अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून 2026 को 'इस्लामाबाद ज्ञापन' (14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर हुए, जिसने चार महीने के युद्ध को समाप्त किया और होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक शिपिंग के लिए फिर से खोल दिया [2][3][4]। इस समझौते के तहत तत्काल सैन्य अभियानों की समाप्ति, ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटा...

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यह जून 2026 में ओपेक (OPEC) के उत्पादन और वैश्विक तेल बाजारों में हुए प्रमुख घटनाक्रमों का एक तथ्य-आधारित सारांश है, जो उपलब्ध रिपोर्टिंग पर आधारित है।
अमेरिका और ईरान ने 17 जून, 2026 को एक 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (जिसे "इस्लामाबाद ज्ञापन" कहा गया) को औपचारिक रूप दिया, जिसका उद्देश्य लगभग चार महीने की शत्रुता को समाप्त करना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को वाणिज्यिक शिपिंग के लिए फिर से खोलना था । इस समझौते में तत्काल सैन्य अभियानों को समाप्त करने, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और स्थायी शांति वार्ता के लिए 60 दिनों की अवधि के लिए जलडमरूमध्य से मुफ्त आवागमन की बात कही गई
। इस समझौता ज्ञापन पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र क़ालिबाफ़ ने इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर किए, जबकि 19 जून को स्विट्जरलैंड में एक औपचारिक हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया गया
।
मई 2026 — 37 वर्षों का निचला स्तर: मई में ओपेक के 11 सदस्य देशों का कच्चा तेल उत्पादन घटकर 1.633 करोड़ बैरल प्रतिदिन (bpd) पर आ गया, जो अप्रैल की तुलना में 12.2 लाख बैरल प्रतिदिन कम था। यह वर्ष 2000 के बाद का सबसे निचला स्तर था, जिसे कुछ स्रोतों ने 37 वर्षों का निचला स्तर बताया । इस गिरावट का मुख्य कारण ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभावी रूप से बंद होना था, जिसने ईरान और अन्य खाड़ी उत्पादकों के निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया
। अकेले ईरान का उत्पादन लगभग 7.10 लाख बैरल प्रतिदिन गिरकर 23.4 लाख बैरल प्रतिदिन पर आ गया, जो पांच वर्षों में सबसे कम था
।
जून 2026 — उत्पादन में भारी उछाल: समझौता ज्ञापन और जलडमरूमध्य के फिर से खुलने के बाद, ओपेक ने जून में उत्पादन में लगभग 33 लाख बैरल प्रतिदिन की वृद्धि की, जो 3 जुलाई की रॉयटर्स सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1.943 करोड़ बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया । आपके प्रश्न में उल्लिखित 1.875 करोड़ बैरल प्रतिदिन का आंकड़ा इसके करीब है, लेकिन स्रोत और सर्वेक्षण पद्धति के आधार पर इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है। ओपेक+ ने 7 जून को लगातार चौथी बार मासिक उत्पादन कोटा बढ़ाने (जुलाई से 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन) पर भी सहमति जताई
।
युद्ध-पूर्व स्तर से अभी भी दूर: जून में उछाल के बावजूद, ओपेक का उत्पादन अपने युद्ध-पूर्व स्तर (ओपेक के 11 सदस्यों के लिए लगभग 2.9 करोड़ बैरल प्रतिदिन) से काफी नीचे बना हुआ है । ईआईए (EIA) ने आकलन किया कि मध्य पूर्व में मई में उत्पादन ठप (shut-ins) लगभग 1.08 करोड़ बैरल प्रतिदिन के चरम पर पहुंच गया था, जो आपूर्ति का एक बड़ा नुकसान है जिसे पूरी तरह से बहाल होने में कई महीने या वर्ष भी लग सकते हैं
।
ब्रेंट क्रूड में लगभग 21% और WTI में 20% से अधिक की गिरावट। जून में तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई क्योंकि युद्ध से जुड़ा जोखिम प्रीमियम (war risk premium) बाजार से तेजी से गायब हो गया:
यह गिरावट युद्ध के चरम मूल्यों से ब्रेंट में लगभग 21% और WTI में 20% से अधिक थी, जिसने पूरे युद्ध जोखिम प्रीमियम को मिटा दिया और कीमतों को युद्ध-पूर्व स्तर ($71 प्रति बैरल से नीचे) पर ला दिया ।
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अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून 2026 को 'इस्लामाबाद ज्ञापन' (14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर हुए, जिसने चार महीने के युद्ध को समाप्त किया और होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक शिपिंग के लिए फिर से खोल दिया [2][3][4]।
अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून 2026 को 'इस्लामाबाद ज्ञापन' (14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर हुए, जिसने चार महीने के युद्ध को समाप्त किया और होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक शिपिंग के लिए फिर से खोल दिया [2][3][4]। इस समझौते के तहत तत्काल सैन्य अभियानों की समाप्ति, ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और 60 दिनों के लिए जलडमरूमध्य से मुफ्त आवागमन की बात कही गई [1][3][5]।
मई 2026 में ओपेक का उत्पादन 37 साल के निचले स्तर 1.633 करोड़ बैरल प्रतिदिन पर आ गया था, जो होर्मुज बंद होने और ईरान पर प्रतिबंधों की वजह से था [7][8]।