी हो सकती है, जो 2026 की दूसरी छमाही में फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में कटौती से समर्थित होगा ।
फेड के दृष्टिकोण पर रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि हरमुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने और गिरती तेल कीमतों ने इस अटकलबाजी को बढ़ा दिया है कि फेडरल रिजर्व दिसंबर की शुरुआत में ही ब्याज दरों में कटौती शुरू कर सकता है ।
सिटीग्रुप (Citigroup) ने कहा कि तेल की कीमतों में गिरावट 'केंद्रीय बैंकों की कुछ सख्ती को कम कर सकती है' ।
इन स्रोतों में व्यापक रूप से यह राय साझा की गई है कि यदि तेल की कीमतें कम रहती हैं, तो संकट-प्रेरित 'पीक हॉकिशनेस' का चरण समाप्त हो सकता है। हालांकि, मौद्रिक नीति का मार्ग इस बात पर निर्भर करेगा कि ऊर्जा का झटका अस्थायी साबित होता है या नहीं । स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने एक नकारात्मक परिदृश्य की 30% संभावना व्यक्त की है, जिसमें तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, जो फेड की दरों में कटौती की क्षमता को सीमित कर सकता है ।
सभी प्रमुख स्रोत इस बात पर जोर देते हैं कि यह दृष्टिकोण अत्यधिक सशर्त और नाजुक है:
अमेरिका-ईरान समझौते को एक स्थायी समाधान की दिशा में एक ढांचे के रूप में वर्णित किया गया है, न कि पूर्ण और अंतिम शांति समझौते के रूप में । 17 जून, 2026 को वर्साय में हस्ताक्षरित 'इस्लामाबाद ज्ञापन' का उद्देश्य युद्धविराम को बढ़ाना, जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और अंतिम समझौते पर बातचीत के लिए 60 दिनों की खिड़की बनाना है ।
30 जून को, ईरान ने कहा कि वह कतर में शीर्ष अमेरिकी दूतों से नहीं मिलेगा, जिससे स्थायी शांति की संभावनाओं पर बादल छा गए । ईरानी अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों को परमाणु कार्यक्रम की सीमाओं जैसे अधिक कठिन विषयों पर बातचीत करने से पहले दो सप्ताह पहले हस्ताक्षरित युद्धविराम की शर्तों को स्पष्ट करना होगा ।
रॉयटर्स के ब्रेकिंगव्यूज कॉलम ने चेतावनी दी कि युद्धविराम नाजुक है और यह अनिश्चित है कि ईरानी और अमेरिकी सेनाएं टैंकरों के सुरक्षित मार्ग की सुविधा के लिए युद्ध से सहयोग की ओर कैसे परिवर्तित होंगी ।
यह युद्धविराम स्थायी शांति के बजाय एक सामरिक कदम हो सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम के कायम रहने का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राजनीति है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के मद्देनजर, ट्रम्प प्रशासन गैसोलीन की कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम नहीं उठा सकता है ।
यदि युद्धविराम टूटता है या हरमुज शिपिंग में फिर से व्यवधान पैदा होता है, तो तेल की कीमतों में गिरावट उलट सकती है और केंद्रीय बैंकों पर सख्त रुख बनाए रखने का दबाव फिर से बढ़ सकता है ।