जून 2026 के अंत में यूरोप में आई भीषण गर्मी की लहर ने पूरे महाद्वीप को अपनी चपेट में ले लिया। इसने न केवल मानव जीवन को प्रभावित किया, बल्कि अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर भी गहरा असर डाला। यहाँ हम इसके विभिन्न आयामों पर एक विस्तृत नज़र डाल रहे हैं।
मानवीय क्षति: मौतें और जलवायु परिवर्तन की भूमिका
एक त्वरित वैज्ञानिक मूल्यांकन के अनुसार, जून के अंत से जुलाई की शुरुआत तक चले इस भीषण हीटवेव में यूरोप के 12 शहरों में लगभग 2,300 लोगों की गर्मी से संबंधित मौतें हुईं
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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से लगभग 1,500 मौतें (लगभग 65%) मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण हुईं। इसका मतलब है कि जलवायु परिवर्तन ने इस हीटवेव से होने वाली मौतों की संख्या को लगभग तीन गुना कर दिया
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- अकेले स्पेन में, कार्लोस III स्वास्थ्य संस्थान ने जून के महीने में गर्मी से संबंधित 1,028 मौतों की सूचना दी, जो जून 2025 में दर्ज 407 मौतों से दोगुने से भी अधिक है
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- एक अन्य विश्लेषण में, जिसमें पूरे यूरोपीय ग्रीष्मकाल को 854 शहरों में शामिल किया गया, पाया गया कि जलवायु परिवर्तन के कारण 16,469 अतिरिक्त मौतें हुईं, जो गर्मी से होने वाली कुल अनुमानित मौतों का लगभग 70% है
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